Thursday, March 31, 2011

दिल को दुरुस्त रखें सब्जियां


हमारे खानपान में शामिल अनेक वस्तुएं ऐसी हैं जो शरीर के राजा हृदय को अपने गुणों के कारण दुरुस्त रखती हैं। प्रतिदिन खाली पेट लहसुन की दो कलियां सेवन करने से कोलेस्ट्रॉल संतुलित रहता है। मेथी के दाने व भाजी से भी यही लाभ मिलता है। प्याज सलाद में शामिल होकर रक्त प्रवाह ठीक रखता है। यह कमजोर हृदय की स्थिति में घबराहट या दिल की धड़कन बढ़ने पर लाभ दिलाता है। गाजर की सब्जी, सलाद या रस दिल की बढ़ी हुई धड़कन ठीक करता है। लौकी की सब्जी या रस कोलेस्ट्रॉल का स्तर सामान्य अवस्था में लाता है। टमाटर में मौजूद तत्व सलाद व सब्जी के माध्यम से दिल की बीमारी का खतरा कम करते हैं अतएव सुविधा के अनुसार इन्हें सेवन कर दिल को दुरूस्त रखें।

सेहत बनानी है तो पिंड खजूर खाएं

पिंड खजूर एक पका मीठा सूखा फल है जो मेवा की श्रेणी में आता है। यह ग्लूकोज, आयरन, कैल्शियम एवं ऊर्जा से भरपूर स्वादिष्ट फल है। यह तेज ताप में मरूस्थलीय क्षेत्रों में ज्यादा होता है। यह सेहत के लिए सभी दृष्टि से लाभकारी है। इसका गुड़ भी बनाया जाता है। इसका सूखा रूप छुहारा कहलाता है। दोनों रूप में इसका गुण समान होता है। इसमें आयरन खून को बढ़ाता है जबकि कैल्शियम हड्डियों को मजबूत करता है।
यह शरीर में रक्त संचार को सही रखता है। इसको खाने से सर्दी जुकाम, खांसी, बुखार जैसी समस्याएं कम होती हैं। मस्तिष्क की कार्य क्षमता बढ़ती है। इसमें मौजूद कार्बोज एवं कैलोरी के कारण यह वजन बढ़ाने में सहायक है। यह पेट साफ रखता है, कब्ज दूर करता है एवं थकान मिटाता है। इसमें प्रोटीन, खनिज, कार्बोज, आयरन, कैल्शियम, पोटेशियम मौजूद हैं।

कैसे करें योगासन?

नियमित योगासन से व्यक्ति अपने आपको लम्बे समय तक चुस्त-दुरूस्त बनाये रख सकता है। योग बीमारियों से बचे रहने का सबसे बेहतर उपाय है, लेकिन योगासन यूं ही नहीं किये जा सकते। योग कैसे करना चाहिए तथा इसे करने से पहले और बाद में क्या करना चाहिए और क्या नहीं, यहां हम इस बारे में महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध करा रहे हैं :- योगासन प्रातःकाल शौच आदि से निवृत्त होने के बाद ही करना चाहिए। यदि स्ान करने के बाद योगासन किया जाये तो और भी अच्छा है, क्योंकि स्ान करने से हमारा शरीर हल्का-फुल्का और स्फूर्तियुक्त बन जाता है। संध्या काल में भोजन से पूर्व आसन किये जा सकते हैं। प आसन करने की जगह समतल, स्वच्छ और शांत होनी चाहिए। भूमि पर मोटी दरी या कालीन आदि बिछाकर योगासन करें। प आसन करते समय बातचीत न करें। यदि आसन एकाग्रता से किये जायें तो शारीरिक और मानसिक लाभ अधिक होते हैं। प अभ्यास करते समय छड़ी, चश्मा या आभूषण न पहनें। प योगासन झटके के साथ या बलपूर्वक नहीं करें। इससे शरीर में पीड़ा हो सकती है। प योगासन करते समय ढीले कपड़े पहनने चाहिए। प जटिल रोगों में या अधिक ज्वर में आसन न करें। महिलाओं को गर्भधारण के चार महीनों के बाद, प्रसूति के तीन महीनाेंं और मासिक धर्म के समय आसन नहीं करने चाहिए। प आसनों की संख्या और उनकी अवधि धीरे-धीरे ही बढ़ानी चाहिए। पहले ही दिन अधिक आसन कर डालने का प्रयास ठीक नहीं है। प यदि आसन करते समय शरीर के किसी भाग में अधिक दर्द होता हो तो उस आसन का अभ्यास तुरन्त बन्द कर दें। प आसन करते समय व्यक्ति को यथासंभव हल्का भोजन करना चाहिए ताकि शरीर हल्का-फुल्का रहे। प योगासन करते समय शरीर को हवा का सीधा झोंका न लगे, यह ध्यान रखें। योगासन करते समय शरीर के किसी भी जोड़ को उसके कुदरती मोड़ के अनुसार ही मोड़ना चाहिए। कभी भी उल्टे या तिरछे होने का प्रयत्न न करें। प योगासन के अभ्यास के क्रम का भी ध्यान अवश्य रखें, फिर प्राणायम और अंत में ध्यान करें।

महिलाओं के रोग और बायोकैमिक दवाएं

यह तो आप जानते ही होंगे कि बायोकैमिक चिकित्सा पध्दति हानि रहित व लवण चिकित्सा पध्दति है। इस पध्दति में मात्र 12 लवणीय दवाएं है, जो शरीर के लिए आवश्यक है। इन दवाओं की और विशेषता यह है कि ये अधिक मात्रा में दे देने या सभी 12 दवाएं एक साथ दे देने पर भी शरीर को किसी प्रकार की हानि नहीं पहुंचती। यहां हम आपकी जानकारी के लिए सभी 12 दवाओं का महिलाओं से संबंधित विभिन्न रोगों से जुड़ा महत्व बता रहे हैं।

* कल्केरिया फ्लोर : यह दवा गर्म अवस्था में गर्भाशय की संकुचन स्थिति ठीक करती हैष गर्भाशय को मजबूती प्रदान करती है तथा मासिक धर्म के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव को सही स्थिति प्रदान करती है।

* कल्केरिया फॉस : यह प्रसव कमजोरी, मासिक धर्म, स्तन पीड़ा, कमर दर्द, श्वेत प्रदर को ठीक करती है। इससे कैल्शियम की कमी को भी दूर किया जा सकता है।
कल्केरिया सल्फ : योनि में खुजली, स्तनों में दर्द, मासिक धर्म की अनियमित स्थिति को ठीक करने के लिए यह दवा उत्तम है।

* फेरम फॉस : यह लवण मासिक धर्म विकृति, शुष्क योनि आदि रोगों में बहुत लाभप्रद है।

* काली मयूर : यह एक तरह से कीटाणुनाशक है। गर्भाशय के घाव, प्रसूति ज्वर में तो बहुत फायदेमंद है।

* काली सल्फ : मासिक धर्म में देरी अथवा अनियमितता सूजाक में बहुत फायदेमंद है।
मैग्नीशिया फॉस : मासिक धर्म के प्रारंभ के समय के कष्ट में डिम्ब ग्रंथियों के दर्द में यह दवा देनी चाहिए।

* नेट्रम मयूर : बांझपन, योनि में जलन, योनि की भीतरी जलन, मैथुन क्रिया के प्रति उदासीनता या उत्तेजना की कमी अथवा स्तनों में दूध की कमी हो तो इस साल्ट का सेवन करना चाहिए।

* नेट्रम फॉस : तिथि से पूर्व मासिक धर्म आना, बदबूदार श्वेत प्रदर, योनि से बदबू आए अथवा बांझपन की स्थिति हो तो इस दवा का सेवन लाभप्रद रहता है।

* नेट्रम सल्फ : मासिक धर्म के दिनों में अपच, पेट दर्द, योनि के छिलने से उत्पन्न पीड़ा हो तो इस दवा का सेवन करें।

* काली फॉस : मासिक धर्म में काम इच्छा, शरीर में पीड़ा, अत्यधिक रक्तस्राव हो तो काली फॉस का सेवन करें।
* साइलीशिया : दुर्गन्धयुक्त मासिक धर्म, स्तन के घाव, स्तनों में गांठ होने या कड़े हो जाने पर, योनि के घाव, मासिक धर्म के दिनों में कब्ज हो तो यह लवण दे सकते हैं।
जहर करेगा स्वर संबंधी विकारों का उपचार सर्वाधिक असरदार और प्राकृतिक विष माने जाने वाले बोटलिनम यया बोटॉक्स का प्रयोग अब तक आंख की एठी हुई मांसपेशियों को ढीला करने और चेहरे की झुर्रिया व झाईयां दूर करने के लिए उसकी मांसपेशियां शिथिल करने में ही किया जाता रहा है किन्तु अब गले की सर्जरी में आवाज गंवा चुके मरीजों की आवाज वापस लाने में भी बोटाक्स नामक यह अत्यन्त तीव्र विष प्रभावी दवा का काम कर रहा है। गले के कैंसर या ऐसे ही अन्य मुख व कंठ विकारों में प्राय: रोगियों का स्वरयंत्र निकाल दिया जाता है और उन्हें अपने कंठ की मांसपेशियां स्वत: ही नियंत्रित करनी पड़ती है जबकि आमतौर पर स्वरयंत्र ही हवा के जरिये आवाज का नियंत्रण करता है। ऐसे में आपरेशन के बाद सामान्य रूप से अपनी प्राकृतिक आवाज पुन: पाना बहुत मुश्किल होता है। कंठ की मांसपेशियों का नियंत्रण स्वयं करते हुए कई बार वे एेंठने लगती हैं और आवाज ठीक से नहीं आ पाती।

टैक्सास विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों के अनुसार स्वरयंत्र के अभाव में कंठ की मांसपेशियों पर बोटाक्स विष का प्रयोग उन्हें शिथिल कर देता है, जिससे उनमें ऐठन नहीं हो पाती और आवाज लगातार ठीक से आती रहती है। वैज्ञानिक दल ने करीब 23 रोगियों पर बोटाक्स का प्रयोग किया, जिनमें से 15 रोगियों की आवाज में फर्क पहले ही इंजेक्शन में आ गया जबकि दूसरा एंजेक्शन देने पर चार अन्य रोगियों की आवाज वापस आ गयी और शेष चार में से एक रोगी की आवाज तीसरा इंजेक्शन देने पर वापस आ गयी। इस महत्वपूर्ण शोध से उत्साहित टैक्सास विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों का मानना है कि स्वर संबंधी विकारों के उपचार में बोटाक्स विष बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

दवाई खाएं, मगर अन्धाधुन्ध नहीं

यदि व्यक्ति बीमार पड़ जाता है तो उसे किसी न किसी दवा का सहारा तो लेना ही पड़ता है। फिर भी दवा सीमित खानी चाहिए, अन्धाधुंध नहीं। वह भी तब जब जरूरी है।

* जरा सी तकलीफ हुई नहीं कि हम पहुंच जाते हैं डाक्टर के पास। हमें ऐसा नहीं करना चाहिए। उस कारणों को अपने व्यवहार से निकाल फेंकना चाहिए, जिनसे रोग हुआ। डाक्टर तक पहुंचने की नौबत गंभीर अवस्था में हो।
* यह बात मान लेनी चाहिए कि हम प्रयत्न कर, अपने आहार में जरूरी सुधार व परिवर्तन कर, उपयुक्त व्यायाम का सहारा लेकर अपने रोग को उखाड़ सकते हैं। इस प्रकार के प्रयत्न से यदि रोग मुक्त हो जाएंगे तो फिर से यह नहीं उभर सकेगा। इसे जड़ से उखाड़ फेंकना लक्ष्य हो आपका।
* यह भी पता चला है कि बहुत से रोगों का मुख्य कारण अधिक कब्ज होना या पाचन शक्ति में गड़बड़ हो जाना या फिर पेट में कोई विकार घर कर जाना। यदि इस ओर हम सदा ध्यान देते रहें तो रोग होंगे ही नहीं।

Wednesday, March 30, 2011

दस्त और डीहाईड्रेशन में सावधानियां

दस्त या अतिसार स्वयं तो रोग है ही, यदि ये बने रहें तो शरीर में पानी की कमी हो जाना लाजमी है। यह शरीर में पानी की कमी ही डीहाईड्रेशन है, जो कि दस्तों से भी अधिक खतरनाक है। अत: दस्तों का सही, तुरंत इलाज करना जरूरी है। बार-बार शौच जाना बहुत कमजोरी भी ला देता है।

कारण : 1. अशुध्द दूषित पानी पीना, 2. अंतड़ियों में भोजन का सड़ना, 3. आवश्यकता से अधिक खाना, 4. किसी अन्य रोग के कारण एन्टीबायोटिक दवाएं खाना, 5. ऐसी दवाएं खाना जो दस्त लगाती हों, 6. भोजन की किसी प्रकार से एलर्जी हो जाना, 7. बासी भोजन खाने से, 8. फल से जो गल-सड़ गये हों, 9. पुरानी मिठाई से, 10. गंदे, मक्खियों वाले, धूल वाले कटे फल आदि खाने से भी, 11. घबराहट, मानसिक दबाव, भय तथा तनाव भी दस्त लगा देते हैं।
उपचार : दस्तों से बचने के लिए निम्नलिखित उपचार कर सकते हैं-
जीरा तथा सौंफ से- एक चम्मच जीरा, एक चम्मच सौंफ लेकर तवे पर भून लें। फिर चकला-बेलना पर या सिल पर पीसें। इसे खाकर ताजा पानी पी लें। ऐसी तीन खुराक एक दिन में लेनी है। कुल चार दिन उपचार करना है। यह चूर्ण इकट्ठा, एक बार बनाकर भी रख सकते हैं।
ईसबगोल की भूसी से- ईसबगोल की भूसी के दो चम्मच लें। एक डिश प्लेट दही में मिलाकर खाएं। ऐसी तीन खुराक दिन में लें। तीन दिनों तक लेते रहें। आराम मिलेगा।
अदरक का रस- एक प्याला उबला हुआ पानी लें। इसमें अदरक का ताजा रस एक चम्मच डालें। कुछ देर रखा रहने दें। जब गुनगुना हो जाए तो पी लें। ऐसी चार खुराक हर घंटे-डेढ़ घंटे के बाद लें। दो ही दिनों में आराम मिल जायेगा।
डीहाईड्रेशन से बचें- इस रोग में डीहाईड्रेशन का बहुत डर रहता है। इससे बचने का प्रयत्न करना जरूरी है।
1. उबाल कर, ठंडा करके पानी पीने की आदत डाले।
2. इलेक्ट्राल को घोलकर पीते रहें।
3. गुनगुने पानी में चीनी, नमक और नींबू स्वाद के अनुसार मात्रा में डालें और पी लें। दिन भर पीते रहें जब तक दस्त परेशान कर रहे हों। ऐसा करने से पानी की कमी नहीं होती और रोग भी जल्दी शांत होता है। इस रोग से कमजोरी भी आ जाती है। अत: जल्दी से जल्दी इलाज कर अपना बचाव करें।

दो सेब खाने से भाग जाएगा आपका गुस्सा

आजकल हर व्यक्ति के ऊपर जरूरत से ज्यादा काम का बोझ और जिम्मेदारियां आ गई हैं। इन्हीं कारणों को लेकर आज ज्यादातर लोगों का स्वभाव चिढ़चिढ़ा हो गया है।कई कोशिशों के बाद भी वे अपने गुस्से पर कन्ट्रोल नहीं कर पाते हैं।

कई बार उनका यही गुस्सा कई मुसीबतों का कारण भी बन जाता है। लेकिन अब आपको चिंता करने की जरूरत नहीं है नीचे एक कारगर घरेलू नुस्खा बताया जा रहा है जिसको आजमा कर आप अपने गुस्से को हमेशा के लिए दूर कर सकते है।

- दो पके हुए सेब बिना छीले ही सुबह सुबह खाली पेट खूब चबा चबाकर खाएं। लगातार पन्द्रह दिन सेब खाने से किसी भी तरह का गुस्सा हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा।

विशेष- जिन लोगों का दिमाग कमजोर हो या जिन स्टूडेण्टस को याद न रहने की समस्या हो वे इस नुस्खे को जरूर आजमाएं। इस नुस्खे को आजमाने से मेमोरी शार्प होती है।

Tuesday, March 29, 2011

हेल्दी रखती हैं नैचरल चीजें

एक परफेक्ट मील के लिए जरूरी है कि आप सही चीजों को मिक्स करें और इनमें बैलेंस बनाए रखें। आपको बताते हैं कुछ बेसिक रूल्स, जिन्हें अपनाकर आपका खाना टेस्टी होने के साथ ही हेल्दी भी हो जाएगा:

रूल 1
उन्हीं सब्जियों और फलों का इस्तेमाल करें, जो सीजन में हैं। क्या आपने जून के महीने में सेब खाए हैं? इस मौसम में सेब बिना रस वाला और टेस्टलेस होता है। यह याद रखें कि अगर सब्जियां व फल सीजन के बाहर मिल रहे हैं, तो वे आर्टिफिशल तरीके से तैयार किए गए हैं और हेल्थ के लिहाज से अनहेल्दी हैं। इसलिए सीजन के मुताबिक ही फल और सब्जियां खरीदें।

रूल 2
लोकल फल और सब्जियां ही खरीदें। सुपरमार्केट में रखी पैकेट सब्जियां हेल्दी नहीं होती। ये आधी पकी ले ली जाती हैं और फिर इन्हें आर्टिफिशल तरीके से पकाया जाता है। इन्हें ताजा रखने के लिए केमिकल के साथ रखा जाता है, जिससे इनके तत्व खत्म हो जाते हैं। इसलिए सब्जियां हमेशा सब्जी वाले से ताजा ही खरीदें।

रूल 3
नेचर के साथ चलें। वही खाएं, जो आपके रहने की जगह में ज्यादा पाया जाता है। उदाहरण के तौर पर ठंडी जगहों पर रहने वाले एस्कीमोज बहुत सारा फैट खाते हैं, क्योंकि यह उनको सूट करता है। लेकिन अगर हम इतना फैट खाएं, तो यह जानलेवा हो सकता है। भारत में फल, सब्जियां, मसाले और सब्जियां बहुत मिलती हैं, इसलिए हमें इन्हें ही ज्यादा खाना चाहिए।

रूल 4
दिन का पहला आहार नाश्ता पौष्टिक व स्वादिष्ट होगा, तो आप दिनभर एनर्जी से भरपूर रहेंगे। इसके लिए आपको बहुत ज्यादा मेहनत करने की जरूरत नहीं। बस फ्रिज से अपनी पसंद के फूटस चुनें। आजकल के मौसम में पाइनेपल, मैंगो, केला, बेरीज और सेब अच्छे फल हैं। इन्हें अच्छी तरह धोकर एक प्लेट में छोटे-छोटे टुकड़े कर लें और ठंडा करने के लिए फ्रीज में रख दें।

नाश्ते के समय सलाद को फ्रीज से निकालें और उसमें पुदीना और नारियल डालकर ऊपर से फ्रेश दही डाल दें। ठंडा- ठंडा सलाद तैयार। खरबूजा, संतरे, तरबूज का सलाद भी गर्मियों के दिन में मजेदार सलाद हो सकता है। इस मौसम में अपने फ्रीज में खूब मात्रा में खीरा, टमाटर, बंद गोभी और नीबू रखें। इससे आप जब चाहें इस पोषक युक्त आहार का आनंद उठा सकती हैं।

एक कटोरा दलिया या ओटमील में ब्राउन शुगर, कसा खजूर, किशमिश, बादाम और ब्राउन शुगर मिलाएं। यह नाश्ता आपको दिनभर एनर्जी से भरपूर रखेगा और लंच टाइम तक भूख नहीं लगने देगा।

रूल 5
ज्यादा तेल इस्तेमाल न करें। अपने वेज या नॉनवेज खाने पर पहले तेल लगा लें और फिर पैन में पकाएं। इससे बिल्कुल भी एक्स्ट्रा तेल नहीं लगता है। तेल, घी या मक्खन को कम या ज्यादा गर्म न होने दें, यह हानिकारक होता है।

रूल 6
प्योर सामग्री का इस्तेमाल करें। जैसे, धनिया के पूरे बीजों का इस्तेमाल करें, क्योंकि बीजों में सारे तत्व बने रहते हैं। सारे मसालों के बीज रखें और तब ही पीसें, जब जरूरत हो। अगर वह पहले से पीसे हों, तो वह प्रोटीन के साथ-साथ टेस्ट भी खो देते हैं। बाहर से मसालों का पाउडर बिल्कुल न खरीदें। इनमें कलर व मात्रा बढ़ाने के लिए कुछ मिला दिया जाता है।

रूल 7
सही सब्जी, फिश, मीट कुछ भी खाएं। इसे बनाने की सामग्री लें और बनने में पूरा समय दें। इससे खाना टेस्टी बनेगा और आप खाने का पूरी तरह एंजॉय भी कर पाएंगे।

नमक खाते ही उतर जाएगा बुखार

गर्मियों में अधिकाशं लोगों को किसी न किसी कारण से बुखार की शिकायत हो ही जाती है। कभी वायरल फीवर के नाम पर तो कभी मलेरिया जैसे नामों से यह सभी को अपनी चपेट में ले लेता है। फिर बड़ा आदमी हो या कोई बच्चा इस बीमारी की चपेट में आकर कई परेशानियों से घिर जाते हैं। कई बुखार तो ऐसे हैं जो बहुत दिनों तक आदमी को अपनी चपेट में रखकर उसे पूरी तरह से कमजोर बना देता है। पर घबराइए नहीं सभी तरह के बुखार की एक अचूक दवा है भुना नमक। इसके प्रयोग किसी भी तरह के बुखार को उतार देता है।

भुना नमक बनाने की विधि- खाने मे इस्तेमाल आने वाला सादा नमक लेकर उसे तवे पर डालकर धीमी आंच पर सेकें। जब इसका कलर कॉफी जैसा काला भूरा हो जाए तो उतार कर ठण्डा करें। ठण्डा हो जाने पर एक शीशी में भरकर रखें।जब आपको ये महसूस होने लगे की आपको बुखार आ सकता है तो बुखार आने से पहले एक चाय का चम्मच एक गिलास गर्म पानी में मिलाकर ले लें। जब आपका बुखार उतर जाए तो एक चम्मच नमक एक बार फिर से लें। ऐसा करने से आपको बुखार कभी पलट कर नहीं आएगा।

विशेष-हाई ब्लडप्रेशर के रोगियों को यह वि धि नहीं अपनानी चाहिए।

- यह प्रयोग एक दम खाली पेट करना चाहिए इसके बाद कुछ खाना नहीं चाहिए और ध्यान रखें कि इस दौरान रोगी को ठण्ड न लगे।

- अगर रोगी को प्यास ज्यादा लगे तो उसे पानी को गर्म कर उसे ठण्डा करके दें।

- इस नुस्खे को अजमाने के बाद रोगी को करीब 48 घंटे तक कुछ खाने को न दें। और उसके बाद उसे दूध, चाय या हल्का दलिया बनाकर खिलाऐं।

क्या आप अपने जोड़ो के दर्द से परेशान हैं...?

यदि किसी व्यक्ति को गठिया, साइटिका या रीढ़ की हड्डी या अन्य हड्डी से जुड़ी कोई परेशानी है तो उसके लिए गृद्धासन काफी कारगर उपाय हैं। इसके नियमित अभ्यास से काफी फायदा होता है।

गृद्धासन की विधि

- समतल स्थान पर कंबल आदि बिछाकर जमीन पर सीधा खड़े हो जाएं।

- फिर दाएं पैर को घुटनें से मोड़कर बाएं पैर में रस्सी की तरह लपेटकर खड़े हो जाएं तथा पूरे शरीर का भार एक पैर पर डालें।

- इस तरह दोनों हाथों को भी आपस में इस तरह से लपेटे की अंगूलियां गिद्ध की चोंच की तरह बन जाएं।

- हाथों को मुंह के सामने रखें।

- आसन की इस स्थिति में कुछ देर तक रहें और सामान्य स्थिति में आकर इस क्रिया को दूसरे पैरों से भी करें।

- इसमें घुटनों को हमेशा मुड़े हुए रखें। इस आसन का अभ्यास शुरु में कठिन होता है।

- इस आसन को शुरु में करते समय किसी दूसरे की सहायता ले सकते हैं। बाद में बिना किसी की सहायता से ही करें। इस आसन में शरीर का पूर्ण भार एक पैर पर ही टिका होता है। इसमें शरीर का संतुलन बनाना आवश्यक है।

आसन से रोगों में लाभ

इससे पिण्डलियों की मांसपेशियां विकसित व सख्त बनती है। इस से पैरों व हाथों की हड्डियां मजबूत होती है तथा रीढ़ की हड्डी भी मजबूत होती है। यह हाथ-पैरों को विकसित एवं पुष्ट करता है। यह गठिया तथा पुरानी वातरोग, साइटिका पेन को ठीक करता हैं।

सावधानी

यदि आह्यपको किसी तरह की बीमारी है तो किसी योग प्रशिक्षक से परामर्श अवश्य करें।

ये पांच खाने ऐसे हैं जिसमें है सबसे ज्यादा ताकत!

एजेंसी। जीने के लिए खाना जरुरी है लेकिन कई बार खाने में बरती गई लापरवाही जिंदगी के लिए खतरा बन जाती है। हालांकि इंसान ने खाने की इतनी किस्में ईजाद की हैं कि ये बताना बहुत मुश्किल है कि कौन सी किस्म सर्वश्रेष्ठ है, लेकिन हम आपको बताने जा रहे हैं खाने की ऐसी पांच चीजों के बारे में जिनमें सेहत बख्शने की असीम संभावना है....
१. पालक : साग की इस वेराइटी को विटामिन का पावर हाउस कहा जाता है। इसमें ए, सी, ई, के, बी-6 जैसे विटामिन एक साथ पाए जाते हैं। पालक में स्कीन और ब्रेस्ट कैंसर से लड़ने की सबसे ज्यादा ताकत होती है। मजे की बात है कि इसमें कोलेस्ट्राल बिल्कुल नही होता।
२. गाजर : रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ाने में गाजर का कोई मुकाबला नही है। एक कप कतरे हुए गाजर में 52 कैलोरी होती है इसके बावजूद इसमें कोलेस्ट्राल बिल्कुल नही होता। बच्चों के विकास में ये सबसे ज्यादा मददगार होता है। फेफड़े, स्कीन और मुंह के कैंसर से बचाने के लिए इसे रामबाण माना जाता है।
३. केल या गोभी : शरीर में बनने वाले विषैलें पदाथरें को रोकने में इस गोभी की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। सब्जियों की किसी भी किस्म की तुलना में इसमें पौष्टिकता सबसे अधिक होती है।
४. ब्राकली यानि हरी फूलगोभी : कैंसर और जन्म के साथ होने वाली बीमारियों से लड़ने में ये गोभी बेहद कारगर होती है। ये न सिर्फ हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है बल्कि, हड्डियों को मजबूत करने की इसमें गजब की क्षमता होती है।
५. अमरुद : अमरुद को दिन का हीरा कहते हैं क्योंकि दिल की बीमारियों को दूर रखने और कब्ज जैसी सामान्य समस्या को खत्म करने में इसका कोई जोड़ नही है। शुगर यानि मधुमेह की रोकथाम के लिए भी इस फल को औषधि की तरह इस्तेमाल किया जाता है।

Monday, March 28, 2011

हर रोज खाएं 7 अखरोट

अगर आप अपने शरीर में ऑक्‍सीडेंट्स को कम करना चाहते हैं तो हर रोज 7 अखरोट खाएं।

पेंसिलवेनिया के स्क्रैन्टॉन विश्वविद्यालय के शोधकर्ता विनसन का कहना है कि अखरोट में मूंगफली, बादाम, पिस्ता और अन्य मेवा से ज्यादा एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं।

इसलिए स्वास्थ्य लाभ के लिए हर रोज करीब सात अखरोट खाने चाहिए। अखरोट में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स विटामिन ई जितने गुणकारी होते हैं।

एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर में मौजूद प्राकृतिक रसायनों को नष्ट होने से रोककर कैंसर, मधुमेह और दिल की बीमारी से रोकथाम करता है। साथ ही शरीर की त्‍वचा को निखारने का काम भी करता है।

बिना दूध की चाय कम करता है वजन

यदि आप अपना वजन कम करना चाहते हैं तथा इसके लिए चाय के जायके से समझौता करने को तैयार हैं तो चाय में दूध कतई न मिलाएं।

वैज्ञानिकों के मुताबिक चाय में वसा कम करने के कई तत्व होते हैं, लेकिन गाय के दूध में पाया जाने वाला प्रोटीन वसा कम करने की इसकी क्षमता को प्रभावित कर सकता है।

शोधकर्ताओं का मानना है कि ब्रिटेन और भारत में बड़े पैमाने पर चाय के इस्तेमाल के बावजूद इसका सकारात्मक असर लोगों के स्वास्थ्य नहीं होता, क्‍योंकि वहां के लोग चाय में दूध मिलाकर पीते हैं।

वहीं भारत के असम में जोरहाट स्थित टी रिसर्च एसोसिएशन के वैज्ञानिक देवाजीत बोरथाकुर का कहना है कि चाय जब दूध के साथ ली जाती है, तो यह थीफलेविन्स और थिरोबिगिन्स का प्रभाव कम कर देती है। हमें न तो इनका फायदा मिलता है और न ही दूध के प्रोटीन का और कैल्शियम का फायदा मिलता है।

उधर, जापान के वैज्ञानिक हिरोआकी याजिमा का कहना है कि काली चाय मोटापा कम करने में कारगर हो सकती है।

कैसे बचें गर्मियों में डिहाइड्रेशन से

गर्मियां शुरू होते ही शरीर में पानी की कमी आने लगती है। इस मौसम में हमारे शरीर को ज्यादा पानी की आवश्यकता होती है। समय पर पानी न पीने और प्यास लगने पर भी काम की व्यस्तता के कारण ध्यान न दे पाने से बॉडी में डिहाइड्रेशन बडऩे लगता है। और शरीर में पानी की कमी के कारण कई समस्याऐं पैदा होने लगती है। अगर आपको कभी इस समस्या से ग्रसित होना पड़े तो नीचे दिए जा रहे नुस्खों को अपनाऐं आपको निश्चित ही जल्द फायदा होगा।

डिहाइड्रेशन के लक्षण- जबान का सूखना, सांस का असामान्य होना, चिढ़चिढापन, उल्टी आना, सामान्य से कम पेशाब होना।

बचने के उपाय
- अगर आपको डिहाइड्रेशन की प्रॉब्लत हो रही हो तो तुरंत पानी में थोडा सा नमक और शक्कर मिलाकर घोल बनाऐं और पी लें।

- कच्चे दूध की लस्सी बनाकर पीने से भी डिहाइड्रेशन में लाभ होता है।

- छाछ तें नमक डालकर पीने से भी आपको इस समस्या से राहत मिलेगी।

- डिहाइडे्रश होने पर नारियल का पानी पिऐं।

Sunday, March 27, 2011

सिर्फ दो मिनट में ही उतर जाएगा बिच्छू का जहर

गर्मियों के आते ही जहरीले कीड़े मकोड़े जमीन के अन्दर से निकल कर बाहर घूमने लगते हैं। उन्हें जहां भी अपने लिए सही वातावरण मिलता है वे वहीं पर अपना ठिकाना बना लेते है। कई जहरीले कीड़े ऐसे होते है जो अगर किसी को काट लें तो उनका जहर उतारना बड़ा ही मुश्किल होता है।

उन्हीं में से एक है बिच्छु, बिच्छु का जहर बहुत खतरनाक होता है।उसके काटने के बाद पूरे शरीर में जलन होने लगती है और उसका शिकार बुरी तरह से तड़पने लगता है। कुछ छोटे लेकिन बड़े काम के नुस्खे हैं जो आपको बिच्छु के जहर से बचा सकते हैं।

- एक पत्थर को अच्छे से साफ कर उस उस पर फिटकरी को अच्छे से घिसें। जहां पर बिच्छु ने काटा है उस जगह पर इस लेप को लगाऐं और आग से थोड़ा सेकें । कैसे भी बिच्छु का जहर हो इस विधि से जहर दो मिनिट में उतर जाएगा।

- बारीक पिसा सेंधा नमक और प्याज को मिलाकर बिच्छु के काटे हुए स्थान पर लगाने से जहर उतर जाता है।

- माचिस की पांच सात तीलियों का मसाला पानीमें घिसकर बिच्छु के डंक लगी जगह पर लगाऐं। इसे लगाते ही बिच्छु का जहर तुरंत उतर जाता है।

विशेष
- जब किसी को बिच्छु काट ले तो तुरंत उस जगह को करी चार उंगल ऊपर से किसी कपड़े से या रस्सी से बांध देना चाहिए। ताकि उसका जहर जल्दी न फैले। इसके बाद किसी साफ सेफ्टी पिन या चिमटी को गर्म करके त्वचा में घुसे ड़ंक को निकाल देन चाहिए।

अगर बचना है कब्ज से तो कभी न खाएं ये 'चीज'

एजेंसी। कब्ज बेहद आम समस्या है लेकिन इसकी अनदेखी गंभीर समस्या पैदा कर सकती है। सामान्यतया कुछ ऐसे कारण हैं जो इसे बढ़ाने के लिए जिम्मेदार माने जाते हैं।

जैसे कि - एक्सरसाइज न करना, तनाव, अनियमित दिनचर्या और दवाओं का अधिक सेवन। इन सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण माना जाता है गलत खाने का चुनाव और पर्याप्त मात्रा में पानी न पीना। यहां हम आपको कुछ ऐसे खाने के बारे में बता रहे हैं जिन्हे कब्ज बढ़ाने वाला माना जाता है।

१. रेड मीट यानि सुअर या गोमांस : माना जाता है कि मांस न सिर्फ खाने में स्वादिष्ट होता है बल्कि, इसमें प्रोटीन की भी प्रचुर मात्रा होती है। लेकिन आपको जानकर दु:ख होगा कि पके हुए मीट में प्रोटीन की मात्रा शून्य हो जाती है। पके हुए मांस को पचाने में शरीर को नब्बे घंटे से भी ज्यादा का वक्त लगता है।
२. शुगर प्रोडक्ट्स : केक, चॉकलेट, पेस्ट्रीज जैसे शुगर प्रोडक्ट्स में फाइबर की मात्रा भले ही कम होती है लेकिन इसमें फैट और सुगर की मात्रा बेहद अधिक होती है। इस तरह के खाने से कब्ज की शिकायत बढ़ने की संभावना बढ़ जाती है।
३. डेयरी प्रोडक्ट्स : अमेरिकन क्रॉनिकल के मुताबिक दूध,मक्खन, पनीर और आइसक्रीम जैसे उत्पादों में फाइबर की मात्रा बेहद कम लेकिन फैट अधिक होता है। इन उत्पादों का सेवन न सिर्फ कब्ज बल्कि दिल से संबंधित बीमारियांे का खतरा बढ़ाता है।
४. प्रोसेस्ड फूड : पिज्जा, बर्गर, पास्ता, चिप्स और कोल्ड ड्रिंक जैसी खाने की चीजों का सेवन सीधे कब्ज की समस्या को बढ़ाने वाला है।
५. कैफीन : चाय, कॉफी का सेवन भी इस समस्या के लिए गंभीर साबित हो सकता है। अधिक मात्रा में चाय के सेवन से अनिद्रा, डिप्रेशन जैसी बीमारियों के बढ़ने का रिस्क होता है।

Friday, March 25, 2011

त्‍वचा को दें प्राकृतिक खूबसूरती

बदलते मौसम का सबसे ज्‍यादा असर त्‍वचा पर पड़ता है। क्‍योंकि त्‍वचा सबसे पहले धूप के संपर्क में आती है। इसलिए इस मौसम में त्वचा की ख़ूबसूरती को बनाए रखने के लिए करें कुछ प्राकृतिक उपाय

तैलीय त्वचा के लिए

कच्चे अंडे की सफेदी का चेहरे पर लेप लगाने से वह सारे रोम खोल देता है। यह प्राकृतिक उपाय धूल और गंदगी से हमारी त्वचा को बचाए रखता है। अंडे के पीले भाग को भी चेहरे पर लगाया जा सकता है। इसे लगाने के बाद अगले बीस मिनट के लिए छोड़ दें, फिर धीरे-धीरे पानी से चेहरे को साफ करें। ऐसा करने से ताजगी आएगी और त्वचा में कसाव पैदा होगा।

सूखी त्वचा के लिए

सूखी त्वचा के लिए जौ का आटा काफी कारगर होता है। जौ का आटा, अंडे का पीला भाग और शहद को मिला कर चेहरे पर लगाना फायदेमंद होता है। यह त्वचा को प्रदूषण से बचाता है। इस मिश्रण को लगाने के 15 मिनट बाद पानी से धो लें। ऐसा करने से कोमलता के साथ चेहरे की ताजगी में निखार आता है।

सामान्य त्वचा के लिए

बनाना मास्क सामान्य त्वचा वालों के लिए सबसे अच्छा विकल्प हो सकता है। ताजी मलाई को केले के साथ मिलाकर चेहरे पर 30 मिनट तक लगाएं। विशेषज्ञ मानते हैं कि चेहरे की नमी लौटाने और पोषण देने के लिए यह पैक काफी कारगर है।


ऐसे दूर करें अपनी झुर्रियों को

भागदौड़ वाली इस जिदंगी में महिलाऐं अपने आप को ज्यादा समय नहीं दे पाती है। कभी परिवार की टेंशन तो कभी काम की इन दोनो में वो इस तरह उलझ जाती है कि अपने स्वास्थ्य और अपनी त्वचा की देखरेख नहीं कर पाती और नतीजा कि उनके चेहरे पर झुर्रियां पडऩे लगती हैं।लेकिन कुछ घरेलू उपायों को अपनाकर आप अपनी उम्र को बचा सकती हैं।

1. दूध की ठण्डी मलाई में नींबू की के रस की चार पांच बूंदें मिलाकर झुर्रियों पर सोते समय अच्छी से मसाज करें।

2. जैतून के तेल से चेहरे पर मालिश करने से झुर्रियां दूर हो जाती हैं।

3. पके हुए पपीते को मसल कर चेहरे पर घिसें कुछ दिन ऐसा लगातार करने से चेहरे के दाग धब्बे-झाईंयां आदि सभी ठीक हो जाते हैं।

विशेष- जिस तरफ झुर्रियां पड़ी हों मसाज हमेशा उसकी विपरीत दिशा में करनी चाहिए। झुर्रियों से बचने के लिए कुछ दिनों तक रोजाना गाजर का रस पीऐं।

याद्दाश्त करना है तेज तो रोज खाएं सात बादाम

आजकल अच्छा खान पान न होने की वजह से याददाश्त का कमजोर होना एक आम समस्या बन गई है।हर आदमी अपनी भूलने की आदत से परेशान है लेकिन अब आपको परेशान हो की आवश्यकता नहीं है क्योंकि आयुर्वेद में इस बीमारी को दूर करने के सरलतम उपाय बताए हैं।

1. सात दाने बादाम के रात को भिगोकर सुबह छिलका उतार कर बारीक पीस लें । इस पेस्ट को करीब 250 ग्राम दूध में डालकर तीन उबाल लगाऐं। इसके बाद इसे नीचे उतार कर एक चम्मच घी और दो चम्मच शक्कर मिलाकर ठंडाकर पीऐं। 15 से 20 दिन तक इस विधि को करने से याददाश्त तेज होती है।

2. भीगे हुए बादाम को काली मिर्च के साथ पीस लें या ऐसे ही खूब चबाचबाकर खाऐं और ऊपर से गुनगुना दूध पी लें।

3. एक चाय का चम्मच शंखपुष्पी का चूर्ण दूध या मिश्री के साथ रोजाना तीन से चार हफ्ते तक लें ।

विशेष: सिर का दर्द, आंखों की कमजोरी, आंखों से पानी आना, आंखों में दर्द होने जैसे कई रोगों में यह विधि लाभदायक है। आजकल अच्छा खान पान न होने की वजह से याददाश्त का कमजोर होना एक आम समस्या बन गई है।हर आदमी अपनी भूलने की आदत से परेशान है लेकिन अब आपको परेशान हो की आवश्यकता नहीं है क्योंकि आयुर्वेद में इस बीमारी को दूर करने के सरलतम उपाय बताए हैं।


1. सात दाने बादाम के रात को भिगोकर सुबह छिलका उतार कर बारीक पीस लें । इस पेस्ट को करीब 250 ग्राम दूध में डालकर तीन उबाल लगाऐं। इसके बाद इसे नीचे उतार कर एक चम्मच घी और दो चम्मच शक्कर मिलाकर ठंडाकर पीऐं। 15 से 20 दिन तक इस विधि को करने से याददाश्त तेज होती है।

2. भीगे हुए बादाम को काली मिर्च के साथ पीस लें या ऐसे ही खूब चबाचबाकर खाऐं और ऊपर से गुनगुना दूध पी लें।

3. एक चाय का चम्मच शंखपुष्पी का चूर्ण दूध या मिश्री के साथ रोजाना तीन से चार हफ्ते तक लें ।

विशेष: सिर का दर्द, आंखों की कमजोरी, आंखों से पानी आना, आंखों में दर्द होने जैसे कई रोगों में यह विधि लाभदायक

Wednesday, March 23, 2011

स्वप्नदोष से परेशान हैं?

ब्रह्मचर्यासन एक ऐसा आसन है जो खाने के बाद और सोने से पहले किया जाए तो स्वप्नदोष होना जैसी समस्या पर विराम लग जाता है। इस आसन से ब्रह्मचर्य का पालन करने में काफी मदद मिलती है। इसलिए इसे ब्रह्मचर्यासन कहा जाता है।

साधारणतया योगासन भोजन के बाद नहीं किये जाते परंतु कुछ ऐसे आसन हैं जो भोजन के बाद भी किये जाते हैं। उन्हीं आसनों में से एक है ब्रह्मचर्यासन। यह आसन रात्रि-भोजन के बाद सोने से पहले करने से विशेष लाभ होता है।

ब्रह्मचर्यासन के नियमित अभ्यास से ब्रह्मचर्य-पालन में खूब सहायता मिलती है अर्थात् इसके अभ्यास से अखंड ब्रह्मचर्य की सिद्धि होती है। इसलिए योगियों ने इसका नाम ब्रह्मचर्यासन रखा है।

ब्रह्मचर्यासन की विधि

समतल स्थान पर कंबल बिछाकर घुटनों के बल बैठ जायें। तत्पश्चात् दोनों पैरों को अपनी-अपनी दिशा में इस तरह फैला दें कि नितम्ब और गुदा का भाग जमीन से लगा रहे। हाथों को घुटनों पर रख के शांत चित्त से बैठे रहें।

ब्रह्मचर्यासन के लाभ

इस आसन के अभ्यास से वीर्यवाहिनी नाड़ी का प्रवाह शीघ्र ही ऊध्र्वगामी हो जाता है और सिवनी नाड़ी की उष्णता कम हो जाती है, जिससे यह आसन स्वप्नदोषादि बीमारियों को दूर करने में परम लाभकारी सिद्ध हुआ है।

जिन व्यक्तियों को बार-बार स्वप्नदोष होता है, उन्हें सोने से पहले पांच से दस मिनट तक इस आसन का अभ्यास अवश्य करना चाहिए। इससे उपस्थ इन्द्रिय में काफी शक्ति आती है और एकाग्रता में वृद्धि होती है।

Tuesday, March 22, 2011

क्या आप बचना चाहते हैं हाईब्लडप्रेशर से...

आजकल के बढ़ते मानसिक तनाव और भागदौड़ से लोगों में हाईब्लडप्रेशर की शिकायत होना आम हो गया है। थोड़ी सी टेंशन या कई जिम्मेदारियों को पूरा न कर पाने का दबाव इस बीमारी को लगातार बढ़ावा दे रहा है। आयुर्वेद के कुछ घरेलू नुस्खों को अपनाकर आप काफी हद तक इस बीमारी से बच सकते हैं।

-प्याज का रस और शुद्ध शहद बराबर मात्रा में मिलाकर रोज करीब दस ग्राम की मात्रा में लें।

- तरबूज के बीज की गिरि और खसखस दोनों को बराबर मात्रामें मिलाकर पीस लें रोज सुबह-शाम एक चम्मच खाली पेट पानी के साथ लें(यह प्रयोग करीब एक महीने तक नियमित करें )।

- मेथीदाने के चूर्ण को रोज एक चम्मच सुबह खाली पेट लेने से हाई ब्लडप्रेशर से बचा जा सकता है।

-खाना खाने के बाद दो कच्चे लहसुन की कलियां लेकर मुनक्का के साथ चबाऐं एसा करने से हाईब्लडप्रेशर की शिकायत नहीं होती।

क्या आपका पढ़ाई में मन नहीं लगता...?

आज अधिकांश लोगों की समस्या होती है उनका मन कहीं एक जगह नहीं लगता। ऐसा सबसे ज्यादा विद्यार्थियों के साथ होता है कि पढ़ाई में मन नहीं लगता। स्टडी के समय ध्यान कहीं ओर होता है। लगातार पढ़ाई के बाद भी कुछ याद नहीं रहता। इन सब की वजह मन की एकाग्रता की कमी है। एकाग्रता बढ़ाने के लिए योग में कई आसन है। जिनकी मदद से आप अपना ध्यान केंद्रीत रख सकते हैं। ऐसा ही एक आसन है भद्रासन।

भद्रासन की विधि- किसी हवा वाले स्थान पर चटाई बिछाकर घुटनों के बल खड़े हो जाएं। अब अपने दाएं पैर को घुटने से मोड़कर पीछे की ओर ले जाकर हिप्स के नीचे रखें। बाएं पैर को भी घुटने से मोड़कर पीछे की ओर ले जाकर हिप्स के नीचे रखें। घुटनों को आपस में मिलाकर जमीन से सटाकर रखें तथा पंजे को नीचे व एडिय़ों को ऊपर सटाकर रखें। अब अपने पूरे शरीर का भार पंजे व एडिय़ों पर डालकर बैठ जाएं। इसके बाद अपने दाएं हाथ से बाएं पैर के अंगूठे को पकड़ें तथा बाएं हाथ से दाएं पैर का अंगूठा पकड़ लें। अब सांस को अंदर खींच कर सिर को आगे झुकाकर रखें और कंधे को ऊपर खींचते हुए आगे की ओर करें। अब नाक के अगले भाग को देखते हुए भद्रासन का अभ्यास करें। इस सामान्य स्थिति में जब तक रहना सम्भव हो रहें और सिर को ऊपर करके सांस बाहर छोड़ें। पुन: सांस को अंदर खींचकर भद्रासन का अभ्यास करें।

लाभ- इस आसन में सिर के मध्य ध्यान लगाया जाता है, जिससे मन को स्थिर रखने में व मानसिक तनाव समाप्त होता है। मन की एकाग्रता के लिए यह आसन अधिक लाभकारी है, क्योंकि इसमें नाक के अगले भाग पर दृष्टि जमाने से मन स्थिर होता है। इससे शारीरिक स्वास्थ्य बना रहता है। इस आसन को करने से भूख बढ़ती है। फेफड़ों के लिए भी यह आसन लाभकारी होता है।

Monday, March 21, 2011

बचना चाहते हैं बायपास सर्जरी से तो पीएं लौकी का रस

क्षमता से ज्यादा काम और मानसिक तनाव के कारण आजकल दिल से सम्बन्धित रोग बढ़ते जा रहे हैं। हर दिन कोई भी एक नया व्यक्ति दिल के रोग से पीडि़त मिल ही जाता है। किसी-किसी को तो ये रोग इतने ज्यादा हद तक होजाते हैं कि उनका इलाज केवल एन्ज्योग्राफी या बायपास सर्जरी ही होता है। अगर आप इन रोगों से बचना चाहते हैं तो लौकी का रस आपकी बहुत मदद कर सकता है। अगर आपको दिल से सम्बन्धी कोई भी बीमारी हो तो लौकी का रस जरूर पिएं।

लौकी का ज्यूस बनाने की विधि- सबसे पहले लौकी को धो ले फिर उसे कद्दूकस कर लें। कद्दूकस की हुई लौकी में सात तुलसी के पत्ते और पांच पुदीने की पत्तियां डाल कर उसे मिक्सर में पीस लें। रस की मात्रा कम से कम 150 ग्राम होनी चाहिए। अब इस रस में बराबर मात्रा में पानी मिलाकर तीन चार पिसी काली मिर्च और थोड़ा सा सेंधा नमक मिलाकर पिऐं।

रस को पीने की विधि- यह रस किसी भी दिल के मरीज को दिन में तीन बार सुबह, दोपहर और शाम को खाने के बाद पिलाना चाहिए। शुरूआत के दिनों में रस कुछ कम मात्रा में लें और जैसे ही वह अच्छे से पचने लगे इसकी मात्रा बढ़ा दें।

विशेष- लौकी का रस पेट के विकारों को मल के द्वारा बाहर निकाल देता है। जिसके कारण शुरूआत में पेट में गडग़ड़ाहट और खलबली मच सकती है इससे घबराएं नहीं कुछ समय बाद यह अपने आप ठीक हो जाएगा। इस रस को पीने के साथ मरीज का अपनी पहले से चल रही दवाईयों को भी चालू रखना चाहिए पहले से चल रही दवाईयों को एकदम न छोड़ें।

दाग-धब्बों का हर्बल उपचार

दाग धब्बों की समस्या किशोर उम्र की सबसे आम परेशानी है। इनसे छुटकारा पाने के कुछ आसान हर्बल उपचार हैं : लेकिन सर्वोत्तम तरीका यूनानी चिकित्सा पद्धति के अनुसार सुझाया गया हर्बल उपचार ही है।

आप अपनी त्वचा को कैसे कील-मुँहासों और दाग-धब्बों से दूर रख सकते हैं, इसके आसान से उपाय यहाँ बताए जा रहे हैं। 25 मिली ग्लिसरीन और 25 मिली शुद्ध गुलाब जल में 5 ग्राम सल्फर पावडर मिलाए। इस लेप को रात में चेहरे के दाग-धब्बे, मुँहासे पर लगाकर छोड़ दें। सबेरे पानी से चेहरा धोएँ। इस लेप से एक हफ्ते में आप एक्ने की प्रॉब्लम से निजात पा सकते हैं। बेहतरीन रिजल्ट पाने के लिए सप्ताह में 3 बार इसे लगाएँ।

संतरे के 20 ग्राम सूखे छिल्के, 5 ग्राम सूखे नीम के पत्ते लें और इन्हें पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण में 5 ग्राम चूर्ण, चंदन चूर्ण और आटा मिलाएँ। इस मिश्रण में 5 मिली बादाम तेल और इतनी ही मात्रा में तिल का तेल मिलाएँ। अब इस उबटन को रातभर चेहरे पर लगाए रखें और सबेरे पानी से धो दें। इस उबटन को हफ्ते में 3-4 बार लगाएँ।

गुलाब पत्तियों, सेना, नीम, तुलसी और कासनी की 3 ग्राम (प्रत्येक) पत्तियों को उबालें। इस मिश्रण को छानकर इसमें चीनी मिलाएँ। इस मिश्रण को छानकर इसमें चीनी मिलाएँ। इस मिश्रण को हर रात सोने से पहले पिएँ और आपको 15 दिनों में ही फर्क दिखाई देने लगेगा।

असरकारी उपाय, अवश्य आजमाएँ

* यदि जामुन ज्यादा खा लिया हो व इससे जी मिचला रहा हो तो आम की एक फाँक खा लेने से तत्काल राहत महसूस होने लगती है।

* मूली ज्यादा खा ली हो तो चौथाई चम्मच अजवायन फाँक लें या मूली का ऊपरी मुलायम पत्ता खा लेने से गैस या अपच नहीं होती।

* मूली के तीन-चार पत्ते से खाने से हिचकी दूर होती है।

* केले ज्यादा खा लिए हों तो एक इलायची चबा लें, केला हजम हो जाएगा।

* बदन में थकावट का दर्द होने पर सरसों के तेल में नमक मिलाकर गुनगुना कर लें व पूरे बदन पर मालिश करके गर्म पानी से नहा लें। इससे राहत मिलेगी।

* जी मिचला रहा हो और उल्टी हो रही हो तो 4-5 लौंग, एक चम्मच चीनी में बारीक पीसकर चुटकी-चुटकी भर जीभ पर रखकर चाटने से आराम मिलता है।

* मूँग की दाल रात को भिगोकर सुबह उसमें 2 लौंग डालकर बनाया जाए तो ज्यादा पाचक होती है व गैस भी नहीं बनती।

* मेथी को अजवायन के संग बराबर मात्रा में लेकर पीस लें व खाने के बाद गुनगुने पानी के साथ फाँक लें। गैस-अपच नहीं होगी और कब्ज भी नहीं रहेगा।

* साबुत काली मिर्च व मिश्री चबाने से गले की खराश तत्काल दूर हो जाती है।

* खुश्की के कारण फट रहे पाँव व फटी बिवाइयों में सरसों का तेल व मोम पिघलाकर सूखी मेहँदी बुरक दें व गुनगुना ही बिवाइयों में भरें, दो-तीन बार के प्रयोग में ही लाभ होगा।

डायबिटीज के लिए घरेलू नुस्खे

आँवला ज्यूस 10 मिली. की मात्रा में दो ग्राम हल्दी पावडर मिला कर दिन में दो बार लें। यह रक्त में शकर की मात्रा को नियंत्रित करता है।

औसत आकार का एक टमाटर, एक खीरा और एक करेला, इन तीनों का ज्यूस निकाल कर रोज खाली पेट सेवन करें।

सौंफ के सेवन से भी डायबिटीज पर नियंत्रण संभव है।

काले जामुन डायबिटीज के मरीजों के लिए अचूक औषधि मानी जाती है।


शतावर रस और दूध समान मात्रा में लेने से डायबिटीज में लाभ होता है।

नियमित रूप से दो चम्मच नीम का रस और चार चम्‍मच केले के पत्ते का रस लेना चाहिए। चार चम्मच आँवले का रस, गुडमार की पत्ती का काढ़ा भी मधुमेह नियंत्रण के लिए रामबाण है।

गेहूँ के पौधों में रोगनाशक गुण होते हैं। गेहूँ के छोटे-छोटे पौधों का रस असाध्य बीमारियों को भी जड़ से मिटा डालता है। इसका रस मनुष्य के रक्त से चालीस फीसदी मेल खाता है। इसे ग्रीन ब्लड भी कहते हैं। रोगी को प्रतिदिन सुबह और शाम में आधा कप जवारे का ताजा रस दिया जाना चाहिए।

लहराती जुल्फों के घरेलू शैंपू

1. बेसन का बना शैम्पू : बेसन को पानी में घोलकर इस घोल को सिर के बालों में लगाएँ। एक घन्टे बाद पानी से बालों को धो डालें। एक हफ्ते में दो बार इस क्रिया को करने से बाल घने, काले और मुलायम तो होते ही हैं साथ ही बालों की गंदगी दूर होती है जिससे बाल मुलायम और चमकदार बनते हैं। इस क्रिया से सिर की खाज और फुन्सियाँ भी ठीक होती हैं।

2. मुल्तानी मिट्टी का बना शैम्पू : 100 ग्राम मुल्तानी मिट्टी को एक कटोरे पानी में भिगो दें। दो घन्टे बाद जब मुल्तानी मिट्टी पूरी तरह घुल जाए तो इस घोल को सूखे बालों में लगा कर हल्के हाथ से बालों को रगड़े। पाँच मिनट तक ऐसा ही करें। अगर सर्दियाँ हैं तो गुनगुने पानी में और अगर गर्मियाँ हैं तो ठन्डे पानी से सिर को धो लें। अगर बालों मे ज्यादा गंदगी मौजूद है, तो इस क्रिया को दोबारा फिर करें।

हफ्ते में दो बार इस क्रिया को करने से बालों में बहुत ज्यादा निखार आ जाता है। बाल लम्बे, रेशमी और मुलायम हो जाते हैं। इस क्रिया को करने के बाद सिर में हल्केपन के साथ शीतलता का अहसास होता है। ऐसी शीतलता किसी भी शैम्पू में नहीं मिल सकती है।

जायफल : सुगंधित औषधि

उपयोग : शोथ हर, वेदना नाशक, वातशामक और कृमिनाशक होने से स्नायविक संस्थान के लिए उपयोगी होता है तथा रोचक, दीपक, पाचक, यकृत को सक्रिय करने वाला और ग्राही होने से पाचन संस्थान के लिए उपयोगी होता है। अनिद्रा, शूल, अग्निमांद्य, कास (खाँसी), श्वास, हिचकी, शीघ्रपतन और नपुंसकता आदि व्याधियाँ दूर करने में उपयोगी होता है। इसके चूर्ण और तेल को उपयोग में लिया जाता है।

त्वचा की झाइयाँ : पत्थर पर पानी के साथ जायफल को घिसें और लेप तैयार कर लें। इस लेप को नेत्रों की पलकों पर और नेत्रों के चारों तरफ लगाने से नेत्र ज्योति बढ़ती है, चेहरे की त्वचा की झाइयाँ और धब्बे आदि दूर होते हैं। लगातार कुछ दिनों तक लेप लगाना चाहिए।

दूध पाचन : शिशु का दूध छुड़ाकर ऊपर का दूध पिलाने पर यदि दूध पचता न हो तो दूध में आधा पानी मिलाकर, इसमें एक जायफल डालकर उबालें। इस दूध को थोडा ठण्डा करके कुनकुना गर्म, चम्मच कटोरी से शिशु को पिलाएँ, यह दूध शिशु को हजम हो जाएगा।

जोड़ों का दर्द : शरीर के जोड़ों में दर्द होना गठिया यानी सन्धिवात रोग का लक्षण होता है। गठिया के अलावा चोट, मोच और पुरानी सूजन के लिए जायफल और सरसों के तेल के मिलाकर मालिश करने से आराम होता है। इसकी मालिश से शरीर में गर्मी आती है, चुस्ती फुर्ती आती है और पसीने के रूप में विकार निकल जाता है।

उदर शूल : पेट में दर्द हो, आद्यमान हो तो जायफल के तेल की 2-3 बूँद शकर में या बताशे में टपकाकर खाने से फौरन आराम होता है। इसी तरह दाँत में दर्द होने पर जायफल के तेल में रूई का फाहा डुबोकर इसे दाँत-दाढ़ के कोचर में रखने से कीड़े मर जाते हैं और दर्द दूर हो जाता है। इस तेल में वेदना स्थापना करने का गुण होता है, इसलिए यह तेल उस अंग को थोड़े समय के लिए संज्ञाशून्य कर देता है और दर्द का अनुभव होना बन्द हो जाता है।

हल्दी के अनोखे नुस्खे

पेट में कीड़े होने पर 1 चम्मच हल्दी पाउडर रोज सुबह खाली पेट एक सप्ताह तक ताजा पानी के साथ लेने से कीड़े खत्म हो सकते हैं। चाहें तो इस मिश्रण में थोड़ा नमक भी मिला सकते हैं। इससे भी फायदा होगा।

चेहरे के दाग-धब्बे और झाइयाँ हटाने के लिए हल्दी और काले तिल को बराबर मात्रा में पीसकर पेस्ट बनाकर चेहरे पर लगाएँ। हल्दी-दूध का पेस्ट लगाने से त्वचा का रंग निखरता है और आपका चेहरा खिला-खिला लगता है।

खाँसी होने पर हल्दी की छोटी गाँठ मुँह में रख कर चूसें। इससे खाँसी नहीं उठती।

त्वचा से अनचाहे बाल हटाने के लिए हल्दी पाउडर को गुनगुने नारियल तेल में मिलाकर पेस्ट बना लें। अब इस पेस्ट को हाथ-पैरों पर लगाएँ। इसे त्वचा मुलायम रहती है और शरीर के अनचाहे बाल भी धीरे-धीरे हट जाते हैं।

सनबर्न की वजह से त्वचा झुलसने या काली पड़ने पर हल्दी पाउडर, बादाम चूर्ण और दही मिलाकर प्रभावित स्थान पर लगाएँ। इससे त्वचा का रंग निखर जाता है और सनबर्न की वजह से काली पड़ी त्वचा भी ठीक हो जाती है। यह एक तरह से सनस्क्रीन लोशन की तरह काम करता है।

मुँह में छाले होने पर गुनगुने पानी में हल्दी पाउडर मिलाकर कुल्ला करें या हलका गर्म हल्दी पाउडर छालों पर लगाएँ। इससे मुँह के छाले ठीक हो जाते हैं।

शहद के मधुर नुस्खे

शहद जल्दी पचकर खून में मिल जाता है। इसे हम दूध, दही, चाय, मलाई, पानी, सब्जी, फलों के रस आदि में मिलाकर ले सकते हैं। यही नहीं सर्दी में गर्म पेय के साथ व गर्मी में ठंडे पेय के साथ भी इसका सेवन कर सकते हैं। शहद को गर्म कभी नहीं करना चाहिए।

कब्ज : सुबह-शाम दो चम्मच शहद पानी में पीने से लाभ होता है।

कमजोरी : शहद में विटामिन 'ए'और 'बी' के होने से यह आँखों की ज्योति बढ़ाता है व भूख बढ़ाकर कमजोरी दूर करता है।

स्फूर्ति : प्रातः नींबू व शहद गर्म पानी में लेने से स्फूर्ति आती है।

गर्भावस्था : गर्भवती महिला द्वारा दो चम्मच शहद रोजाना लेने से उसे रक्त की कमी नहीं होती।

दाँत आना : बच्चों को मसूडों पर शहद लगाने से दाँत आसानी से आते हैं।

मोटापा : सुबह गुनगुने पानी में शहद मिलाकर सेवन करने से मोटापा कम होता है और मोटापा बढ़ाने के लिए इसे दूध में मिलाकर पिएँ।

नींद : शहद को नींबू के रस में लेने से नींद अच्छी आती है।

गला बैठना : गर्म पानी में एक चम्मच शहद मिलाकर गरारे करने से आवाज खुल जाती है।

त्वचा : तिल्ली का तेल, बेसन, शहद व नींबू मिलाकर उबटन करने से त्वचा निखर जाती है।

उल्टी और हिचकी : दो चम्मच प्याज के रस में दो चम्मच शहद मिलाकर खाने से उल्टी और हिचकी में आराम मिलता है।

पोषण : शहद स्वास्थ्यवर्धक होता है क्योंकि इसमें लोहा, ताँबा, सोडियम, कैल्शियम, आयोडीन आदि तत्व होते हैं।

जानवर काटने पर घरेलू उपचार


अलग-अलग प्रकार के जंतु दंश यानी किसी जानवर के काटने पर अलग-अलग प्राथमिक उपचार होता है। तलैया, भँवरी, बिच्छू काटने की घटनाओं में भयंकर पीड़ा होती है। सबसे पहले प्रयास करके डंक को निकाल देना चाहिए। उसके बाद डंक स्थान से ऊपर के भाग को डोरी अथवा कपड़े से कसकर बाँध देना चाहिए।

आँकड़े के दूध की दो बूँद नाक में डालें। अर्क कपूर या तारपीन का तेल दंश के स्थान पर लगाएँ। उपरोक्त साधन उपलब्ध न होने पर प्याज या तंबाकू पीसकर बाँध दें।

कानखजूरा काटने पर गूलर के पत्ते को पीसकर दंश स्थान पर बाँध दें।

सर्पदंश का पता चलते ही तत्काल दंश स्थान से विसंक्रमित सुई से थोड़ा खून निकाल कर बहने दें। रोगी को सोने न दें, उसका आत्मविश्वास जगाते रहे। दूध में घी मिलाकर पिलाएँ तथा तुरंत चिकित्सालय ले जाएँ।

गर्मियों के शीतल नुस्खे

गर्मी के चिपचिपे दिनों में खुद को तरोताजा रखने के लिए कई प्राकृतिक और घरेलू उपाय किए जा सकते हैं, जैसे-चंदन के पावडर का लेप चेहरे पर करने से एक तो यह शरीर को ठंडक पहुँचाएगा, दूसरे सनबर्न से भी बचाव करेगा।

आयुर्वेद में चंदन और हल्दी को एंटीसेप्टिक और सौंदर्यवर्धन के लिहाज से भी उत्तम माना जाता है। दोनों त्वचा के सौंदर्य में सहायक होते हैं।

गुलाब जल को आइस ट्रे में जमाकर क्यूब्स को आँखों के इर्द-गिर्द घुमाने से आँखें तरोताजा तो होती हैं, उसकी जलन भी कम हो जाती है। इसी तरह खीरे के रस का प्रयोग भी आँखों के लिए किया जा सकता है।

साथ ही झुलसी त्वचा के लिए भी यह कारगर उपाय होगा।एक चुटकी कपूर को शहद में मिलाकर चेहरा धोएँ, चेहरा खिल जाएगा। साथ ही साबुन से चेहरा धोने के बाद गीले चेहरे पर चीनी और नमक लगाकर थोड़ी देर रखें और फिर उसे धो लें। यह चेहरे के लिए अच्छा स्क्रबर होगा।

मीठी शकर के गुणकारी नुस्खे

बादाम को खराब होने से बचाने के लिए कंटेनर में रखने से पहले उसमें तीन-चार चम्मच शक्कर डाल दें, इससे सालों-साल बादाम खराब नहीं होंगे।

यदि आप चाहते हैं कि फूलदान और गमलों का पानी जल्दी ना बदलना पड़ें तो लगभग 10-12 लीटर पानी में एक औंस हाइड्रोजन सल्फेट मिलाकर थोड़ी-सी चीनी डाल दें, इस घोल से फूल 15-20 दिनों तक ताजे बने रह सकते हैं।

सर्दियों में फटे हाथ-पैरों के इलाज के लिए चीनी के शर्बत से उन्हें धोना चाहिए।

कॉक्रोच कई बीमारियों के वाहक है, उनसे बचने के लिए दस ग्राम बोरिक एसिड पाउडर, एक बड़ा चम्मच चीनी, एक बड़ा चम्मच दही और एक बड़ा चम्मच गेहूँ के आटे को मिलाकर गोलियाँ बनाएँ, अब इन गोलियों को अलमारी या फ्रिज में रखें कॉक्रोच नहीं आएँगे।

कैसे बचें आँखों के दर्द से

. तिल के 5 ताजे फूल प्रात:काल अप्रैल माह में निगलें। इससे पूरे वर्ष आँखें नहीं दुखेंगी।

2. चैत्र के महीने में गोरखमुंडी के 5 या 7 ताजे फूल चबाकर पानी के साथ सेवन करने से आँखों की ज्योति बढ़ती है।

3. बचपन में बेलगिरी के बीज की मिंगी शहद में मिलाकर चटाने से जीवनभर आँखें नहीं दुखती।

4. नींबू के रस की एक बूँद महीने में एक बार आँखों में डालने से कभी आँखें नहीं दुखती।

5. रुई के फाहे को ठंडे पानी में भिगोकर शुद्ध घी लगाकर आँखों पर रखने से आँखों के दर्द में लाभ मिलता है।

6. हरी दूब पीसकर उसका रस आँखों के ऊपर लेप करने से आँख का दर्द मिटता है।

गर्मियों का विशेष घरेलू फेसपैक

नीम के पत्ते, नींबू के छिलके, संतरे के छिलके, मौसंबी के छिलके और तुलसी पत्तों को सुखा लें, 8 बादाम, 8-10 रेशा केसर, 1 चम्मच हल्दी पावडर, 5 चम्मच मुलतानी मिटटी, 1 चम्मच चंदन पावडर, 1 चम्मच सफेद चंदन पावडर, यह सभी को मिलाकर मिक्सर में चलाकर फेसपैक का मिश्रण बनाकर एक बॉटल में भर कर रखें।

सूखी त्वचा हो तो फेसपैक में बेबी ऑइल और दूध मिलाकर पेस्ट बनाएँ और 5 मिनट तक गलाकर लगाएँ व दस मिनट बाद धो लें। अगर त्वचा तैलीय हो तो फेसपैक में गुलाब जल मिलाकर पेस्ट बनाएँ और 5 मिनट तक गलाकर लगाएँ व और दस मिनट बाद धो लें। इससे आप के कील,फुंसियाँ और काले दाग, आँखों के काले घेरे भी दूर हो जाएँगे। और आपकी त्वचा गोरी, मुलायम और चमकदार बनकर निखरने लगेगी। यह गर्मियों का विशेष फेसपैक है इससे आप तपते मौसम में भी कूल बने रह सकते हैं।

सौंदर्य प्रसाधन भी हैं फल-सब्जियां

चुकंदर : चुकंदर के रस में थोड़ी सी मात्रा सिरके की मिलाकर यदि बालों के जड़ों में लगाया जाए तो रूसी दूर हो जाएगी।

टमाटर : टमाटर के गूदे को चेहरे व गर्दन पर लगाकर एक घंटे के लिए छोड़ दें तथा फिर गुनगुने पानी से धो लें। ऐसा प्रतिदिन करें, तो इससे रंग गोरा हो जाएगा तथा कील, मुंहासे इत्यादि स्वत: समाप्त हो जाएंगे।

मेथी : मेथी को पीसकर उसकी पेस्ट बनाकर प्रतिदिन सिर में लगाने से बाल लंबे होते हैं, प्राकृतिक रंगत लिए रहते हैं व मुलायम बनते हैं। इस पेस्ट को प्रतिदिन रात में सोने से पहले चेहरे पर लगाने व 30 मिनट उपरांत चेहरा गुनगुने पानी से धोने पर दाग, छाइयां व कील मुंहासे व झुर्रियां समाप्त हो जाते हैं। इससे त्वचा का रंग भी गोरा हो जाता है तथा आप अपनी उम्र से काफी छोटी प्रतीत होती हैं।
पुदीने की पत्तियां : पुदीने की ताजा पत्तियों का रस यदि प्रतिदिन रात्रि में चेहरे पर लगाया जाए तो यह मुंहासों से रक्षा करके त्वचा मुलायम बनाता है।

धनिया : एक चम्मच धनिये के रस में एक चुटकी हल्दी मिला दें व मुंहासों, कीलों व रूखे चेहरे की त्वचा पर लगायें, चेहरा साफ हो जाएगा। इस मिश्रण को सदैव रात्रि में चेहरा धोकर ही लगाना चाहिए।
लहसुन : यदि दिन में कई बार कच्चे लहसुन को मुंहासों पर रगड़ा जाए तो मुंहासे बिना दाग -धब्बे छोड़े समाप्त हो जाते हैं। लहसुन को खाने से रक्त शुद्ध होता है, इससे त्वचा भी अधिक जीवंत व साफ हो जाती है।
खीरा : खीरे को पीसकर चेहरे, गर्दन पर लगाकर करीब 15 मिनट के लिए छोड़ दें, इसके बाद चेहरा धो लें। चेहरे की खूबसूरती में चार चांद लग जाएंगे। इसके नियमित प्रयोग से मुंहासे, कील झुर्रियां व खुश्कता समाप्त होती है।

आलू : कच्चे आलू का रस चहेरे के दाग, धब्बे छुड़ाने में सहायक है। आलू में पोटेशियम सल्फर व फास्फोरस, क्लोरीन काफी मात्रा में होता है जोकि त्वचा को साफ करता है। आलू को पीसकर उसके गूदे को रात्रि में पूरे चेहरे पर मलें व प्रात:काल मुंह धोयें। इससे त्वचा जवान व चमकदार बन उठेगी।

अंगूर : इसके नियमित सेवन से रक्त में वृद्धि होती है। बाल व आंखें चमकदार बनी रहती हैं। यह त्वचा को कांतियुक्त, स्वïस्थ व कोमल बनाए रखता है।

संतरा : संतरा खाने से त्वचा स्वस्थ रहती है। इसके छिलकों को सुखाकर उसके पाउडर से उबटन बनाकर लगाया जाए तो सांवली त्वचा का रंग निखर जाता है।
नींबू : शहद के साथ नींबू का रस मिलाकर लगाने से त्वचा का रंग निखरता है व त्वचा कोमल बनी रहती है। बालों के सौंदर्य में भी उपयोगी है और कई तकलीफ व बीमारियों से बचाव करता है।

सेब : नित्य प्रात: भूखे पेट सेब खाकर ऊपर से दूध पिया जाए तो एक-दो माह में ही त्वचा का रंग निखरेगा, चेहरे पर लाली झलकेगी। सेब का रस मस्सों पर लगाने से मस्सों के छोटे-छोटे टुकड़े होकर जड़ से गिर जाते हैं।

आम : आम का सेवन करने से त्वचा का रंग साफ होता है, रूप में निखार आकर चेहरे की चमक बढ़ती है।

अनार : अनार के छिलकों को सुखाकर बारीक पाउडर बनाकर गुलाब जल के साथ मिलाकर उबटन की तरह लगाने से शरीर के दाग, चेहरे की झाइयां भी नष्ट होती हैं।

Sunday, March 20, 2011

अब न हों परेशान मुहासों से

सही खानपान न होने के कारण और चारों ओर फैले प्रदूषण से अधितर लोग चेहरे पर मुहासों की समस्या से परेशान हैं। काफी कोशिशों के बाद भी उन्हें इस समस्या से छुटकारा नहीं मिलता। लेकिन आयुर्वेद में कुछ ऐसे नुस्खें बताए गए हैं जिनके प्रयोग से आपको मुहासों की इस समस्या से छुटकारा मिल सकता है।

- नीबूं के रस में गुलाबजल मिलाकर चेहरे पर लगाएं। तीस मिनट बाद चेहरा सादा पानी से धो लें।

-गाय के कच्चे दूध में जायफल को घिस लें और पेस्ट तैयार करें, इस पेस्ट को चेहरे पर लगाएं फिर सूखने के बाद उबटन की तरह छुड़ा लें इसके बाद गुनगुने पानी से चेहरा धो लें। इस प्रयोग से 4 से 5दिनों के अन्दर ही मुहासे गायब होने लगेंगे और उनके दाग भी नहीं बनेंगे।

- जैतून के तेल को रोज रात में सोते समय चेहरे पर लगाएं ऐसा करने से मुहासे और चेहरे पर हो रही फुंसियां ठीक हो जाती हैं।

Friday, March 18, 2011

नुस्खाः चुटकी बजाते ही छूटेगा होली का रंग

होली के उल्लास और हुड़दंग में लोग रंग लगा तो लेते हैं परंतु फिर शुरू होती है मशक्कत रंग निकालने की। इसी के चलते कई लोग होली के रंग से डरते हैं। डर की एक वजह यह भी है कि आजकल मार्केट में मिलने वाले रंगों में कई तरह के केमिकल मिले रहते है।

जिससे रंग आसानी से निकलते नहीं हैं और वह हमारी स्किन को खराब कर देते हैं। यूं तो रंग निकालने के लिए सभी कई तरह के नुस्खे अपनाते हैं। लेकिन कुछ नुस्खे ऐसे हैं जो आपकी स्किन को खराब होने से बचाएंगें ।

- होली खेलने से पहले खासतौर पर अपने हाथ-पैर, चेहरे, बालों और शरीर पर अच्छे से नारियल या सरसों का तेल या कोई लोशन लगा लें।

- आंखों में रंग या गुलाल गिरने पर आंखें तुरंत ठंडे पानी से धोएं ध्यान रखें कि आंखों को ज्यादा मसले नहीं। इससे जलन होने लगेगी। गुलाब जल डालें। आराम मिलेगा।

- नहाने के लिए मुल्तानी मिट्टी का प्रयोग कर सकते हैं। त्वचा पर भिगोई हुई मुल्तानी मिट्टी लगाएं और थोड़ी देर सूखने दें। फिर उसे धो लें। इससे रंग छुड़ाने में काफी मदद मिलेगी।

- बेसन, मीठा तेल और मलाई को पानी में मिलाकार पेस्ट बना लें। इसे शरीर पर लगा लें और सुखने के बाद धो लें।

- सबसे पहले कपड़ों और सिर से जितना सूखा रंग झाड़ सकते हैं, निकाल दें। उसके बाद सूखे, मुलायम कपड़े से रंग साफ कर लें। रंग को आहिस्ता से छुड़ाएं ज्यादा जोर से रगडऩे पर त्वचा में जलन होने लगती है और अधिक रगड़ से त्वचा छिल भी जाती है।

- नींबू का रस और दही मिलाकर पेस्ट बनाएं और इसे लगाएं, फिर नहा लें। इससे भी रंग उतर सकता है।

- नारियल के तेल या दही से त्वचा को धीरे-धीरे साफ कर सकते हैं।


- सिर से कलर निकालने के लिए बेसन या दही-आंवले (एक रात पहले भिगोकर रखे आंवले) से भी सिर धो सकते हैं। इसके बाद बालों में शेंपू करें।

- नहाने के बाद त्वचा रुखी हो जाती है ऐसे में चेहरे पर मॉइश्चराइजर और हाथ-पैरों में बॉडी लोशन लगाएं या सबसे अच्छा है घरेलू उबटन का भी उपयोग करें।

बस फिर हो जाइए तैयार जमकर होली खेलने के लिए...होली के रंगों के साथ अपनी खुशियों को दोगुना करने के लिए।


Thursday, March 17, 2011

क्या आपको चश्मा लगा है...?

आजकल काम या पढ़ाई के कारण जरूरत से ज्यादा आंखों पर बोझ पड़ रहा है। पौष्टिक खाने की कमी के कारण भी अधिकाशंत लोगो की आखे कमजोर होती जा रही हैं । अक्सर देखने में आता है कि छोटे-छोटे बच्चों को भी जल्दी ही मोटे नम्बर का चश्मा चढ़ जाता है।अगर आपको भी चश्मा लगा है तो आपका चश्मा उतर सकता है। नीचे बताए नुस्खों को करीब चालीस दिनों तक प्रयोग में लाएं निश्चित ही आपकी आखें पर लगा चश्मा उतर जाएगा साथ थी आखों की रोशनी भी तेज होगी।



1. बादाम की गिरी, सौंफ बड़ी वाली और कूजा मिश्री(कूजा मिश्री न मिले तो साधारण मिश्री भी ले सकते हैं)तीनों को बराबर मात्रा में मिलाकर बारीक पीसकर चूर्ण बना लें। रोज एक चम्मच एक गिलास दूध के साथ रात को सोते समय लें ।


लाभ- इस विधि को अपनाने से दिमाग की गर्मी शांत होती है, याददाश्त तेज होती है साथ ही बातों को भूल जाने की बिमारी भी खत्म हो जाती है।


2. पैर के तलवों में सरसों का तेल मालिश करने से आखों की रोशनी तेज होती है।

3. सुबह उठते ही मुंह में ठण्डा पानी भरकर मुंह फुलाकर आखों में छींटे मारने से आखें की रोशनी बढ़ती है।

4. त्रिफला के पानी से आखें धोने से आखों की रोशनी तेज होती है।

घबराइए नहीं आप भी कम कर सकते हैं अपना तनाव

आज शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जिसे पारिवार, ऑफिस या बिजनेस आदि की परेशानियों से न जूझना पड़ता हो। इस तरह की परेशानियों की वजह से मानसिक तनाव बढ़ता जाता है। मानसिक तनाव के चलते आप अच्छे स्वास्थ्य के बारे में सोच भी नहीं सकते।

स्वस्थ रहने के लिए जरूरी है कि आपका दिमाग शांति और सुकुन महसूस करे। लेकिन आज के दौर में दिमाग को शांति मिलना लगभग असंभव सा ही है। फिर भी कुछ कोशिश करने पर आप कुछ हद तक मानसिक तनाव को दूर कर सकते हैं-

- लगातार लंबे टाइम तक काम न करें । थोड़ी-थोड़ी देर में शरीर और दिमाग को रेस्ट जरूर दें।

- दिन की शुरूआत योग, व्यायाम, ध्यान से आदि से करें।

- मानसिक तनाव की सबसे बड़ी वजह होती है पैसा। पैसे जुड़ी समस्याओं को जल्द से जल्द सुलझा लें।

- अपने जीवन साथी या अविवाहित अपने प्रेमी के साथ कुछ समय प्रतिदिन अवश्य बिताएं।

- अपने काम को समय पर पूरा करें और अपने काम की लिस्ट बनाकर काम करें ।

- एक साथ कई काम करने में न में उलझे।

- रोजाना कम से कम 6-8 घंटे की नींद अवश्य लें।

- खाना-पीना समय पर करें।

32 किशमिश खाने से छू मंतर हो जाएगा ब्लड प्रेशर

अगर आपको अक्सर चक्कर आते हैं, कमजोरी महसूस होती है तो हो सकता है कि आप लो ब्लड प्रेशर के शिकार हों। ज्यादा मानसिक तनाव, कभी क्षमता से ज्यादा शारीरिक काम करने से अक्सर लोगों में लो ब्लडप्रेशर की शिकायत होने लगती है।



कुछ लोग इसे नजर अन्दाज कर देते हैं तो कुछ लोग डॉक्टर के यहां चक्कर लगाकर परेशान हो जातें हैं। लेकिन आयुर्वेद में लो ब्ल्डप्रेशर को कन्ट्रोल करने के लिए कारगर इलाज है वो है किशमिश। नीचे बताई जा रही विधि को लगातार 32 दिनों तक प्रयोग में लाने से आपको कभी भी लो ब्लड प्रेशर की शिकायत नहीं होगी



-32 किशमिश लेकर एक चीनी के बाउल में पानी में डालकर रात भर भिगोएं। सुबह उठकर भूखे पेट एक-एक किशमिश को खूब चबा-चबा कर खाएं(पूरे फायदे के लिए हर किशमिश को बत्तीस बार चबाकर खाएं। इस प्रयोग को नियमित बत्तीस दिन करने से लो ब्लडप्रेशर की शिकायत कभी नहीं होगी।



विशेष-जिसको लो बी पी की शिकायत हो और अक्सर चक्कर आते हों तो आवलें के रस में शहद मिलाकर चाटने से जल्दी आराम होता है।



-लो बी पी के समय व्यक्ति को ज्यादा बोलना नहीं चाहिए। चुपचाप बायीं करवट लेट जाना चाहिए थोड़ी देर में नीदं आ जाएगी और लो बी पी में फायदा होगा।

अब आपके होंठ रहेगें हमेशा गुलाबी

किसी किसी के होंठ मौसम के बदलते रुख को सह नहीं पाते और फट जाते हैं और कभी कभी अपने निशान भी छोड़ देते हैं। बहुत सी महिलाएं अपने होठो को सुन्दर दिखाने के लिए लिपस्टिक का प्रयोग करती हैं। लेकिन लिपस्टिक के लगातार प्रयोग से अक्सर होठों की प्राकृतिक सुन्दरता खत्म हो जाती है और होठ काले पडऩे लगते हैं।

अगर आप अपने होठों के फटने या कालेपन से परेशान हैं तो टेंशन न लें, नीचे दिए जा रहे कुछ आसान घरेलू नुस्खों से आप अपने होठों की सुन्दरता को चार चांद लगा सकते हैं।

होठों को रूखेपन और फटने से बचाने के लिए- अगर आपके होठ हमेशा रूखे रहते हैं तो थोड़ी सी मलाई में चुटकी भर हल्दी मिलाकर धीरे धीरे होठो पर मालिश करें

- होठों को फटने से बचाने के लिए रात में सोते समय सरसों के तेल को गुनगुना कर अपनी नाभि पर लगाएं

होठों पर पपड़ी जमने पर- अगर आपके होठों पर पपड़ी जम जाती है तो बादाम का तेल रात को सोते समय होंठो पर लगाएं।

होंठो के कालेपन को दूर करने के लिए- गुलाब की पंखुडिय़ों को पीसकर उसमें थोड़ी सी ग्लिसरीन मिलाकर। इस मिक्सचर को रोजाना अपने होंठों पर लगाएं होंठों का कालापन जल्दी ही दूर होने लगेगा और लिपस्टिक लगाना बन्द कर दें।

होंठों को हमेशा गुलाबी रखने के लिए- दही के मक्खन में केसर मिलाकर होठों पर मलने से आपके होठ हमेशा गुलाबी रहेंगे।

Friday, March 11, 2011

क्या आप मुंह के छालों से परेशान है...?

आज असंतुलित खान पान की वजह के कारण मुंह में छाले होना, पेट का खराब होना आम समस्या हो गई है। कई तरह की दवाईयां इस्तेमाल करने के बाद भी लोगों के मुह के छाले ठीक नहीं हो पातेहैं।घबराइए नहीं जो छाले किसी भी दवा से ठीक नहीं हो रहे हैं नीचे दिए जा रहे नुस्खों से निश्चित ही ठीक हो जाऐंगे।

1। छोटी हरड़ को बारीक पीसकर छालों पर दिन में दो तीन बार लगाने से मुंह तथा जबान दोनों के छाले ठीक हो जाते हैं।

2. तुलसी की चार पांच पत्तियां रोजना सुबह और शाम को चबाकर ऊपर से थोड़ा पानी पी लें( ऐसा चार पांच दिनों तक करें) ।

3. करीब दो ग्राम सुहागे का पावडर बनाकर थोड़ी सी ग्लिसरीन में मिलाकर छालों पर दिन में दो तीन बार लगाएं छालों में जल्दी फायदा होगा।

विशेष- जिन लोगों को बार-बार छाले होने की शिकायत रहती उन्हें टमाटर जादा खाने चाहिए।

Wednesday, March 9, 2011

कई रोगों के लिए रामबाण है सौंफ

क्या आप जानते हैं सौंफ हमारे शरीर के लिए कितनी लाभ दायक है सौंफ में ऐसे अनेक औषिधीय गुण मौजूद होते हैं जो सभी के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है। बड़ा हो या छोटा बच्चा यह हर किसी के स्वास्थ्य के लिए बड़ी लाभ कारी है।
1।दिमाग से सम्बन्धी रोगों के लिए सौंफ बड़ी लाभकारी होती है। इसके निरन्तर उपयोग से आखें कमजोर नहीं होती है और मोतियाबिन्द की शिकायत नहीं होती।
2। उल्टी प्यास जी मिचलाना जलन उदरशूल पित्तविकार मरोड़ आदि में सौफ का सेवन बहुत लाभकारी होता है।
3। रोजना सुबह और शाम दस दस ग्राम सौंफ बिना मीठा मिलाए चबाने से रक्त साफ होता है और त्वचा का रंग भी साफ होने लगता है।
4. हाथ पांव में जलन की शिकायत होने पर सौंफ के बराबर मात्रा में ध्धनिया कूट कर मिश्री मिला लें। खाना खाने के बाद पानी से करीब एक चम्मच रोज लेने से यह शिकायत कुछ ही दिनों में दूर हो जाती है।
5. अगर आपके बच्चे को अक्सर अफरे की शिकायत रहती है या अपच, मरोड़, और दूध पलटने की शिकायत रहती है तो दो चम्मच सौंफ के पावडर को करीब दो सौ ग्राम पानी में अच्छी तरह से उबाल लें और ठण्डा कर शीशी में भर लें। इस पानी को एक एक चम्मच दिन में दो तीन बार पिलाने से ये सारी शिकायतें दूर हो जाती हैं।

क्या आप चिड़चिड़े होते जा रहे हैं...?

आज प्रतिस्पर्धा का युग है। ऐसे में सभी को जरूरत से ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है है। शारीरिक और मानसिक श्रम की अधिकता से अधिकांश लोगों का स्वभाव क्रोधी और चिड़चिड़ेपन वाला हो जाता है। किसी का भी छोटी-छोटी बातों में चिड़ जाना यह तो आम बात हो गई है परंतु जो व्यक्ति प्रतिदिन योग करते हैं वे क्रोध से दूर ही रहते हैं। सर्वांगासन के नियमित अभ्यास से हमारा मन शांत रहता है। जिससे क्रोध तथा चिड़चिड़ेपन से निजात मिलती है।

आसन की विधि- समतल भूमि पर आसन बिछाकर शवासन में लेट जाइएं। अपने दोनों हाथों को जांघों की बगल में तथा हथेलियों को जमीन पर रखें। पैरों को घुटनों से मोड़कर ऊपर उठाएं तथा पीठ को कधों तक उठाएं। दोनों हाथ कमर के नीचे रखकर शरीर के उठे हुए भाग को सहारा दीजिए। इस तरह ठुड्डी को छाती से लगाए रखें। अब सांस को रोके नहीं स्वाभाविक रुप से चलने दें। पैर और धड़ को एक सीध में रखें। इस स्थिति में रुकने के बाद, पैरों को जमीन पर वापस लाइएं। पैरों को घुटनों से मोड़ते हुए घुटनों को माथे के पास लाइए। हाथों को जमीन पर रखते हुए शरीर और पैरों को धीरे -धीरे वापस शवासन में लाएं अब शवासन में शरीर को शिथिल अवस्था में लाइएं। आसन करते समय आंखों को खुला रखें।

आसन के लिए सावधानियां - आसन का अभ्यास करते समय धैर्य से काम लें। जल्दबाजी एवं हड़बड़ाहट में आसन न करें। इस आसन का अभ्यास पीठ दर्द, कमर दर्द, नेत्र रोगी और उच्च रक्तचाप के रोगी ने करें।

आसन के लाभ- इस आसन के नियमित अभ्यास से मानसिक तनाव, निराशा, हताशा एवं चिंताएं आदि रोगों का नाश होता है। इससे आखों का तेज बढ़ता है और चेहरा कांतिमय बनता है। स्त्रियों के स्वास्थ में इस आसन से विशेष लाभ होता है । स्त्रियों की मासिक धर्म संबंधी समस्याएं दूर होती हैं। सर्वांगासन से शरीर के उन अंगों से रक्त संचरण बढ़ जाता है, जहां रक्त संचार कम होता है चेहरे पर झाइयां नहीं पड़ती हैं।

सम्भालिए अपने दिल को कुछ इस तरह

जिस अंग पर हमारा पूरा शरीर चलता है वह है हमारा दिल। दिल से ही सभी अंगों में रक्त का संचार होता है।दिल के संबंध में छोटी सी असावधानी बड़ी बीमारी को न्यौता दे सकती है। इसलिए इसका ध्यान रखना अतिआवश्यक है। दिल को स्वस्थ रखने के लिए योगासन की मदद अवश्य लें। इसके लिए हमें शशकासन करना चाहिए इस आसन की पूर्ण अवस्था में हमारी आकृति शशाक अर्थात् खरगोश के समान हो जाता है, इसलिए इसे शशकासन कहते हैं।
शशकासन की विधि- किसी साफ जगह पर चटाई बिछाकर बैठ जाएं। दोनो पैरों को घुटनों से मोड़कर पीछे की ओर नितम्ब (हिप्स) के नीचे रखें और एडिय़ों पर बैठ जाएं। अब सांस लेते हुए दोनों हाथों को ऊपर की ओर करें। इसके बाद सांस को बाहर छोड़ते हुए धीरे-धीरे आगे की ओर झुकते हुए सांस को बाहर निकालें। दोनो हाथों को आगे की ओर फैलाते हुए हथेलियों को जमीन पर टिकाएं। अपने सिर को भी जमीन पर टिकाकर रखें। आसन की इस स्थिति में आने के बाद कुछ समय तक सांस को बाहर छोड़कर और रोककर रखें। फिर सांस लेते हुए शरीर में लचक लाते हुए पहले पेट को, फिर सीने को, फिर सिर को उठाकर सिर व हाथों को सामने की तरफ करके रखें। कुछ समय तक इस स्थिति में रहे और फिर सीधे होकर कुछ समय तक आराम करें और इस आसन को 4-5 बार करें।
शशकासन के लाभ- यह आसन हृदयरोगियों के लिए काफी फायदेमंद है। इस आसन से फेफड़ों में स्वच्छ हवा पहुंचने से फेफड़े स्वस्थ बन जाते हैं। इससे आंते, यकृत आदि भी स्वस्थ होते हैं। इस आसन से नसें-नाडिय़ां स्वस्थ व लचीली होकर सुचारू रूप से कार्य करती है। साइटिका में लाभदायक है। यह आसन कब्ज को दूर करता है तथा सामान्य रूप से कामविकारों को दूर करता है। यह आसन महिलाओं के लिए भी लाभकारी है।

Tuesday, March 8, 2011

दांतों के दर्द से अब न हों परेशान

आजकल ठीक से देखरेख न करने के कारण लोगों में दांत के दर्द की समस्या आम हो गई है। छोटे छोटे बच्चों को अक्सर दांत में दर्द होने की शिकायत होती है। आयुर्वेद में दांतों में दर्द की समस्या का बहुत आसान उपाय बताया है। आयुर्वेद में एक कहावत है-
नमक महीन लीजिए, अरु सरसों का तेल। नित्य मले रीसन मिटे, छूट जाए सब मैल।
सैंधा नमक को कपड़े से छान लें। नमक को हाथ पर रखकर उसमें सरसों का तेल मिला लें। इस मिश्रण से दातों पर हल्के-हल्के मसाज करें बाद में साफ पानी से कुल्ला कर लें।
इस विधि को अपनाने से आपको दातों की कई समस्याओं से निजात मिल जाएगी। इससे दातों में दांतों में पीलापन नहीं आता, दांत साफ और मजबूत होते हैं, कीड़े नहीं लगते, दर्द, मसूड़ों की सूजन, इनसे खून निकलना बन्द हो जाता है। अन्य टिप्स- रोजाना सोने से पहले थोड़े से पानी में सेंधा नमक मिलाकर कुल्ला करने से दांतों की समस्या खत्म हो जाती है।

Monday, March 7, 2011

धोखेबाज पार्टनर की पहचान है उसकी आवाज

कहते हैं कि आवाज की तीब्रता कुदरत की देन है। लेकिन शोधकर्ताओं की मानें तो उनका कहना है कि आवाज से धोखेबाज पार्टनर की पहचान की जा सकती है।
कनाडा की मैकमास्टर यूनिवर्सिटी की रिसर्च टीम के अनुसार महिलाओं की ऊंची आवाज और पुरुषों की धीमी आवाज उन्हें एक-दूसरे को भविष्य में धोखा देने के संकेत हो सकते हैं।
मैकमास्टर यूनिवर्सिटी की साइकॉलजी के असिस्टेंट प्रोफेसर और न्यूरॉलजी के स्पेशलिस्ट डेविड फेइनबर्गन के अनुसार आवाज में उतार-चढ़ाव का सीधा संबंध हॉर्मोन से है।
जिन पुरुषों में टेस्टोट्रोन नामक हॉर्मोन का स्तर ऊंचा होता है, उनकी आवाज धीमी होती है। जिन महिलाओं में एस्ट्रोजेन का स्तर अधिक होता है, उनकी आवाज भी अधिक ऊंची होती है। इन हॉर्मोन को साथियों को धोखा देने के लिए जिम्मेदार माना जाता है।
पति या पत्‍नी के चरित्र का पता लगाना है तो उसकी खूबसूरती से ज्‍यादा उसकी आवाज पर ध्‍यान दें।

Sunday, March 6, 2011

कैसे करें कोलेस्ट्रॉल कन्ट्रोल

बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल निशानी है हृदय रोग की। हृदय रोग होने का मतलब है जीवन को खतरा। हमें जानकारी होनी चाहिए कि क्यों बढ़ता है रक्त का कोलेस्ट्रॉल। कैसे पाएं इससे छुटकारा?- कोलेस्ट्रॉल का बढ़ना, हृदय रोग का होना आमतौर पर बंशानुगत रोग है। फिर भी खानपान की गलतियों के कारण किसी को भी हो सकता है। कोलेस्ट्रॉल का अपना रंग पीला है। हल्का पीला रंग होता है। यह चर्बी व वसा लिये होता है।
- कोलेस्ट्रॉल का होना जरूरी है। किन्तु सामान्य से अधिक हो तो हानिकारक।
- व्यक्ति के भोजन का 30 प्रतिशत तक का भाग कोलेस्ट्रॉल ही है। यह जिगर में बनता है। होता है यह सामान्य से अधिक।
कैसे करें? कोलेस्ट्रॉल कम
व्यायाम-योगासन जिस में प्राणायाम भी हो हल्के व्यायाम, खेलना, तैरना, पैदल चलना, बड़े कदमों से सैर, साइकिल चलाना, कम से कम समय आराम करना, शरीर चलाए रखना।
परहेज- अनाज व तले पदार्थों की जगह अधिक फलों का प्रयोग, फल ऐसे हों जो पेड़ पर ही पके हों। हरी सब्जियां खाना, सैर करना, लेटे नहीं रहना, जिन कारणों से यह रोग होता है, उसे निकाल फेकें।
उपचार-- कोलेस्ट्रॉल कम करने का अर्थ है हृदय रोग का सही उपचार। इसके लिए प्रतिदिन प्रातः अंकुरित अनाज, मुट्ठी भर जरूर खाएं।- अंकुरित दालें भी खानी आरम्भ करें।
- सोयाबीन का तेल अवश्य प्रयोग करें। यह भी उपचार है।
- लहसुन, प्याज, इनके रस उपयोगी हैं- नीम्बू, आंवला जैसे भी ठीक लगे, प्रतिदिन लें।
- शराब या कोई नशा मत करें, बचें।
- ईसबगोल के बीजों का तेल आधा चम्मच दिन में दो बार।
- रात के समय धनिया के दो चम्मच एक गिलास पानी में भिगों दें। प्रातः हिलाकर पी लें। धनिया भी चबाकर निगल जाएं।
- यदि आप अपने रक्त में कोलेस्ट्रॉल की ठीक मात्रा रख सकें। जो सामान्य तक रहे। बढ़े नहीं। ऐसे में यह रोग होगा ही नहीं। इन सब जानकारियों की चर्चा पहले ही अपने चिकित्सक से कर लें तो बेहतर होगा।

मधुमेह में क्या खाएं, क्या न खाएं

आधुनिक जीवनशैली और सुख सुविधाओं ने जहां मनुष्य के जीवन को आसान किया है वहीं उसे कुछ बीमारियां भी भेंट स्वरूप दी हैं। ये बीमारियां एक बार लग जाए तो ठीक होने का नाम नहीं लेती क्योंकि इन्हें काबू में तो रखा जा सकता है पर पूरी तरह ठीक करना प्राय: संभव नहीं होता। मधुमेह और रक्तचाप ऐसे ही दो राजरोग हैं जो आर्थिक दृष्टि से समृध्द लोगों को अधिक होते हैं। इन रोगों को जीवनशैली में कुछ बदलाव लाकर और अपने आहार में परिवर्तन लाकर काबू में रखा जा सकता है जिससे दवाइयों पर निर्भरता को कम किया जा सकता है। आइए देखें कि कौन से खाद्य पदार्थ मधुमेह रोग को काबू रखने में हमें सहायता दे सकते हैं।
जामुन : जामुन मधुमेहियों का फल माना जाता है। जामुन का फल, गुठली, छाल सभी मधुमेह रोग में फायदेमंद है। जामुन जिन दिनों में उपलब्ध हो, उन दिनों खूब खाइये। जामुन की गुठली को फेंकिए मत। उन्हें धोकर सुखा कर पीस लें। उसका 3 ग्राम चूर्ण दिन में दो बार सुबह शाम पानी के साथ लें। जामुन स्टार्च को शर्करा में बदलने से रोकता है। इसके नियमित सेवन से मूत्र में शुगर की मात्रा कम होती है।
मेथी : मधुमेह रोग में मेथी का सेवन भी लाभप्रद है। मेथी दानों का चूर्ण बना कर नित्य खाली पेट 1 चम्मच चूर्ण पानी के साथ फांक लें। शुगर कन्ट्रोल करने में सहायता मिलेगी।
टमाटर : मधुमेह के रोगियों के लिए टमाटर लाभदायक है। इसके नियमित सेवन से मूत्र में शक्कर जाना धीरे-धीरे कम हो जाता है।
करेला : करेला वैसे तो अपने कड़वे स्वाद से पहचाना जाता है पर मधुमेहियों के लिए करेले का सेवन बहुत लाभप्रद है। 15 ग्राम करेले के रस को 100 ग्राम पानी में मिलाकर रोगी को नियमित देने से बहुत लाभ मिलता है। नई शोध के अनुसार उबले हुए करेले का रस रोगी के लिए अधिक लाभप्रद है। करेले को बंद कुकर में न उबालें। खुले भिगोने में 15 मिनट तक छोटे टुकड़े कर धीमी आंच पर उबालें। ठंडा होने पर कपड़े से रस छान कर रोगी को दें।
आंवला : आंवले का सेवन भी मधुमेह रोगियों के लिए लाभप्रद है। आंवला कच्चा भी खा सकते हैं और धनिया, पुदीना के साथ पीसकर चटनी के रूप में भी खा सकते हैं। आंवला मधुमेह के साथ-साथ आंखों को भी लाभ पहुंचाता है।
संतरा-नारंगी : मधुमेह रोगी संतरे तथा नारंगी का सेवन कर सकते हैं।
मशरूम : मशरूम में प्रोटीन अधिक होते हैं परन्तु स्टार्च न होने के कारण मधुमेह रोगी इसका सेवन नि:संकोच कर सकते हैं।
खीरा : मधुमेह रोगी को बार-बार भूख लगती है परन्तु अधिक खाना उनके लिए उचित नहीं होता। ऐसे में जब दो भोजन के बीच भूख लगे तो खीरा खा सकते हैं। खीरे से पेट भी भरता है और खीरा नुकसान भी नहीं करता।
चना : चना मधुमेह रोगियों के लिए बहुत अच्छा खाद्य पदार्थ माना जाता है। भूख लगने पर भुने चनों का सेवन किया जा सकता है। नाश्ते में रात के दूध में भिगोए चने सुबह खायें। चने के आटे की रोटी खाना भी लाभप्रद है। यदि खाली चने की रोटी न पचे तो चने के आटे में गेहूं का आटा मिला कर खाएं।
पौष्टिक पराठा : पराठा खाने का मन हो तो बथुआ, पालक, मेथी के पत्तों को आटे में गूंथ कर खाएं। चाहें तो मूली, गोभी को कद्दूकस कर आटे में गूंथ कर परांठा खाएं।
दलिया : चावल के स्थान पर नमकीन सब्जियों वाला दलिया खायें। चावल खाने की इच्छा भी पूरी हो जाएगी और पौष्टिकता भी पूरी मिलेगी।
इडली : इडली के लिए 1 कप मूंग की दाल, आधा कप उड़द की दाल, आधा कप चने की दाल लें। इन्हें रात में भिगोकर रख दें। सुबह पीस कर उसका खमीर उठा लें। उसमें नमक, जीरा, हरा धनिया व हरी मिर्च मिलाकर इडली के सांचे में पकायें। पौष्टिक इडली तैयार है। इससे पेट भी भरेगा और पौष्टिकता भी मिलेगी।
क्या न खाएं : चावल, मिठाई, लस्सी, शकरकंदी, आलू, अरबी, केला, आम, लीची, आइसक्रीम, केक, पेस्ट्री आदि से परहेज रखें। साथ ही साथ चिंता से दूर रहने का प्रयास करें।नियमित रहें : खाने-पीने सोने-जागने का समय निश्चित रखें। योगाभ्यास नियमित करें। प्रात: और शाम लंबी सैर पर निकल जाएं। स्वयं को बीमार न समझे। आत्मविश्वास से जीवन जिएं तो रोग आपके जीवन से दूर हो जायेगा।

चेहरे में लाएं निळार

सुंदर व खुबसूरत चेहरे की ओर सभी आकर्षित होते हैं। हर स्त्री चाहती हैं कि उसके चेहरे में निखार आये व सुंदर बने। इसके लिए सौंदर्य संबंधी बहुत सी बातों को ध्यान में रखना पड़ता हैं क्योंकि सुंदरता तो उसे विरासत में नहीं मिली होती। वर्तमान में सौंदर्य के प्रति उनमें जागरुकता बढ़ी हैं। प्रस्तुत हैं चंद घरेलू उपाय जिसे आप अपनाकर अपने चेहरे में निखार ला सकती हैं, सुंदर बन सकती हैं।
** सांवलापन- चेहरे का सांवलापन दूर करने के लिए गाजर व नींबू का रस दूध में मिलाकर लगायें, मले या फिर गोभी के पत्तियों को बारीक पीसकर उसमें थोड़ा-सा खमीर मिलाकर चेहरे पर मलें। इससे त्वचा का सांवलापन व रुखापन दूर होगा।
** मुलायम चेहरा- चेहरे को मुलायम बनाने के लिए जसवंत के फूलों को पीसकर थोड़ा चंदन पावडर डालकर लगाये। जौ की आटे में दही व कुछ बूंदे बादाम रोगन मिलाकर भी लगा सकते हैं।
** दाग- चेहरे के काले दाग को मिटाने के लिए नींबू के रस में थोड़ा-सा मीठा सोडा मिलाकर चेहरे पर लगाइए या फिर प्रात: काल टमाटर के रस में थोड़ा रुई भिगोकर प्रतिदिन लगायें।
** झुर्रियां- चेहरे की झुर्रियों को समाप्त करने के लिए एक ही प्रकार के लोशन का प्रयोग करें। दूध व सरसों का तेल मिलाकर भी लगा सकते हैं।
** चेहरा कांतिमय- नींबू के दो चार बूंदे मलाई में डालकर चेहरे पर लगाने से चेहरा में निखार आता हैं, त्वचा साफ होती हैं। जीरे को पानी में उबालकर उस उबले पानी से चेहरे को धोने से या नींबू का रस दही में मिलाकर चेहरे पर लगाने से त्वचा में एक नई कांति आ जाती हैं, चेहरा आकर्षक बनता है।
** मुहांसे- मुंहासे की शिकायत होने पर चंदन की लकड़ी और हल्दी को पानी में घिसकर लगाने से मुहांसे मिट जाते हैं। मेकअप मौसम के अनुसार करें। कपड़े भी मौसम के अनुकूल ही पहनें। प्रतिदिन होंठ की बराबर देखभाल करें। घी अथवा मलाई लगाये होंठ मुलायम बनते हैं। प्रतिदिन 3-4 बार साफ पानी से चेहरे को अवश्य धोयें। तेज गर्मी, तेज बारिश व तेज सर्दी से चेहरे को बचायें।

Friday, March 4, 2011

गुस्से से बढ़ते हैं कील-मुंहासें

क्रोध को दुश्मन कहा जाता है। गुस्से से कई बार हमारे कार्य बिगड़ जाते हैं, रिश्तों में दरार पड़ जाती है। इसके साथ ही ज्यादा गुस्सा करने पर स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां भी बढ़ जाती हैं। आयुर्वेद के अनुसार गुस्सा करने से कील-मुंहासों में बढ़ोतरी होती है।कील-मुंहासें सुंदरता के लिए दाग की तरह ही हैं। इसी वजह से सभी इनसे बचने के लिए कई प्रकार के जतन करते हैं। इस संबंध में आयुर्वेद में कई टिप्स बताई गई हैं। इन टिप्स को अपनाने से त्वचा बेदाग और चमकदार हो जाती है।
- हर रोज 2-3 लीटर पानी अवश्य पीएं।
- अपने चेहरे को ग्लिसरीनयुक्त साबुन से धोएं। ध्यान रहे यदि कोई साबुन त्वचा को नुकसान पहुंचता है तो उसे लगाना तुरंत बंद कर दें।
- संतुलित खाना खाएं। जंक फूड से बचें।- तेल, घी जैसे अत्यधिक वसा वाले खाने कम से कम खाएं।
- कील-मुंहासे का एक बड़ा कारण है पेट का साफ न होना। इसलिए कब्ज की समस्या हो तो उसका इलाज करवाएं।
- बालों में रूसी हो तो उसे दूर करें।
- नींबू भी मुंहासे दूर करता है।
- गुस्से पर काबू रखें। इससे शरीर में कई ऐसे पदार्थ निर्मित हो जाते हैं जिनसे कील-मुंहासें की समस्या पैदा होती है।

अगर आप आधेसिर दर्द से परेशान हैं तो घबराऐं नहीं

अक्सर लोग सिर दर्द की समस्या से परेशान रहते हैं लेकिन कुछ लोगों ऐसे हैं जिनके लिए अक्सर होने वाला आधाशीशी का दर्द बडी परेशानी बन गया है। नीचे बताए जा रहे कुछ आयुर्वेद के उपायों से आप इस समस्या से हमेशा के लिए छुटकारा पा सकते हैं।
1। गाय का ताजा घी सुबह शाम दो चार बूंद नाक में डालने से टपकाने से आधाशीशी का दर्द हमेशा के लिए जड़ से खत्म हो जाता है।
2। सिर के जिस भाग में दर्द हो रहा हो उस तरफ के नथुने में चार पांच बूंद सरसों के तेल की डालने से या तेल को सूंघने से आधासिर दर्द बन्द हो जाता है।
विशेष: इस विधि को अपनाने से नाक से खून आने(नकसीर) की समस्या भी दूर हो जाती है

Tuesday, March 1, 2011

क्या आपको कुछ याद नहीं रहता...?

आजकल अच्छा खान पान न होने की वजह से याददाश्त का कमजोर होना एक आम समस्या बन गई है।हर आदमी अपनी भूलने की आदत से परेशान है लेकिन अब आपको परेशान हो की आवश्यकता नहीं है क्योंकि आयुर्वेद में इस बीमारी को दूर करने के सरलतम उपाय बताए हैं।
1। सात दाने बादाम के रात को भिगोकर सुबह छिलका उतार कर बारीक पीस लें । इस पेस्ट को करीब 250 ग्राम दूध में डालकर तीन उबाल लगाऐं। इसके बाद इसे नीचे उतार कर एक चम्मच घी और दो चम्मच शक्कर मिलाकर ठंडाकर पीऐं। 15 से 20 दिन तक इस विधि को करने से याददाश्त तेज होती है।
2। भीगे हुए बादाम को काली मिर्च के साथ पीस लें या ऐसे ही खूब चबाचबाकर खाऐं और ऊपर से गुनगुना दूध पी लें।
3। एक चाय का चम्मच शंखपुष्पी का चूर्ण दूध या मिश्री के साथ रोजाना तीन से चार हफ्ते तक लें ।
विशेष: सिर का दर्द, आंखों की कमजोरी, आंखों से पानी आना, आंखों में दर्द होने जैसे कई रोगों में यह विधि लाभदायक है।

दालचीनी से भगाएं मौसमी बीमारियां

सामान्यत: सभी लोगों मौसम परिवर्तन के समय छोटी-छोटी बीमारियों से ग्रसित हो जाते हैं। मौसमी बीमारियां जैसे सर्दी-जुकाम, बुखार, खांसी आदि। इनसे बचने के लिए आयुर्वेद में दालचीनी का उपयोग बताया गया है।
यदि आप अत्यधिक कार्य की वजह से मानसिक तनाव झेल रहे हैं तो रात को सोते समय एक चुटकी दालचीनी पाउडर शहद के साथ लें, इससे सोचने की शक्ति भी बढ़ती है। कुछ ही दिनों तनाव दूर हो जाएगा।
यदि आपका गला बैठ गया है, तो दालचीनी का बारीक पाउडर एक गिलास पानी में उबालें और चुटकीभर कालीमिर्च व शहद के साथ लें।
प्रतिदिन रात को सोते समय दालचीनी का सेवन करें। इससे मौसमी बीमारियों को आपसे दूर रहेंगी।
सिरदर्द होने पर दालचीनी के पाउडर को पानी में मिलाकर पेस्ट बनाकर माथे पर लगाएं।
स्कीन संबंधी बीमारी जैसे कील-मुंहासे, काले दाग-धब्बे होने पर दालचीनी के पाउडर को नीबू के उस में मिलाकर लगाएं।
यदि आपके मुंह से बदबू आती है तो दालचीनी का छोटा टुकड़ा चूसें।
दस्त की समस्या होने पर एक चम्मच दालचीनी पाउडर सुबह-शाम पानी के साथ लें।

शहद से बंद होगा बालों का झडऩा

सामान्यत: सभी के यहां शहद आसानी से मिल जाता है। शहद के औषधीय गुण सभी जानते हैं। शहद की तासीर ठंडी होती है और यह कई बीमारियों को दूर करने में सक्षम है। शहद से बालों का झडऩा भी रोका जा सकता है। आज छोटी उम्र से ही बालों के झडऩे की समस्या देखी जाती है। इस बीमारी से बचने के लिए शहद और दालचीनी कारगर उपाय है।
बाल झड़ते हैं तो गरम जैतून के तेल में एक चम्मच शहद और एक चम्मच दालचीनी पाउडर का पेस्ट बनाएं। नहाने से पहले इस पेस्ट को सिर पर लगा लें। 15 मिनट बाद बाल गरम पानी से सिर को धोएं। ऐसा करने पर कुछ ही दिनों बालों के झडऩे की समस्या दूर हो