Thursday, June 30, 2011

हार्ट-अटैक का खतरा रहेगा कौसों दूर... गर खाने में हो

भोजन में अनेक ऐसी वस्तुएं हैं, जिन्हें प्रतिदिन प्रयोग करके हृदयरोग व हृदयाघात से बचा जा सकता है। आइये जानते हैं कुछ ऐसी ही घरेलू चीजों के विषय में जिनका सही तरीके से नियमित प्रयोग आपको दिल से जुड़े हर खतरे से महफूज रखता है-

1. प्याज- इसका प्रयोग सलाद के रूप में कर सकते हैं। इसके प्रयोग से रक्त का प्रवाह ठीक रहता है। कमजोर हृदय होने पर जिनको घबराहट होती है या हृदय की धड़कन बढ़ जाती है उनके लिए प्याज बहुत ही लाभदायक है।

2. टमाटर- इसमें विटामिन सी, बीटाकेरोटीन, लाइकोपीन, विटामिन ए व पोटेशियम प्रचूर मात्रा में पाया जाता है जिससे दिल की बीमारी का खतरा कम हो जाता है।

3. लौकी- इसे घिया भी कहते हैं। इसके प्रयोग से कोलेस्ट्रॉल का स्तर सामान्य अवस्था में आना शुरू हो जाता है। ताजी लौकी का रस निकालकर पोदीना पत्ती-4 व तुलसी के 2 पत्ते डालकर दिन में दो बार पीना चाहिए।

4. लहसुन- भोजन में इसका प्रयोग करें। खाली पेट सुबह के समय दो कलियां पानी के साथ भी निगलने से फ ायदा मिलता है।

5.गाजर- बढ़ी हुई धड़कन को कम करने के लिए गाजर बहुत ही लाभदायक है। गाजर का रस पीएं, सब्जी खाएं व सलाद के रूप में प्रयोग करें।

4 बूंद नाक में डालो, बेहोश व्यक्ति तत्काल होश में आएगा

प्रकृति ने मनुष्य को ऐसे-ऐसे वरदानों से नवाजा है कि वह चाहे तो भी जीवनभर उनसे उऋण नहीं हो सकता है। तुलसी भी ऐसा ही एक अनमोल पौधा है जो प्रकृति ने मनुष्य को दिया है। सामान्य से दिखने वाले तुलसी के पौधे में अनेक दुर्लभ और बेशकीमती गुण पाए जाते हैं। आइये जाने कि तुलसी का पूज्यनीय पौधा हमारे किस-किस काम आ सकता है-

- शरीर के वजन को नियंत्रित रखने हेतु भी तुलसी अत्यंत गुणकारी है।

- इसके नियमित सेवन से भारी व्यक्ति का वजन घटता है एवं पतले व्यक्ति का वजन बढ़ता है यानी तुलसी शरीर का वजन आनुपातिक रूप से नियंत्रित करती है।

- तुलसी के रस की कुछ बूंदों में थोड़ा-सा नमक मिलाकर बेहोंश व्यक्ति की नाक में डालने से उसे शीघ्र होश आ जाता है। - चाय बनाते समय तुलसी  के कुछ पत्ते साथ में उबाल लिए जाएं तो सर्दी, बुखार एवं मांसपेशियों के दर्द में राहत मिलती  है।

- 10 ग्राम तुलसी के रस को 5 ग्राम शहद के साथ सेवन करने से हिचकी एवं अस्थमा के रोगी को ठीक किया जा सकता है।

- तुलसी के काढ़े में थोड़ा-सा सेंधा नमक एवं पीसी सौंठ मिलाकर सेवन करने से कब्ज दूर होती है।

- दोपहर भोजन के पश्चात तुलसी की पत्तियां चबाने से पाचन शक्ति मजबूत होती है।

- 10 ग्राम तुलसी के रस के साथ 5 ग्राम शहद एवं 5 ग्राम पिसी कालीमिर्च का सेवन करने से पाचन शक्ति की कमजोरी समाप्त हो जाती है।

- दूषित पानी में तुलसी की कुछ ताजी पत्तियां डालने से पानी का शुद्धिकरण किया जा सकता है।

9 देशी फंडे पूरे 13 दिन...चेहरा चमकने लगेगा

एक खास उम्र में मुहांसे होने की समस्या से सभी को दो-चार होना ही पड़ता है। क्योंकि यह एक प्राकृतिक परिवर्तन से जुड़ी  घटना है। यौवन की दहलीज पर खड़े लड़के या लड़की के शरीर में होने वाले हार्मोन्स परिवर्तनों के कारण मुहांसों का होना आम बात है। कई बार होर्मोन्स परिवर्तन इतना असंतुलित रूप से होता है कि अत्यधिक मुहांसों के कारण  अच्छे भले चेहरे की रंगत और रौनक बिगड़ जाती है। आइये जानें कुछ ऐसे आसान घरेलू उपायों के बारे में जो मुहांसे और उनसे बने दागों को जड़ से मिटाकर आपके चेहरे को फिर से आकर्षक और खूबसूरत बना सकते हैं-

छोटे व घरेलू प्रयोग

1. जामुन की गुठली को पानी में घिसकर चेहरे पर लगाने से मुहासे दूर होते हैं।

2. दही में कुछ बूंदें शहद की मिलाकर उसे चेहरे पर लेप करना चाहिए। इससे कुछ ही दिनों में मुहांसे दूर हो जाते हैं।

3. तुलसी व पुदीने की पत्तियों को बराबर मात्रा में लेकर पीस लें तथा थोड़ा-सा नींबू का रस मिलाकर चेहरे पर लगाने से

   भी मुहांसों से निजात मिलती है।

4. नीम के पेड़ की छाल को घिसकर मुहांसों पर लगाने से भी मुहांसे घटते हैं।

5. जायफल में गाय का दूध मिलाकर मुहांसों पर लेप करना चाहिए।

6. हल्दी, बेसन का उबटन बनाकर चेहरे पर लगाने से भी मुहांसे दूर होते हैं।

7. नीम की पत्तियों के चूर्ण में मुलतानी मिट्टी और गुलाबजल मिलाकर पेस्ट बना लें व इसे चेहरे पर लगाएं।

8. नीम की जड़ को पीसकर मुहांसों पर लगाने से भी वे ठीक हो जाते हैं।

9. काली मिट्टी को घिसकर मुहासों पर लगाने से भी वे नष्ट हो जाते हैं। 

Tuesday, June 28, 2011

छोटे लेकिन बड़े काम के हैं ये घरेलू नुस्खे...तुरंत आजमाएं

सेहत से जुड़ी कई ऐसी छोटी-छोटी समस्याएं होती हैं जिनके लिये बार-बार डॉक्टरों के पास दौडऩ संभव नहीं हो पाता। तो आइये जानते हैं कुछ छोटे आसान और बेहद काम के सरल घरेलू उपायों के विषय में जो कई समस्याओं से छुटकारा दिलाने में बड़े अचूक होते हैं-



- गैस की तकलीफ से तुरंत राहत पाने के लिए लहसुन की 2 कली छीलकर 2 चम्मच शुद्ध घी के साथ चबाकर खाएं फौरन आराम होगा।



- प्याज के रस में नींबू का रस मिलाकर पीने से उल्टियां आना तत्काल बंद हो जाती हैं।



- सूखे तेजपान के पत्तों को बारीक पीसकर हर तीसरे दिन एक बार मंजन करने से दांत चमकने लगते हैं।



- हिचकी चलती हो तो 1-2 चम्मच ताजा शुद्ध घी, गरम कर सेवन करें।



- ताजा हरा धनिया मसलकर सूंघने से छींके आना बंद हो जाती हैं।



- प्याज का रस लगाने से मस्सो के छोटे-छोटे टुकड़े होकर जड़ से गिर जाते हैं।



- यदि नींद न आने की शिकायत है, तो रात्रि में सोते समय तलवों पर सरसों का तेल लगाएं।



- यदि आवाज बैठी हुई है या गले में खराश है, तो सुबह उठते समय और रात को सोते समय छोटी इलायची चबा-चबाकर खाएं तथा गुनगुना पानी पीएं।

Monday, June 27, 2011

छोटी-मोटी बीमारियों का ऐसे करें इलाज

वर्ष 2008 में ब्रिटेन में हुए एक शोध से सामने आया कि यहां के करीब 35 फीसदी लोग भी नैचुरल मेडिसिन पर ही भरोसा करते हैं। नेचुरल मेडिसिन के एक्सपर्ट फिलिप वीक्स कहते हैं कि घरेलू उपाय अपनाने का एक फायदा यह है कि इससे साइड इफेक्ट्स होने की संभावना बिल्कुल नहीं होती है। आइए जानते हैं कुछ ऐसे ही घरेलू उपाय और उनसे दूर होने वाली समस्याओं के बारे में..

पुदीनहरा

पेट में उठने वाली मरोड़, अनियमित बाउल मूवमेंट की समस्या को दूर करने में पुदीनहरा बहुत कारगर उपाय है। इसका तेल भी पेट दर्द से निजात दिलाने में सहायक होता है। जर्मनी स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ हेइडेलबर्घ की शोध से साबित होता है कि पुदीनहरा से मुंह के छालों का उपचार भी कारगर होता है। एक शोध से सामने आया कि इसकी एंटीबैक्टीरियल प्रॉपर्टी से वायरस और संक्रमण से बचाव होता है। पुदीनहरा की चाय का सेवन करने से मुंह के छाले जल्दी ठीक होते हैं।

रोजमेरी

यह स्मरणशक्ति बढ़ाने में मदद करती है। फिलिप कहते हैं कि इससे सेरेब्रल (दिमाग का महत्वपूर्ण हिस्सा) का रक्त संचार बढ़ता है। इसमें मौजूद कार्नोसिक एसिड नामक एंटीऑक्सीडेंट दिमाग की कोशिकाओं के लिए बहुत फायदेमंद है। इससे अल्जाइमर यानी भूलने की बीमारी होने की आशंका भी कम होती है।

विशेषज्ञ कहते हैं कि इसकी सुगंध मात्र से व्यक्ति की फोकस करने की क्षमता बढ़ती है। यह खराब मूड को बनाने, शारीरिक थकान के साथ मानसिक थकान दूर करने में भी मदद करता है। डिजॉन स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रोनॉमिक रिसर्च के एक अध्ययन से पता चलता है कि साइटोक्रोम पी450 नामक एंजाइम का निर्माण करने में रोजमेरी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह एंजाइम रक्त में मौजूद विषक्त तत्वों को बाहर निकालने में मदद करता है।

तेज पत्ता

एंटीसेप्टिक प्रॉपर्टी होने के कारण प्राचीन समय में इसका इस्तेमाल प्राकृतिक टूथपेस्ट के तौर पर किया जाता था। किसी कीड़े के काटने या त्वचा संबंधित समस्याएं होने पर सूजन से बचने के लिए भी इसे प्रयोग किया जाता था। यूनिवर्सिटी ऑफ एक्सीटर के शोध से सामने आया कि रजोनिवृत्ति के दौर से गुजरने वाली महिलाओं को होने वाली हॉट फ्लशेज.. की समस्या दूर करने के लिए भी यह उपाय कारगर है।

अजवायन के फूल

फंगल इंफेक्शन के लिए जिम्मेदार बैक्टीरिया का नाश करने के लिए यह कारगर उपाय है। फिलिप कहते हैं कि इसकी एंटीबैक्टीरियल प्रॉपर्टी हेलीकोबेक्टर पाइलोरी नामक बैक्टीरिया को बढ़ने से रोकती है, जो पेट में अल्सर के लिए जिम्मेदार होते हैं। इसका सेवन शहद के साथ करने से ब्रोन्चिटिस और सीने में होने वाले संक्रमणों से भी निजात मिलती है।

अजवायन

फिलिप कहते हैं कि इससे तैयार तेल एंटीबॉयोटिक के समान काम करता है, जो स्टेफिलोकोकस नामक बैक्टीरिया को नष्ट करता है। अमेरिका के एक शोध से सामने आया कि इसमें सेब, आलू और संतरे की तुलना में क्रमश: 42 गुना, 30 गुना व 12 गुना अधिक एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं। इससे शरीर के महत्वपूर्ण रसायनों को किन्हीं कारणों से होने वाली क्षति को रोका जा सकता है।

सिर दर्द दूर करने के तरीके

सिर दर्द होने के पीछे शारीरिक व मानसिक दोनों ही कारण जिम्मेदार होते हैं। इससे बचने के लिए जीवनशैली और खानपान में बदलाव लाना ही काफी नहीं है। आइए जानते हैं कुछ ऐसे ही कारगर उपायों के बारे में..

1. बर्फ का पैक गर्दन पर लगाएं। यदि तनाव, चिंता, अवसाद, गुस्से या फूड एलर्जी के कारण आपको सिर दर्द हो रहा है, तो आराम मिलेगा।

2. डिहाइड्रेशन से भी सिर दर्द होता है। रोजाना आठ गिलास पानी पीना ही चाहिए।

3. बर्फ के ठंडे पानी में कपड़े की पट्टी डुबोकर आंखों पर दस मिनट रख लें। वहीं दर्द वाली जगह पर पुदीने के तेल से 15 मिनट हल्की मसाज करें, राहत मिलेगी।

4. एक्यूपंक्चर या एक्यूप्रेशर भी सिर दर्द और तनाव दूर करने में सहायक है।

5. गर्दन और कंधे की मांसपेशियों में अकड़न होने के कारण भी सिर में दर्द हो सकता है। ऐसी स्थिति में गर्म पानी की बॉटल, गर्म पानी में टॉवल डुबोकर या हीटिंग पैड को गर्दन व कंधे पर कुछ देर के लिए रखें।

6. तेज रोशनी या लाइट्स के संपर्क में आने के चलते भी सिर दर्द होता है। धूप में निकलने से पहले काले चश्मे और घर में तेज लाइट्स का प्रयोग करने से बचना चाहिए।

7. प्रीजर्वेटिव और अधिक शुगर वाले खाद्य पदार्थो से कुछ लोगों को एलर्जी होती है, जिससे उन्हें सिर दर्द होने लगता है। ऐसे में इसका कम सेवन करें।

8. सिर दर्द ही नहीं शरीर के अन्य हिस्से में होने वाले दर्द से बचने के लिए कुनकुने पानी से स्नान करें।

9. स्वीमिंग, ब्रिस्क वॉक या जॉगिंग करने से रक्त संचार बढ़ता है, जिससे सिर दर्द के साथ ही तनाव से भी मुक्ति मिलती है। वहीं भरपूर नींद लें।

मलेरिया, डेंगू या स्वाइन फ्लू सबकी छुट्टी कर देगा कड़वा चिरायता...

चिरायते का नाम अधिकांश लोगों ने सुन रखा होगा। बरसों से हमारी दादी-नानी कड़वे चिरायते से बीमारियों को दूर भगाती रही है। असल में यह कड़वा चिरायता एक प्रकार की जड़ी-बूटी है जो कुनैन की गोली से अधिक प्रभावी होती है। एक प्रकार से यह एक देहाती घरेलू नुस्खा है। पहले इस चिरायते को घर में सुखा कर बनाया जाता था लेकिन आजकल यह बाजार में

कुटकी चिरायते के नाम से भी मिलता है। लेकिन अधिक कारगर तो घर पर बना हुआ ताजा और विशुद्ध  चिरायता ही अधिक कारगर होता है।

चिरायता बनाने की विधि-

100 ग्राम सूखी तुलसी के पत्ते का चूर्ण, 100 ग्राम नीम की सूखी पत्तियों का चूर्ण, 100 ग्राम सूखे चिरायते का चूर्ण लीजिए। इन तीनों को समान मात्रा में मिलाकर एक बड़े डिब्बे में भर कर रख लीजिए। यह तैयार चूर्ण मलेरिया या अन्य बुखार होने की स्थिति में दिन में तीन बार दूध से सेवन करें। मात्र दो दिन में आश्चर्यजनक लाभ होगा।

कारगर एंटीबॉयोटिक-

बुखार ना होने की स्थिति में भी यदि इसका एक चम्मच सेवन प्रतिदिन करें तो यह चूर्ण किसी भी प्रकार की बीमारी चाहे वह स्वाइन फ्लू ही क्यों ना हो, उसे शरीर से दूर रखता है। इसके सेवन से शरीर के सारे कीटाणु मर जाते हैं। यह रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी सहायक है। इसके सेवन से खून साफ  होता है तथा धमनियों में रक्त प्रवाह सुचारू रूप से संचालित होता है।

मानसून में बीमारियों को ऐसे भगाएं दूर...

मानसून के मौसम में खांसी-जुखाम एवं नजला जैसी समस्या कुछ लोगों में आमतौर पर देखने में आती है। ऐसी ही कुछ सामान्य जान पड़नेवाली परेशानियों की लगातार अनदेखी से कई बार खतरनाक संक्रमण भी उत्पन्न हो सकता है।

हाँ,थोड़ी सी सावधानियां एवं प्राकृतिक जीवनशैली को अपनी दिनचर्या में शामिल कर हम न केवल रोगों से बच सकते हैं, बल्कि अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर भविष्य में होनेवाले संक्रमणों से निजात पा सकते हैं।

आयुर्वेद संपूर्ण जीवन का विज्ञान है जहाँ प्राकृतिक जडी -बूटियों एवं जीवनशैली में परिवर्तन को विशेष महत्व दिया गया है, ऐसे ही कुछ सरल आयुर्वेदिक एवं प्राकृतिक उपायों को हम दैनिक रूप से उपयोग कर मानसून के समय होनेवाली सामान्य बीमारियों से अपने शरीर की रक्षा कर सकते हैं।

- तुलसी के पत्तों को अदरख एवं काली मिर्च के साथ हलके गुनगुने पानी में मिलाकर लगातार चाय के रूप में सेवन करने से नजला-जुखाम से राहत मिलती है।

- गिलोय के डंठल को छोटा काटकर इसका रस निकालकर हल्दी के पाउडर के साथ समान मात्रा में मिलाकर आधा से एक चम्मच लगातार सेवन करने से एलर्जी से निजात मिलती है।

- आधा चम्मच सौंठ का शहद के साथ लगातार प्रयोग भूख को सामान्य कर इस ऋतु में होने वाले जोड़ों के दर्द के लिए अचूक औषधि है।

- त्रिकटु चूर्ण एवं अविपत्तिकर चूर्ण को समान मात्रा में मिलाकर लगातार गुनगुने पानी से आधा से एक चम्मच लेना गले के दर्द (टांसिल में सूजन) में हितकारी होता है।

- नीम के पत्ते का बारीक चूर्ण,गिलोय का चूर्ण एवं आंवले का चूर्ण समभाग या तीनों का ताजा रस निकालकर लगातार एक चम्मच सेवन करना रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढाता है।

- चिरायता,करेला,गिलोय,नागरमोथा,पित्तपापडा इन सबका स्वरस निकालकर आधे से एक चम्मच तक उम्र के अनुसार प्रयोग कराने से मौसमी बुखार में लाभ मिलता है।

- भोजन के पचने के बाद हरड,भोजन से पूर्व बहेड़ा एवं भोजन के तत्काल बाद आंवले का चूर्ण गुनगुने पानी के साथ नित्य सेवन करने से पेट की बीमारियाँ नहीं होती हैं तथा भूख एवं पाचन की प्रक्रिया सामान्य होती है।

- दूब घास का स्वरस, प्याज का स्वरस एवं अदरख का स्वरस मौसमी नकसीर (नाक से खून निकलना) के रोगियों के नाक में दो से चार बूँद टपका देने मात्र से चमत्कारिक लाभ मिलता है।

- हरड का इस ऋतू में अलग-अलग प्रयोग विभिन्न रोगों में अचूक लाभ देता है जैसे :चबाकर खाने से भूख खुलती है,पीसकर खाने से पेट साफ़ होता है, उबालकर खाने से संग्रहणी (कोलाईटिस) में लाभ मिलता है।

- बर्षा ऋतु में गरिष्ट भोजन कब्ज का कारण बनता है अतः त्रिफला चूर्ण का आधे से एक चम्मच लगातार सेवन कब्ज को दूर कर,पाईल्स के रोगियों में लाभ देता है।

काले घने बालों के लिए अचूक है यह देशी फंडा

बाजार में उपलब्ध मंहगे कंडीशनर का प्रयोग करके भी यदि विशेष फायदा न हुआ हो तो आप नीचे दी जा रही विधि का प्रयोग करके घर बैठे ही 100 फीसदी कारगर और सीघ्र असर दिखाने वाला कंडीशनर बना सकते हैं। अधिकांश लोग हैं जो अपने बालों की खूबसूरती और मजबूती के लिये कंडीशनर का प्रयोग करना चाहते हैं परंतु इसकी आसान विधि नहीं जानते।



यहां दी जा रही है डीप कंडीशनर की एक बेहद आसान विधि जिसे कोई भी आसानी से घर बैठे कर सकता है। आप आयुर्वेदिक डीप कंडीशनर का प्रयोग 20 दिन में एक बार करें। आप इस कंडीशनर को स्वयं घर पर झटपट बना सकते हैं तथा 20 मिनट में बालों की डीप कंडीशनिंग कर सकते हैं।



बनाने और लगाने की आसान विधि-



आधा कटोरी हरी मेहंदी पावडर लेकर इसमें गर्म दूध (गाय का) डालकर पतला लेप बना लें। इसी लेप में एक बड़ा चम्मच आयुर्वेदिक हेयर ऑइल डालें। इसे अच्छी तरह से मिला लें। जब यह लेप ठंडा हो जाए तब बालों की जड़ों में लगाएं। 20 मिनट छोड़कर आयुर्वेदिक शैंपू पानी में घोलकर बालों को धो लें। इस डीप कंडीशनर द्वारा आपके बालों को पोषण तो मिलेगा ही साथ ही उनमे बाउंस (लोच) भी आ जाएगा।

Sunday, June 26, 2011

क्या हाजमा ठीक नहीं रहता? ये रहे बेहद सरल नुस्खे

आयुर्वेद में इंसानी शरीर व मन से जुड़ी अधिकांस बीमारियों का प्रामाणिक व शर्तिया उपाया बताया जाता है। आइये देखते हैं ऐसे ही कुछ आयुर्वेदिक और घरेलू नुस्खे जो आपके पाचन तंत्र को सदा दुरुस्त रखने में बेहद मददगार होते हैं..

1. भोजन के एक घंटा पहले पंचसकार चूर्ण को एक चम्मच गरम पानी के साथ लेने से भूख खुलकर लगती है।

2. रात में सोते समय आँवला 3 भाग, हरड़ 2 भाग तथा बहेड़ा 1 भाग-को बारीक चूर्ण करके एक चम्मच गुनगुने पानी के लेने

  से सुबह दस्त साफ आता है एवं भूख खुलकर लगती है।

3. भोजन में पतले एवं हलके व्यंजनों का प्रयोग करने से खाया हुआ जल्दी पच जाता है, जिससे जल्दी ही भूख लग जाती है।

4. खाना खाने के बाद अजवायन का चूर्ण थोड़े से गुड़ के साथ खाकर गुनगुना पानी पीने से खाया हुआ पचेगा, भूख लगेगी और खाने में रुचि पैदा होगी।

5. भोजन के बाद हिंग्वष्टक चूर्ण एक चम्मच खाने से पाचन-क्रिया ठीक होगी।

6. हरे धनिए में हरी मिर्च, टमाटर, अदरक, हरा पुदीना, जीरा, हींग, नमक, काला नमक डालकर सिलबट्टे पर पीसकर बनाई चटनी खाने से भोजन की इच्छा फि र से उत्पन्न होती है।

7. भोजन करने के बाद थोड़ा सा अनारदाना या उसके बीज के चूर्ण में काला नमक एवं थोड़ी सी मिश्री पीसकर मिलाने के बाद पानी के साथ एक चम्मच खाने से भूख बढ़ती है।

8. एक गिलास छाछ में काला नमक, सादा नमक, पिसा जीरा मिलाकर पीने से पाचन-क्रिया तेज होकर आरोचकता दूर होती है।

9. भोजन के बाद 5-10 मिनिट घूमना पाचन में सहायक होता है।

10. भोजन करने के बाद वज्रासन में कुछ देर बैठना भी बेहद लाभदायक होता है।

मोटापा घटाने का यह बड़ा जायकेदार व अचूक

कहते हैं कि हर बुराई में कुछ न कुछ अच्छाई भी छुपी होती है। ऐसा ही कुछ चाय के साथ भी है। यदि हम आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा के सिद्धांतों को माने तो चाह हमारे स्वास्थ्य के लिये बेहद हानिकारक होती ैैहै। लेकिन चाय में तमाम खामियों के साथ ही एक बड़ी खूबी भी होती है और वह यह है कि चाय बढ़ते हुए वजन को कंट्रोल करने में बेहद मददगार होती है। यह बात एक हालिया वैज्ञानिक शोध से पता चली है।

शोध से ज्ञात हुआ है कि चाय में एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जो वजन कम करने में सहायक होते हैं। लेकिन हाल ही में हुई  एक नई रिसर्च के मुताबिक अगर चाय में दूध मिला दिया जाए तो मोटापे से लडऩे वाले तत्त्व उतने प्रभावकारी नहीं रहते। भारतीय वैज्ञानिक की ओर से की गई रिसर्च के मुताबिक चाय में वसा कम करने के कई तत्त्व होते हैं, लेकिन दूध में पाया जाने वाला प्रोटीन वसा कम करने की इसकी क्षमता को प्रभावित कर सकता है।

चाय में पाए जाने वाले फ्लेविन्स और थिरोबिगिन्स शरीर की चर्बी घटाने और कोलेस्ट्रॉल कम करने में सहायक होते हैं। असम की टी रिसर्च एसोसिएशन के रिसर्चरों ने चूहों पर शोध किया और उसमें यह पाया गया कि उच्च वसायुक्त भोजन खाने वाले चूहों का वजन घटाने में फ्लेविन्स और थिरोबिगिन्स जैसे तत्वों ने काफी अहम भूमिका निभाई। लेकिन गाय के दूध में प्रोटीन की मात्रा अधिक होने के कारण इनका प्रभाव कम हो जाता है।

Friday, June 24, 2011

जानिये फौलादी तंदुरुस्ती के सारे देशी फंडे


हम सब अपने शरीर और मष्तिस्क को पूरी तरह से स्वस्थ रखने में कामयाब नहीं हो पाते हैं।  क्योंकि हमने कई प्रकार कि  अनावश्यक चिंताओं और गलत आदतों से अपने आप को घेर रखा है। यह विज्ञान के द्वारा स्थापित तथ्य है कि ज्यादा चिंता करने वालों का तन्त्रिका तंत्र अधिक सक्रीय होता है, जो शरीर के विभिन्न अंगो में रक्त कि मात्रा को असंतुलित कर देता है। इससे ह्रदय की गति जरूरत से ज्यादा तेज हो जाती है।

यदि ऐसी स्थिति ज्यादा समय तक बनी रहे तो, धीरे-धीरे शरीर के अंगो को कमजोर कर देती है, जिससे कई रोग हमारे शरीर को घेर लेते हैं। अत: ऐसी स्थिति से बचने का तरीका क्या है? तथा किन उपायों और अच्छी आदतों से अपने शरीर ओर दिमाग को स्थाई रूप से स्वस्थ रखें आइये जाने....

- नियमित रूम से प्राणायाम करें, प्राणायाम आपके मष्तिस्क को शांत, संतुलित और विषय पर केन्द्रित करता है। प्राणायाम मस्तिष्क को हानिकारक तत्वों से बचाता है।

- प्राणायाम के दौरान गहरी सांस लेने से मष्तिष्क की कोशिकाओ में रक्त प्रवाह बढ जाता है, जो उन्हें स्वस्थ बनता है।

- कम से कम 30 मिनट प्रतिदिन आत्मचिंतन करें, आत्मचिंतन से जीवन को दिशा मिलती है, मष्तिष्क संतुलित और  दिशामान होता है, तथा आपको परिस्तिथियों का सामना करने कि हिम्मत मिलती है।

- हमेशा संतुलित शाकाहारी आहार ग्रहण करें, आप जैसा खाते हंै वैसे ही बन जाते हैं, अच्छा आहार न केवल आपके दिमाग को स्वस्थ रखेगा बल्कि आपके विचारों को भी सकारात्मक बनाएगा। शाकाहारी भोजन आपमें अहिंसा कि भावना को जगायेगा और आपको दृढनिश्चयी बनाएगा।

- अच्छे लोगों के साथ में रहे, अच्छी किताबें पड़े तथा अच्छी बातें सोचने का प्रयत्न करें। अपने दिमाग में अच्छे और सकारात्मक विचार रखने वाले लोगों का दिमाग ज्यादा तेज और चुस्त होता है, तथा इस तरह के दिमाग में चिंता घर नहीं कर पाती।

- आपका दिमाग एक मांसपेशी की तरह होता है। जैसे आपकी मांसपेशीयों को मजबूत बनाने के लिए नियमित रूप से वजन उठाना पड़ता है, उसी तरह दिमाग को स्वस्थ रखने के लिए अच्छे विचारों को नियमित रूप से सोचना पड़ता है, अपने दिमाग का नियमत रूप से सौष्ठव करें, तथा बिमारियों को अपने से दूर रखें।

ये उपाय आसान और व्यावहारिक हैं जो आपके मष्तिष्क को स्वस्थ रखने में आपकी सहायता करेंगे, इनके साथ-साथ आपको ये ध्यान देना है कि आप नियमित रूम से व्यायाम करते रहें। ये जीवन का शाश्वत सत्य है की मष्तिष्क और शरीर एक दूसर के पूरक हैं।

विशेष- बुरी आदतों से बचना और शारीरिक श्रम करने का कोई और विकल्प नहीं है, इनके बिना आप सम्पूर्ण स्वास्थ्य को नहीं पा सकते।

Thursday, June 23, 2011

इस चमत्कारी आम को खाने के हैं-फायदे ही फायदे


आम को फलों का राजा वैसे ही नहीं कह दिया गया है। या कोई कह दे कि ऐसा करने में आम क बगीचे वालों की कुछ साजिश रही होगी। आम को फलों का राजा कह देने में अन्य फलों के साथ कोई भेदभाव या पक्षपात नहीं किया गया है। असल में आम है ही इस लायक कि उसे फलों का राजा बना दिया जाए। आम के अद्भुत और अनमोल गुणों को जानकर आप को भी उसे फलों का राजा मानने में कोई आपत्ति नहीं होगी।

आयुर्वेद, प्राकृतिक विज्ञान और वनस्पति शास्त्र ने विश्लेषणों के आधार पर फलों के राजा आम के दुर्लभ गुणों का वर्णन कुछ इस प्रकार से किया गया है....

- पका आम खाने से शरीर में सातों धातुओं-  रस, रक्त, मांस, मेद, अस्थि, मज्जा और वीर्य  की वृद्धि होती है।

- पका आम दुबले पतले बच्चों, वृद्धों व कमजोर लोगों को पुष्ट बनाने हेतु सर्वोत्तम औषधी का काम करता है।

- पका आम चंूसकर खाना आंखों के लिए बेहद फायदेमंद है।

- यह उत्तम प्रकार का हृदयपोषक है तथा शरीर में छुपे हुए विष को बाहर निकालता है।

- यह वीर्य की शुद्धि एवं वृद्धि करता है।

- शुक्रप्रमेह आदि विकारों और वातादि दोषों के कारण जिनको संतानोत्पत्ति न होती हो उनके लिए पका आम लाभकारक है। - इसके सेवन से शुक्राल्पताजन्य नपुंसकता, दिमागी कमजोरी आदि रोग दूर होते हैं।

विशेष-जिस आम का छिलका पतला एवं गुठली छोटी हो, जो रेशारहित हो तथा जिसमें गूदा अधिक हो, ऐसा आम मांस धातु के लिए बेहद उपयोगी है।

सफेद दाग, मस्से और तिल... जानें इन सबके राज और इलाज

शरीर की त्वचा में कई प्रकार के चर्म रोग या स्किन संबंधी समस्याएं हो जाजी हैं। इस तरह की समस्याएं अच्छे भले व्यक्ति की खूबसूरती को बिगाड़ कर रख देती हैं। इन त्वचा संबंधी समस्याओं या बीमारियों के बारे में सही और वैज्ञानिक जानकारी होना, खुद हमारे और और हमारे अपनों के लिये बेहद जरूरी होता है। आइये जानते हैं कि त्वचा की प्राकृतिक सुन्दरता को बिगाडऩे वाली प्रमुख समस्याएं कौनसी हैं और उनका समाधान कैसे हो सकता है...

सफेद दाग

यह दूधिया सफेद रंग का दाग होता है । इसे ल्यूकोडर्म कहते है इसका इलाज काफी लंबा चलता है इसके इलाज के लिए अल्ट्रावायलेट लैम्प का इस्तेमाल करते है। आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा के प्रयोगों से भी इससे छुटकारा पाया जा सकता ैहै।

सोरिएसिस

सामान्य भाषा में इसे अपरस कहते है इसमें शरीर के किसी भी भाग में चमडी छिलके के रूप में निकलती है इसका इलाज भी अल्ट्रावायलेट लैम्प के द्वारा होता है।

मस्से

ये 8 से 10 प्रकार के होते हैं। इसमें से कुछ छूत के भी होते हंै इसका इलाज केमिकल कान्ट्री इलेक्ट्रोकान्ट्री मशीन द्वारा व काय कान्ट्री और रेडियोंकान्ट्री द्वारा किया जाता है।

तिल

यह मस्से से अलग होते हंै यह काले रंग के छोटे-छोटे दाने के समान होते हंै। इसका इलाज रेडियोंकान्ट्री व कास्मेटिक सर्जरी द्वारा किया जाता है ।

सनटैनिंग

कुछ लोगों के चेहर व शरीर के खुले भाग में धूप में धूमने के कारण शरीर का वह भाग काला हो जाता है । यह दवाइयों के द्वारा ठीक किया जा सकता है। आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा के प्रयोगों से भी इससे छुटकारा पाया जा सकता है।

एलर्जी

कई बार कुछ हानिकारक सौन्दर्य प्रशाधनों, आर्टिफि शियल गहनों या कुछ हानिकारग मिलावटी वस्तु खाने से एलर्जी हो जाती है। कुछ लोगों में एलर्जी के कारण शरीर में लाल-लाल चकते निकल जाते हैं। जिन्हे अर्टीकेरिया कहते हंै।

एक्जिमा

यह भी चमडी में होने वाली एक प्रकार की एलर्जी है। इसमें चमडी मोटी हो जती है व उसमें खुजली होती है। आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा के प्रयोगों से भी इससे छुटकारा पाया जा सकता है।

छीला

यह शरीर में होने वाली विशेष प्रकार का फं गल इंफेकशन है जिसमें गर्दन, चेहरे व पीठ में हल्के पीले रंग के दाग हो जाते है। आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा के प्रयोगों से भी इससे छुटकारा पाया जा सकता है।

पसीने में बदबू

कुछ व्यक्तियों के पसीने में काफी तेज बदबू होती है। पेट साफ  नहीं होने, लहसुन, प्याज के ज्यादा सेवन से भी पसीने में बदबू होने की समस्या हो सकती है । बगल के बाल साफ  रखें, शारीरिक सफाई का बहुत ध्यान रखें, नियमित व्यायाम करे, पानी ज्यादा पीयें।

Wednesday, June 22, 2011

सिर्फ एक चम्मच यह पाउडर गटकें और हो जाएं टेंशन फ्री

गर्मी की तपन और चिपचिप से राहत दिलाने वाली झमाझम बारिश की शुरुआत हो ही गई। सेहत के लिहाज से यह मौसम काफी संवेदनशील होता है। इसीलिये दुनिया की सबसे प्राचीन चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद में बर्षा काल में बीमारियों से बचने के लिये कुछ बेहद महत्वपूर्ण सावधानियां बताई गईं हैं।

बारिश में पानी की स्वच्छता पर खाश ध्यान दें। पानी द्वारा पैदा होने वाले पेट की बीमारियां जैसे- अतिसार, प्रवाहिका एवं हैजा जैसी बीमारियों से बचने के लिए पानी को उबालें, आधा जल जाने पर उतार कर ठंडा होने दें, तत्पश्चात् हिलाये बिना ही ऊपर का पानी दूसरे बर्तन में भर दें एवं उसी पानी का सेवन करें।

पानी को उबालकर ठंडा करके पीना सर्वश्रेष्ठ उपाय है।

आजकल पानी को शुद्ध करने हेतु कई तरह के इलेक्ट्रानिक फि ल्टर भी प्रयुक्त किये जाते हैं। उनका भी उपयोग कर सकते हैं। पीने के लिए और नहाने के लिए गंदे पानी का उपयोग बिल्कुल न करें क्योंकि गंदे पानी के सेवन से उदर व त्वचा सम्बन्धी व्याधियां पैदा हो जाती हैं।

विशेष:

500 ग्राम हरड़ और 50 ग्राम सेंधा नमक के मिश्रण का पाउडर बनाकर प्रतिदिन 5-6 ग्राम लेने से अनजाने या मजबूरी में पीए गए गंदे पानी का प्रभाव अधिकांशत: निष्प्रभावी हो जाता है।

Tuesday, June 21, 2011

झुर्रियों के प्राकृतिक उपाय

उम्र बढ़ने के अलावा सूरज की तेज रोशनी, प्रदूषण, धूम्रपान, तनाव, वजन कम होना और शरीर में विटामिन ई की कमी के कारण असमय ही त्वचा पर झुर्रियां पड़ने लगती हैं। आइए जानते हैं कुछ ऐसे उपाय, जो प्राकृतिक रूप से त्वचा को झुर्रियांे से मुक्त कर सकती है।

अंडे की जर्दी: अंडे का सफेद हिस्सा चेहरे पर लगाने से झुर्रियों से निजात मिलती है। आंखों के नीचे और माथे की त्वचा पर मौजूद झाइयों से यह प्राकृतिक तरीके से मुक्ति दिलाता है। इसे गर्दन पर भी लगाना चाहिए। अंडे में भरपूर प्रोटीन, विटामिंस और मिनरल्स होते हैं।

पपीता: नहाने से पहले चेहरे और गर्दन पर पपीते का टुकड़ा रगड़ने से त्वचा कोमल होती है। इसमें मौजूद पापेन नामक तत्व त्वचा की मृत कोशिकाओं को हटाने और नई कोशिकाओं को विकसित करने में सहायक होता है।

केला: चेहरे व गर्दन पर केले का छोटा-सा टुकड़ा हफ्ते में एक बार रगड़ना चाहिए। यह विटामिंस से भरपूर होता है, जिससे त्वचा जवां दिखती है और झुर्रियों से सुरक्षित रहती है।
अनानास: इसे त्वचा पर लगाने से झुर्रियों से मुक्ति मिलती है, लेकिन रूखी त्वचा के लिए यह कारगर नहीं है। डिहाइड्रेट त्वचा कांतिहीन दिखती है, इसलिए भरपूर पानी पीना ही एक मात्र उपाय है।
जूस: फेस पैक तैयार करते समय उसमें पानी की बजाय नींबू, गाजर या ककड़ी का रस मिलाएं। यह तरीका अधिक फायदेमंद साबित होगा।

मसाज: जैतून, बादाम या नारियल के तेल से चेहरे की मसाज भी की जा सकती है। इसमें विटामिन ई होने से त्वचा का तेज बरकरार रहता है। वहीं मृत कोशिकाओं से मुक्ति भी मिलती है।
हल्दी: इसके पाउडर में गन्ने का रस मिलाकर तैयार पेस्ट लगाने से त्वचा में कसावट आती है। यह झुर्रियां दूर करने के साथ ही त्वचा निखारने में भी सहायक है। वहीं हल्दी की एंटीबैक्टीरियल प्रॉपर्टी त्वचा विकारों को भी दूर करती है।

किस समय उठने से आपकी उम्र हो जाएगी 100 साल!


किस समय उठने से आपकी उम्र हो जाएगी 100 साल!

लंबी उम्र की कामना सभी करते हैं, मरना कोई नहीं चाहता। इसी वजह से हर व्यक्ति अपने स्वास्थ्य की चिंता करता है। अच्छा स्वास्थ्य प्राप्त के लिए कई उपाय बताए गए हैं। इन्हीं में से एक है सुबह जल्दी उठना।



शास्त्रों में सुबह जल्दी उठना अनिवार्य बताया गया है। ब्रह्म मुहूर्त में उठने से हमारा स्वास्थ्य तो ठीक रहता है साथ ही इसका वैदिक महत्व भी है। इस संबंध में शास्त्रों में लिखा है-



ब्राह्मे मुहूर्ते या निद्रा सा पुण्यक्षयकारिणी।

तां करोति द्विजो मोहात् पादकृच्छेण शुद्धयति।।



इस श्लोक का अर्थ है कि ब्रह्म मुहूर्त में सोना पुण्य का नाश करता है और पाप को बढ़ाता है। जो भी व्यक्ति इस समय सोता है उसके पापों प्रभाव कम करने के लिए पादकृच्छ नाम का व्रत करना पड़ता है। लंबी आयु तथा स्वस्थ शरीर के लिए सूर्योदय के डेढ़ घ्ंाटे पहले जाग जाना चाहिए।



सूर्योदय से पहले उठने से महालक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है और ऐसे व्यक्ति को जीवन में कभी भी आर्थिक परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता। ब्रह्म मुहूर्त में उठकर पूजन-कर्म करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है, जीवन सुखी होता है। दिनचर्या संयमित हो जाती है। सही समय पर खाना और सोना होगा तो निश्चित है व्यक्ति की उम्र लंबी और शरीर स्वस्थ रहेगा।

Monday, June 20, 2011

चहरे पर दाग, निशान या झाइयां....करें सबका सूपड़ा साप

चेहरे पर दाग-धब्बे, झाइयां या किसी भी प्रकार के अनचाहे निशान किसी को भी हेरान-परेशान कर सकते हैं। झाइयां, दाग-धब्बे या बदरंगे निशान सुन्दर या रूपवान चेहरे को भी अनाकर्षक और बदसूरत बना सकते हैं। बढ़ती उम्र, प्रदूषित वातावरण,गलत खान-पान, अप्राकृतिक जीवनशैली या किसी बीमारी के प्रभाव से इस तरह की समस्या हो सकती है।

भोजन में पोषक तत्वों की कमी से खून में विटामिन्स, प्रोटीन्स या दूसरी किसी कमी से भी ऐसी दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है। तेज धूप के कारण या चेहरे पर किसी हानिकारक केमीकल्स से बनी सुगंधित क्रीम के लगाने से भी किसी-किसी को ऐसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। महिलाओं को माहवारी की अनियमितता व हार्मोन की गडबड़ी के कारण भी चेहरे पर झाइयां हो जाती हंै।

इस तरह की तमाम समस्याओं से छुटकारा पाने का एक बेहद आसान घरेलू उपाय भी हो सकता है। आइये जानते हैं ऐसे ही एक प्रयोग के बारे में...

प्रयोग

एक चम्मच मलाई में दो पत्ती केसर एक धंटे तक रहने दे, जब उसका रंग संतरे के रंग के समान हो जाए तो उसको चेहरे पर झॅाई, दाग-धब्बे, या निशान वाले भाग पर लगा कर 5 से 10 मिनट हल्के हाथ से मसाज करें और फिर लगभग 30 मिनट तक रहने दे और फिर सादे पानी से धो लें। लगातार 7 दिनोंतक इस प्रयोग को करने से 8 वें दिन से इस तरह की अधिकांश समस्याओ से मुक्ति पा सकते हैं।

16 दिनों में फोड़े-फुंसियों का काम तमाम! ये हैं दादी के नुस्खे

फोड़े-फुंसियों या दाद-खाज खुजली जैसी चमड़ी की बीमारियों को पीछे प्रमुख रूप से रक्त का दूषित होना होता है। जब शरीर का खून दूषित यानी गंदा हो जाता है तो कुछ समय के बाद उसका प्रभाव बाहर त्वचा पर भी नजर आने लगता है। प्रदूषण चाहे बाहर का हो या अंदर का वो हर हाल में अपना दुष्प्रभाव दिखाता ही है। बाहरी और भतरी प्रदूषण ने मिलकर हमारे शरीर की प्राकृतिक खूबसूरती को छीनकर कई सारे त्वचा रोगों को जन्म दिया है फोड़े- फुंसियां भी उन्हीं में से एक हैं।

आज दुनिया का हर दूसरा व्यक्ति चमड़ी से जुड़े किसी न किसी रोग से जूझ रहा है। खुजली, जलन, फुंसियां, घमोरियां, दराद, लाल-सफेद चकत्ते... जैसी कई समस्याएं हैं जिनसे हर कोई परेशान है या कभी न कभी रह चुका है। कई बार छूत से यानी इनसे संक्रमित व्यक्ति के सम्पर्क में आने पर खुद को भी संक्रमण लगने से भी फोड़े- फुंसी या खुजली जैसी कोई त्वचा संबंधी समस्या हो सकती है। 

यहां हम कुछ ऐसे घरेलू उपाय दे रहे हैं जो बर्सों से आजमाए और परखे हुए हैं। ये नुस्खे कारगर तो हैं ही साथ ही इनकी सबसे बड़ी खाशियत यह है कि इनका कोई साइड इफेक्ट भी नहीं है, ऊपर से ये हैं भी बहुत ही सस्ते..

- जब तक समस्या से पूरी तरह से छुटकारा नहीं मिल जाता मीठा यानी शक्कर से बनी, बासी, तली-गली और अधिक मिर्च-मसालेदार चीजों को पूरी तरह से छोड़ दें।

- फोड़े-फुंसी, दराद या खुजली वाले स्थान पर मूली के बीज पानी में पीस कर गरम करके लगाने से तत्काल लाभ होता होगा।

- नीम की पत्तियों को पीस कर फोड़े-फुंसी, दराद या खुजली वाले स्थान पर लगाने और पानी के साथ पीने से बहुत सीघ्र लाभ होता है।

- पालक, मूली के पत्ते, प्याज, टमाटर, गाजर, अमरुद, पपीता आदि को अपने भोजन में नियमित रूप से शामिल करें।

- सुबह खाली पेट चार-पांच तुलसी की पत्तियां चूंसने से भी त्वचा रोगों में स्थाई लाभ होता है।

- पानी अधिक से अधिक पीएं।

- सुबह उठकर 2 से 3 किलो मीटर घूमने के लिये अवश्य जाएं ताकि आपके शरीर और रक्त को शुद्ध ताजा हवा मिल सके और शरीर का रक्त प्रवाह भी सुधर सके।

Sunday, June 19, 2011

पेट की चर्बी झटपट कम होती है इससे

आजकल अंसतुलित खाने के बढ़ते प्रचलन के चलते अधिकांश लोगों को अत्यधिक चर्बी की समस्या रहने लगी है। हेल्थ के प्रति सावधान न रहने के कारण यह समस्या धीरे-धीरे बड़ा रूप ले लेती है और मोटापा बढ़ जाता है।

मोटापे की वजह से हमारे स्वास्थ्य को कई खतरनाक बीमारियों का खतरा सदैव बना रहता है। मोटापे को जल्द से जल्द कम करने के लिए योग क्रिया की मदद ली जा सकती है। ऐसी ही एक क्रिया है कपाल भाति, जिससे निश्चित ही मोटापे पर नियंत्रण किया जा सकता है।

क्रिया करने की विधि:

समतल स्थान पर साफ टॉवेल या अन्य कपड़ा बिछाकर अपनी सुविधानुसार आसन में बैठ जाएं। बैठने के बाद पेट को ढीला छोड़ दें। अब तेजी से सांस बाहर निकालें और पेट को भीतर की ओर खींचें। सांस को बाहर निकालने और पेट को पिचकाने के बीच सामंजस्य रखें। प्रारंभ में दस बार यह क्रिया करें, धीरे-धीरे 60 तक बढ़ा दें। बीच-बीच में विश्राम ले सकते हैं। इस क्रिया से फेफड़े के निचले हिस्से की प्रयुक्त हवा एवं कार्बन डाइ ऑक्साइड बाहर निकल जाती है और सायनस साफ  हो जाती है साथ ही पेट पर जमी फालतू चर्बी खत्म हो जाती है।

सावधानियां:

- श्वास संबंधी बीमारियों से ग्रसित व्यक्ति इस क्रिया को ना करें।

- कपाल भाति क्रिया प्रात: काल खाली पेट ही करें।

- किसी योग विशेषज्ञ की सलाह लेकर ही करें।

थोड़ा सा गुड़ और गायब हो जाएगा आधे सिर का दर्द


देहाती नुस्खे...जो ब्लड प्रेशर को जड़ से मिटाते हैं

ब्लड प्रेशर आज एक आम बीमारी का रूप अख्तियार करती जा रही है। कुछ सालों पहले तक इसके बारे में कभी कभार ही सुनने को मिलता था लेकिन अब तो यह सर्दी-खांसी जैसी कॉमन समस्या बन चुकी है। गांवों में तो लो-बीपी या हॉय-बीपी जैसी किसी बला से लोग लगभग अनजान  ही थे। जबकि आज तस्वीर ही बदल चुकी है, क्या गांव और क्या शहर सभी जगह एक जैसे हालात हैं। बड़े-बूढ़ों में पाए जाने वाली यह समस्या अब जवानों और यहां तक कि बच्चों के गले का हार बल चुकी है।

ब्लड प्रेशर से छुटकारे के लिये हम आधुनिक चिकित्सा की मदद तो लेते ही हैं, साथ ही अगर कुछ देहाती या घरेलू नुस्खों की भी मदद ली जाए जो कि अनुभव की कसोटी पर 100 फीसदी खरे तो हैं ही साथ ही इनका कोई साइड इफेक्ट भी नहीं हैं। तो आइये देखते हैं ऐसे ही कुछ बेहद आसान घरेलू नुस्खे तो ब्लड प्रेशर को खत्म करने में बेहद कारगर हैं...

1.एक दिन उपवास, दो दिन रसाहार, चार-पांच दिन फलाहार जो कि दिन में दो तीन बार दिया जाए। एक समय में एक ही प्रकार का फल देना ठीक है, प्रयाग के दोरान दोनों समय एनीमा भी लेना चाहिए।

2.दिन में दो चार बार छोटे चम्मच भर शहद पानी के साथ नियमिन रूप से लें। प्रयोग के दोरान धीमी गति से टहलना लाभकारी होता है।

3.स्वस्थ होने पर एक वक्त शब्जी-रोटी, दूसरे समय फल दूध का भोजन लेना चाहिए।

विशेष

पेट की सफाई के लिये एनीमा लेने और उपवार की सही व्यवस्था करने के लिये किसी आयुर्वेदिक या प्राकृकित चिकित्सक की मदद लेना चाहिये।

Friday, June 17, 2011

जोड़ों में कैसा भी दर्द हो दादी के नुस्खे अचूक हैं

अप्राकृतिक जीवनशैली ने शरीर की दंतुरुस्ती को बुरी तरह से प्रभावित किया है। प्रगति और विकास के नाम पर इंसान ने भले ही सुख-सुविधा के ढेरों-ढेर साधन जुटा लिये हों लेकिन इस पाने के एवज में जो खोया है वह उससे भी ज्यादा कीमती था। चारों तरफ तेजी से फेलते प्रदूषण और नैतिक ह्रास से आधुनिक इंसान शारीरिक और मानसिक दोनों ही स्तरों पर कमजोर और खोखला होता जा रहा है।

हर दिन सैकड़ों नई बीमारियां पैदा हो रही हैं। चिकित्सा विज्ञान जब तक एक रोग का इलाज खोज पाता है, तब तक चार नए रोग सीना तान कर खड़े हो जाते हैं। जोड़ों का दर्द हो भी गलत खान-पान और प्रदूषण के दुष्प्रभाव का ही एक नतीजा है। असल में हमार शरीर इस प्रकृति का ही एक हिस्सा है। इसलिये शरीर से जुड़ी समस्याओं का समाधान भी हमें प्रकृति की गोद में ही मिल सकता है। आइये देखते हैं कि अपने अनुभवों के खजाने में से दादी मां जोड़ों के दर्द का क्या समाधान बताती है....

- सरसों के तेल में चुटकीभर हल्दी मिलाकर धीमी आंच पर गर्म कर लें। इस तेल के ठंडा होने पर शरीर के सभी जोड़ों पर  इसकी हल्की मसाज करें। सुबह की नर्म धूप में यह प्रयोग करने पर सीघ्र लाभ मिलता है। मसाज के बाद शरीर को तत्काल ढक लें हवा न लगने दें अन्यथा लाभ की बजाय हानि भी हो सकती है।

- अजवाइन को तवे के ऊपर थोड़ी धीमी आंच पर सेंक लें तथा ठंडा होने पर धीरे-धीरे चबाते हुए निगल जाएं। लगातार 7 दिनों तक यह प्रयोग किया जाए तो आठवे दिन से  ही जोड़ों के दर्द या कमर दर्द में 100 फीसदी लाभ होता है।

- जहाँ दर्द होता होता है हो वहाँ 5 मिनट तक गरम सेंक, और दो मिनट ठंडा सेंक देने से तत्काल लाभ पहुंचता है।

विशेष:

अपनी क्षमता के अनुसार सुबह के समय आसन विशेषकर सूर्य नमस्कार और प्राणायाम करने से जोड़ों के दर्द से स्थाई रूप से छुटकारा पाया जा सकता है।

पेट हो दुरुस्त.... तो आप रहेंगे दिनभर मस्त, ये रहे अचूक नुस्खे


दिमाग वाले डिपार्टमेंट मे मन और शरीर वाले विभाग में पेट ये दो ही प्रमुख केन्द्र हैं। यदि किसी तरह चाहे कुशलता से, सावधानी, संयम से या ज्ञान से... जिस भी तरीके से यदि इन दोनों केन्द्रों को नियंत्रित और दुरुस्त किया जा सके तो इंसान का पूरा का पूरा व्यक्तित्व ही विकसित और सतेज बन सकता है।

यह सभी के अनुभव की बात है कि यदि शरीर चुस्त-दुरुस्त हो तो इंसान का मन-मस्तिष्क भी पूरी तरह से सक्रिय ओर सतेज बना रहता है। हमारे शरीर में पेट एक ऐसा केन्द्र है जिसको यदि किन्हीं उपायों से फिट-फाट रखा जा सके तो शरीर और मन दोनों जोश और उत्साह से भरपूर रहते हैं। आइये जाने उन बेहद सरल घरेलू उपायों को जो कब्जियत को तो जड़ से मिटाते ही हैं साथ ही पेट के पहले जैसे प्राकृतिक स्वरूप को भी फिर से लोटाते हैं....

1. गलत समय पर गलत खान-पान के चक्कर में व्यक्ति आए दिन कब्ज़ से परेशान रहता है, इससे बचने के लिए त्रिफला  यानी हरड़, बहेड़ा और आंवला के मिक्सर चूर्ण को लगातार 6 माह तक बराबर पानी के साथ सोते समय लेने से कब्ज़ की परेशानी हमेशा के लिये दूर हो जाती है।

2. जो रोगी काफी कमजोर हो या बालक हो तो आंवला पीस कर नाभि के चारों और दीवाल सी बना दो, उसी के भीतर अदरक का रस भर दो, दो घंटे रोगी को लेटा रहने दो, जुलाब की बगैर किसी तेज हानिकारक दवाई के ही महीनों पुराना सारा मल साफ हो जाता है।

3. सुबह खाली पेट गुनगुने गर्म पानी में एक चुटकी काला नमक डालें और उसे पीकर 15 मिनट तक घूम लें कब्ज में अवश्य ही राहत मिलेगी।

4. भोजन में काला नमक, आधा नीबू, सिका जीरा, हींग, और मौसम के अनुसार उपलब्ध सलाद को शामिल करने से कब्ज और पेट की दूसरी तमाम समस्याओं से स्थाई रूप से छुटकारा पाया जा सकता है।

Thursday, June 16, 2011

त्वचा से जुड़ी हर समस्या हो जाएगी नौ दो ग्यारह!


प्रदूषण का क्षेत्र अब सीमित नहीं रहा। उसने हर दिशा और क्षेत्र में अपने पैर पसार लिये हैं। जहां-जहां तक इंसान की पहुंच है वहां पर उसके पीछे-पीछे ही प्रदूषण भी पहुंच ही जाता है। हवा, पानी और जमीन का हर कोना इसके चगुंल में आ चुका है। प्रदूषण ने ही इंसानी शरीर को आज कई बीमारियों में जकड़ रखा है। जिनमें से कुछ के बाकायदा प्रचलित नाम हैं तो कुछ का नामकरण संस्कार अभी होना बचा है।

प्रदूषण ने ही हमारे शरीर की प्राकृतिक खूबसूरती को छीनकर कई सारे त्वचा  रोगों को जन्म दिया है। आज दुनिया का हर दूसरा व्यक्ति चमड़ी से जुड़े किसी न किसी रोग से जूझ रहा है। खुजली, जलन, फुंसियां, घमोरियां, दराद, लाल-सफेद चकत्ते... जैसी कई समस्याएं हैं जिनसे हर कोई परेशान है या कभी न कभी रह चुका है। यहां हम कुछ ऐसे घरेलू उपाय दे रहे हैं जो बर्सों से आजमाए और परखे हुए हैं। ये नुस्खे कारगर तो हैं ही साथ ही इनकी सबसे बड़ी खाशियत यह है कि इनका कोई साइड इफेक्ट भी नहीं है, ऊपर से ये हैं भी बहुत ही सस्ते..

1. नीम की पत्तियों को पीस कर पानी के साथ पीना बहुत लाभकारी होता है।

2. खुजली होने पर मूली के बीज पानी में पीस कर गरम करके लगाने तत्काल लाभ होता है।

3. पालक, मूली के पत्ते, प्याज, टमाटर, गाजर, अमरुद, पपीता आदि खाने से बहुत जल्दी लाभदायक नतीजे प्राप्त होते हैं। 4. सुबह खाली पेट चार-पांच तुलसी की पत्तियां चूंसने से भी त्वचा रोगों में स्थाई लाभ होता है।

सिर्फ 2 काम रोज, नहीं पड़ेंगे कभी बीमार


सूर्य किरणों के इंसानी जीवन पर पडऩे वाले प्रभावों के विषय में हालिया रिसर्च के नतीजे काफी महत्वपूर्ण बातें बताते हैं। रिसर्च के नतीजे कहते हैं यदि कोई भी व्यक्ति जीवन भर सिर्फ इन दो उपायों को करता रहे तो उसके शारीरिक और मानसिक रूप से बीमार या कमजोर पडंने की संभावना लगभग न के बराबर रह जाती है ये सूर्य से जुड़े ये उपाय हमारे इम्यून सिस्टम को बेहद मजबूत बना देते हैं...

- उगते हुए सूरज की किरणों का शरीर से ज्यादा से ज्यादा स्पर्श होने दें। ऐसा करते हुए मार्निग वॉक, आसन, ध्यान या प्राणायाम करने से लाभ और भी अधिक बढ़ जाता है।

- सप्ताह में कम से कम 2 दिन धूप स्नान करें यानी सुबह की सूर्य किरणों के साथ नहाएं इससे आपके शरीर और मन की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी।

पेट ठीक रहता है तथा भूख खुलकर लगती है... उपाय यह है

किसी भी व्यायाम में ऐसी व्यवस्था नहीं है कि पेट के सभी तंत्रों को कुछ क्षण के लिए आराम दिया जा सके। पेट की संपूर्ण पेशियों की मालिश भी प्राकृत रूप से हो जाती है। जिनको कब्ज या पेट से जुड़ी दूसरी कोई समस्या हो, उनके लिए यह उड्डीयन बन्ध सबसे अधिक लाभदायक और तुरंत असर दिखाने वाला अचूक उपाय है। यह एक यौगिक क्रिया है जिसके लिये धैर्य और अभ्यास की जरूरत अवश्य पड़ती है।

उड्डीयन बंध की विधि

सबसे पहले कंबल या दरी बिछाकर पद्मासन में बैठ जाएं। पेट के अंदर की सारी वायु निकाल दें और पेट को अंदर की ओर खलाएं। जब पेट अंदर चला जाए, तो नाभि के नीचे के के भाग को सिकोड़ें। इसप्रकार महाप्राचीरा ऊपर को उठेगी और नाभि के अंग पेडू और गुप्तांग के आसपास की पेशियों का शिथलीकरण हो जाए। घुटनों को थोड़ा मोड़ें और दोनों घुटनों पर रखें। सांस बाहर निकाल दें।

अब घुटनों पर जोर देते हुए पेट को अंदर की तरफ खीचें जिससे पेट में गड्ढा सा बन जाए। इस स्थिति के बाद नाभि के नीचे के भाग पेड़ू और गुप्तांग के चारों ओर की पेशियों को ऊपर की ओर तानें। इस प्रकार उदर, पेडू और नीचे की पेशियों का शिथलिकरण हो जाएगा। इसी स्थिति में रहकर पेट का तनाव कम कर दें और धीरे-धीरे सांस अंदर जाने दें। यह पूर्ण उड्डीयन की स्थिति होगी। जबतक सांस सरलता से रोक सके, उतनी ही देर खलाने की क्रिया जारी रखें। जब यह महसूस होने लगे की अब सांस नहीं रुकेगी तो धीरे-धीरे अंदर की ओर सांस भरना शुरू करें।

सावधानी:

हाई ब्लड प्रेशर के रोगी इस बंध को ना करें। योग और प्राकृतिक चिकित्सा के किसी अनुभवी जानकार व्यक्ति के मार्गदर्शन में यह क्रिया करें तो आप किसी भी तरह की असुविधा से बचे रहेंगे।

उड्डीयन बंध के फायदे:

इस बंध से पेट के सभी तंत्रों की मालिश हो जाती है। पाचन शक्ति बढ़ती है। कुण्डलिनी जागरण में यह बंध महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि किसी व्यक्ति को कब्ज की समस्या है तो उसे यह बंध नियमित करना चाहिए। साथ ही इस बंध से भूख बढ़ती है एवं पेट संबंधी कई रोग दूर होते हैं।

अंगूठे और अंगुली का कमाल! दिमाग बनेगा सुपर कम्प्यूटर




हमने कई बार अधिकांश लोगों को यह कहते हुए सुना है कि दिमाग नहीं चल रहा। और कई बार खुद हमने भी ऐसा अनुभव किया है हमारा दिमाग ठीक से कार्य नहीं कर होता है।  जब मानसिक तनाव बढ़ता है तो हमारा दिमाग उस उलझन में ठीक से सोच नहीं पाता और हम ठीक से निर्णय नहीं ले पाते। ऐसे में हमेशा डर बना रहता है कि हम कोई गलत निर्णय ना ले लें।

इस डर से बचने का एक ही उपाय है कि हमारा दिमाग ठीक से कार्य करे। दिमाग को ठीक से चलाने के लिए प्रतिदिन सुबह-सुबह ज्ञान-मुद्रा का प्रयोग करना एक बेहद फायदेमंद और कारगर उपाय हो सकता है। ज्ञान मुद्रा की मदद से हमारा दिमाग दौडऩे लगेगा। इस मुद्रा से दिमाग को सही और ज्यादा से ज्यादा प्रखर चेतना मिलेगी और वह पहले की बजाय अधिक बेहतर और तेज गति से सटीक कार्य करने में समर्थ बन जाएगा।

ज्ञान मुद्रा की विधि

किसी शांत और शुद्ध वातावरण वाले स्थान पर कंबल आदि बिछाकर पद्मासन या सुखासन में बैठ जाएं। अब अपने दोनो हाथों को घुटनों पर रख लें। अंगूठे के पास वाली तर्जनी उंगली (इंडेक्स फिंगर) के ऊपर के पोर को अंगूठे के ऊपर वाले पोर से मिलाकर हल्का सा दबाव दें। हाथ की बाकी की तीनों उंगलियां बिल्कुल एक साथ लगी हुई और सीधी रहनी चाहिए। अंगूठे और तर्जनी उंगली के मिलने से जो मुद्रा बनती है उसे ही ज्ञान मुद्रा कहतें है। ध्यान लगाते समय सबसे ज्यादा ज्ञान मुद्रा का इस्तेमाल किया जाता है।

उम्र बढ़ाने का मजेदार और अचूक देशी फंडा



नई-पुरानी कई वैज्ञानिक खोजों से यह साबित हो चुका है कि सूर्य की प्रात:कालीन किरणें हमारे शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक विकास के लिये बेहद फायदेमंद हैं। सूर्य की तेज रोशनी से अगर आपके मन में किसी प्रकार का भय या डर है तो इस ताजातरीन शोध पर गौर कीजिए। एक नए अध्ययन में पता चला है कि सनबाथ लेने यानी प्रात:कालीन नर्म धूप में नहाने से महिलाओं की उम्र बढती है।

उल्लेखनीय बात यह है कि धूप स्नान का लाभ वैसे तो सभी को होता है लेकिन महिलाओं को इसका विशेष फायदा होता है। अध्ययन में पाया गया कि जो महिलाएं नियमित तौर पर धूप स्त्रान करती हैं, उनके ज्यादा दिनों तक जीवित रहने की संभावना रहती है।

स्वीडन के लुंड विश्वविद्यालय के शोधकत्र्ताओं ने अपने शोध के माध्यम से यह साबित किया है कि धूप स्त्रान से सिर्फ विटामिन-डी ही नहीं मिलता बल्कि खून के थक्के जमने, मधुमेह और कुछ प्रकार के ट्यूमरों के खिलाफ शरीर को जरूरी प्रतिरोधी क्षमता देता है।

विशेष: धूप स्नान शरीर के इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है। लेकिन हमेशा सुबह की धूप का ही सेवन करें।

Wednesday, June 15, 2011

Health 20

काजू प्रयोग
पैरो की एडियों में दरारे हो, पेट में कृमि हो तो बच्चों को २/३ काजू शहद के साथ अच्छी तरह तरह से चबा चबा कर खाने दे…और बड़े है तो ५/७ काजू…..कृमि,कोढ़, काले मसुडो आदि में आराम होगा |
काजू प्रयोग से मन भी मजबूत होता है


स्मृति रक्षा
नंगे सिर धूप में ना घुमे, स्मृति शक्ति कमजोर होती है |

रसायन कल्प
त्रिफला + तिल का तेल + शहद संभाग मिलाकर रख ले…रोज १० ग्राम खा के गुनगुना पानी पिए… पेट की तकलीफ , मासिक तकलीफे और दमे की तकलीफे दूर होगी….
ऐसा १ महीने लेने से शरीर का शोधन हो जाता है …और ३ महीने करो तो चेहरे पे चमक आ जायेगी -एक रसायन कल्प हो जाता


नेत्र ज्योति अच्छी रखने के लिए
नेत्र ज्योति बढ़ने के लिए कालीमिर्च(पाउडर)+ घी और शहद मिलाकर चाटो तोनेत्र ज्योति अच्छी रहेगी |
सोते समय इरन्डी तेल का आज्ञाचक्र पे तिलक कर के सो जाओ तो नेत्र ज्योतिअच्छी रहेगी


दमा के लिए
नारियल की जटा जलाकर रख कर ले ...कप्पड़ छान कर दे, थोडी राख शहद के साथ १ महीने तक ले, दमा चला जायेगा|

कानों की श्रवण शक्ति
रोज कड़वा तेल (सरसों का तेल ) की बूंदे कान में डालो और उंगली घुमाये तो जिंदगी भर आप अच्छे से सुन पाएंगे।

होंठ फटने पर
जिन के होंठ फटते है, वो नाभि में तेल डाले, तो होठ नही फटेंगे।


तुलसी कब नहीं तोडें?
१२ बजे के बाद तुलसी नही तोड़ना चाहिए , फूल पत्ते भी नही तोड़ना चाहिए… तुलसी के पत्ते ७ दिन तक बसी नही माने जाते …


Height बढ़ाने के लिए
बिलि(बिल्व/बेल) के पत्ते ६ और २ काले मिर्च चबा के खाए अथवा मिक्सी में पीस के खिलाये ..इस से height बढ़ती है ..जिन का कद नही बढ़ता तो उन को खिलाये..!
जिन बच्चों का कद नहीं बढ़ता, वे पुलप्स (pull-ups) का अभ्यास करें और बेल के 6 पत्ते व 2-4 काली मिर्च हनुमानजी का स्मरण करते हुए चबाकर खायें उस में पानी दाल के पीसकर भी खा सकते हैं (12 साल से 18 साल तक के बच्चे यह प्रयोग कर सकते हैं )

सुखी समृध्द जीवन
अपने घरो में vibration गंदे हो गए अशांति के , रोग के कण बढ़ गए तो
सूर्य नारायण को अर्घ्य दो,
तुलसी माता के ५ पत्ते खाओ
घर के पश्चिम में पीपल का वृक्ष लगाओ…(नही है तो भी जहा हो वह प्रार्थना करो)…
सुखी समृध्द जीवन होगा….


गाय की औरा
रोगी व्यक्ति अगर गाय के पीठ पे हाथ घुमाए और गाय खुश होवे तो सुवर्ण किरणे हवा में छोड़ती है जिस से रोगी ठीक हो जाता है…।



कमजोरी आये तो
कमजोरी आए तो ये करना…. कोई भी दवा की जरुरत नही है…
सूर्य नारायण के किरणों में ५/१० मिनट बैठे…
तुलसी माता के नजदीकी,
गाय के पीठ पर ज़रा सा हाथ घुमाना…
बस!कोई दवा की जरुरी नही!!
…डॉक्टर बोल दे की , “अब ये ठीक नही होगा”….ऐसे ऐसे भी ठीक हो गए ऐसी भगवान की वाणी है!…।



मिठाइयों से सावधान
दीवाली में मिठाइयाँ नपी-तुली खाना….स्वामी विवेकानंद बोलते कि , “मिठाई के दुकान साक्षात यमदूत की दुकान है!!” विवेकानंद की बात से हम सहमत है…. कोई जरुरी नहीं शरीर को मिठाईयों की….. स्वास्थ्य के लिए रोटी, सब्जी , दाल , फल खाते ये पर्याप्त है….. बाकी फालतू है…. रसगुल्ले तो दुश्मन को भी नही खिलाये! …कलकत्ता में छेना ज्यादा चलता तो स्वास्थ्य भी क्षीण है …और इडली डोसा ...पेट ख़राब कराने का एकदम सीधा रास्ता….. किसी को slow poisoning देना है ना तो इडली डोसा खिलाये…. और किसी को मीठा जहर देना हो तो “कुरकुरे” दे दो!! ये चीजे स्वास्थ्य के लिए बहुत नुकसान करते ..इन से बचो…
बाजार में बेसन की मिठाई मिलती.. तो बेसन ४० रुपये किलो है और चावल का आटा १८ रुपये किलो ..तो मिठाई दोनों को मिक्स कर के बनाते तो और भी सत्यानाश है…. बाजारू मिठाई से सावधान रहे… नपी-तुली खाना …।
पटाखों से भी परहेज करना..
-19th Oct'08 Amdavad
0 comments  Links to this post
Labels: पर्व मांगल्य(Festivals), स्वाश्थ्य(Health)
आधि व्याधि से बचने के लिए
आधि व्याधि से बचने के लिए शनिवार के दिन पीपल का स्पर्श हितकारी माना गया है. आधि = मन के विकार माने काम , क्रोध आदि से बचना हो तो और व्याधि माने शरीर के रोग ..आधि व्याधि से बचने के लिए शनिवार को पीपल को स्पर्श करे और
ॐ हौं जूं सः
ये मन्त्र की एक माला रोज ऐसे २१ दिन जप करे..
तो आधि माना मन के रोग और व्याधि माना शरीर के रोग मिट जायेंगे…इस मन्त्र में ४ बीज मन्त्र है..फायदा जरुर होता है


कपूर मिश्रित जल
गो चंदन अगरबत्ती गाय के घी में डुबो के जला देते तो भी गाय के गोबर के कंडे जैसा परिणाम देगा …. कभी मै उस में कपूर भी रख देता…. कभी कभी कपूर मिश्रित जल कमरे में छिटक देना भी हितकारी माना जाता है ….कपूर पानी में डाल के वो पानी कमरे में छिटक दे…..


बल, बुद्धि बढ़ाने के लिए
विद्यार्थियों के बुध्दि बढ़ाने के लिए बेल के पत्ते , पलाश के पत्ते और मिश्री( शक्कर)सब को सम भाग मिलाकर उस की पाउडर कर ले और उस का धूप करे ….गोबर कंडा जला दिया उस के ऊपर वो धूप दाल दिया..अथवा तो २/३ कोयले जला दिए और उस पे वो धूप दाल दिया….बहुत फायदा होगा…॥ इससे सबसे पौष्टिक आहार शुद्ध वायु मिलेगी, तो स्वास्थ्य, बल, बुद्धि में अद्भुत फायदे होते हैं |


केश मुलायम करने के लिए
गो-झरण से बाल धोने से बाल रेशम जैसे मुलायम होने लगते


Gastic problem
वायु सम्बन्धी(gastic problem) बीमारी /दोषों को दूर कराने के लिए गहराश्वास लेकर मन में ये मन्त्र बोले
नासै रोग हरे सब पीरा
जपत निरंतर हनुमत बलबीरा
श्वास छोड़ दे.ऐसा करे तो वायु सम्बन्धी रोगों में आराम मिलेगा .
१ लीटर पानी को , जब ७५० मिली बच जाए तो वो पानी पीने में लाये - वायुसम्बन्धी बीमारी में आराम होगा।
स्नान करते समय पानी में बेलपत्र डालकर “ॐ नमःशिवाय” ४ /५ बार जप करके फिर रगड़ के स्नानकरे।(मग्गे भर पानी में बेल-पात्र मसलकर उस से शरीर कोरगड)


मणिपुर केन्द्र कैसे विकसित करें?
सूर्य को अर्घ्य देते समय नाभि में सूर्य का ध्यान कराने से मणिपुर केन्द्र ( ७ केन्द्रों का तीसरा केन्द्र) विकसित होगा। जीवनी शक्ति में लाभ होगा |


कोमा से बाहर आने के लिए
२० बूँद तुलसी के रस में १ चुटकी सैंधा नमक , मरीज के नाक में डाल दें और `एं एं` जपते हुएतिल के तेल से सर की मालिश करें और पैरों के तलवों पर भी तिल या सरसों के तेल की मालिश करें ।
मरीज को AC me न रखे और फलो का रस (Fruit Juice) न दे... जरुरत पड़े तो मूंग का पानी दे.

हास्य प्रयोग
हास्य प्रयोग से रोग प्रतिकारक शक्ति बढाती है, tumor की वृध्दि नही होती, glucose नियंत्रण होता है, हास्य में भगवान का नाम हो तो बहुत कल्याणकारी है|


अपाचन हो तो?
अपाचन बढ़ा तो अजवाइन, सौंठ और काली मिर्च का मिश्रण करके वो पाउडर एक चुटकी ले तो पाचन ठीक होगा...सुबह ले ले और २/३ घंटे बाद भोजन करे...


स्वस्थ्य की युक्तियां
रात्रि को गोभी खाना -गो-मांस खाने से भी ज्यादा हानिकारक है|
रविवार को अदरक -आरोग्य को हानि करता है|
धूप से आकर पानी पीने से स्वास्थ्य बिगड़ता है (पेशाब की बीमारी नही मिटती) |
लोहे के बर्तन में दूध उबालकर पीने से रक्त बढ़ता है|
सरसों की साग स्वास्थ्य के लिए अच्छी नही|
उड़द की दाल स्वस्थ्य के लिए नुकसान करती है, मूंग की दाल फायदा करती है|
रसगुल्ला , पनीर ये tumor का सामान है , बीमारी का सामान है



त्रिफला रसायन कल्प
त्रिफला रसायन कल्प
सर्व नेत्ररोगनिवारक, मेधा व दृष्टिवर्धक
त्रिफला रसायन कल्प त्रिदोषनाशक, इंद्रिय बलवर्धक विशेषतः नेत्रों के लिए हितकर,वृद्धावस्था को रोकने वाला व मेधाशक्ति बढ़ाने वाला है। इसके सेवन से नेत्रज्योति में आश्चर्यजनक वृद्धि होती है। दृष्टिमाद्य, रतौंधी, मोतियाबिंदु, काँचबिंदु आदि नेत्ररोगों से रक्षा होती है। बाल काले, घने व मजबूत बनते हैं। 40 दिन तक विधियुक्त सेवन करने से स्मृति,बुद्धि, बल व वीर्य में वृद्धि होती है। 60 दिन तक सेवन करने से यह विशेष प्रभाव दिखाता है।जगजाहिर है कि इस प्रयोग से पूज्य बापू जी अदभुत लाभ हुआ है, चश्मा उतर गया है।
विधिः शरदपूर्णिमा की रात को चाँदी के पात्र में 350 ग्राम त्रिफला चूर्ण, 350 ग्राम देसी गाय का घी व 175 ग्राम शुद्ध शहद मिलाकर पात्र को पतले सफेद वस्त्र से ढँक कर रात भर चाँदनी में रखें। दूसरे दिन सुबह इस मिश्रण को काँच अथवा चीनी के पात्र में भर लें। (उपर्युक्त मात्राएँ40 दिन के प्रयोग के लिए हैं। 60 दिन के प्रयोग के लिए त्रिफला, घी व शहद की मात्राएँ डेढ़ गुनी लें।)
सेवन-विधिः 11 ग्राम मिश्रण सुबह-शाम गुनगुने पानी के साथ लें (बालकों के लिए मात्रा 6 ग्राम)
दिन में केवल एक बार सात्त्विक, सुपाच्य भोजन करें। इन दिनों में भोजन में नमक कम हो तो अच्छा है। साधारण नमक की जगह सेंधा नमक का उपयोग विशेष लाभदायक है। सुबह शाम गाय का दूध ले सकते हैं। दूध व रसायन के सेवन में दो ढाई घंटे का अंतर रखना आवश्यक है। कल्प के दिनों में खट्टे, तले हुए, मिर्च-मसालेयुक्त व पचने में भारी पदार्थों का सेवन निषिद्ध है। इन दिनों में केवल दूध-चावल, दूध-दलिया अथवा दूध-रोटी का सेवन अधिक गुणकारी है।
इस प्रयोग के बाद 40 दिन तक मामरा बादाम का उपयोग विशेष लाभदायी होगा। कल्प के दिनों में नेत्रबिन्दु का प्रयोग अवश्य करें।
ॐॐॐॐॐॐॐॐॐ


शक्तिशाली व गोरे पुत्र प्राप्ति के लिए
गर्भिणी स्त्री ढाक (पलाश) का एक कोमल पत्ता घोंटकर गौदुग्ध के साथ रोज़ सेवन करे | इससे बालक शक्तिशाली और गोरा होता है | माता-पीता भले काले हों, फिर भी बालक गोरा होगा | इसके साथ सुवर्णप्राश की २-२ गोलियां लेने से संतान तेजस्वी होगी |



स्वप्न दोष, प्रदर रोग की बीमारी
कई लोगो को प्रदर रोग , पानी पड़ने की बीमारी हो जाती…तो आँवले का चूर्ण १०० ग्राम २५ ग्राम हल्दी मिला दो..फिर ३/४ ग्राम सुबह और ३/४ ग्राम शाम को फांक लेने से स्वप्न दोष , प्रदर रोग की बीमारी ठीक हो जाती, गाल बैठे हो तो ठीक हो जाता॥


आँखों मे जलन, पाचन कमजोर हो तो?
जिनके आँखों मे जलन होता हो अथवा पाचन कमजोर हो तो वरियाली और शहद मिलाकर थोड़ा खाना तो पाचन ठीक होता है..


किडनी की तकलीफ
किडनी की तकलीफ के लिए साटे (पुनर्नवा) की सब्जी अथवा रस ५० ग्राम रोज पिया करो ...
जिस को ज्यादा तकलीफ हो उस के मकई(भुट्टे) के कुदरती बालों का कवर ५० ग्राम मसलकर २ लीटर पानी मे उबले १ लीटर हो जाए तो वो पानी पिए..करोडो लोगो को इस से लाभहोता...


वायु की तकलीफ
१. गाय के दूध से कोलेस्ट्रोल नही बढ़ेगा..काली गाय का दूध वायु नाशक होता है..
२. देसी आम पाचन मे अच्छा और वायुनाशक और बुढ़ापे को दूर रखता है..कलमी आम नही.
३.बड़ी उमर मे वायु की तकलीफ सभी को होती है..वायु से घुटने का दर्द , डकार आदि ५२प्रकार की वायु की बीमारियाँ होती है...इस पर एक प्राकृतिक इलाज है..
नीम के पत्ते १२ से १५ ग्राम.. कोमल नीम के पत्ते+ एक/दो कला मिर्च सुबह चबा के पानी पिएऔर रात को ५० ग्राम गुड + १० ग्राम देसी घी मिलाकर खाए....


शुध्द हवा
शरीर के लिए सबसे ज्यादा शुध्द हवा की जरुरत है..गाय के गोबर का कंडा जलाओ.. एक चम्मच घी डालकर धूप करो, जरा सा गाय का घी डालकर धूप करते तो घर मे शक्तिशाली वातावरण बन जाता है......वातावरण बहुत शुध्द होता है...बाजार का घी नही डालो....


निरोगी व श्री सम्पन्न होने के लिये
ॐ हुं विष्णवे नमः
निरोगी व श्री सम्पन्न होने के लिये इस मन्त्र की एक माला रोज जप करें, तो आरोग्यता और सम्पदा आती हैं ।
( गुरुपूनम अमदावाद २००५ के बापूजी के सत्संग से )

आंवला प्रयोग
आंवले का जूस पीना चाहिऐ, पेट की तकलीफे दूर होगी.. आंवले का powder ले लो रोज ..घोल बनाकर पीयो..तो पेट ठीक रहेगा..७ दिन लगातार पीयो…मूलाधार केन्द्र की शुद्धि होती है…..शरीर स्वस्थ रखने के ऐसे तरीके है… श्री कृष्ण ने गीता मे बताये है आहार विहार से स्वास्थ्य ठीक रखे…
-12th April 08, Sagar(M.P.)
अनुष्ठान के पहले आंवले का जूस रोज सुबह नाश्ते में लें 5-७ दिन , जिससे नाडियाँ शुद्ध रहें.

रोगियों के रोग हरने के लिए मंत्र जप सेवा
"ॐ रुद्राय नमः" यह मंत्र की रोज एक माला करे, ऐसा 6 महीने तक करें तब मंत्र सिद्ध हो जायेगा फिर कोई अगर बिमार है तो आप इस मंत्र का जप करें, पानी में देखकर 21 बार इस मंत्र का जप करके वह पानी किसी को दें तो 3 दिन में/7 दिन में/ 11 दिन में आराम आ जायेगा (बिमारी से छुटकारा मिलेगा लेकिन इसका पैसा रुपया नहीं लेना, सेवा भाव से करना है )

कफ़ रोग का इलाज
50 ग्राम शहद (honey), 50 ग्राम लहसुन (garlic), 1 ग्राम तुलसी के बीज पीस कर उसमें डाल दो, चटनी बन गयी थोड़ा-थोड़ा बच्चे को चटाओ हृदय भी मजबूत हो जायेगा, कफ़ भी नाश हो जायेगा


किडनी के रोगों का इलाज:
इष्ट मंत्र का जप करो
जो भुट्टे होते हैं, मक्की के भुट्टे, वो मक्की के ऊपर जो बाल होते हैं, मक्की के दानों पर, 50 ग्राम मक्की के बाल धोने के बाद, उसको तोड़ मरोड़ के 2 लीटर पानी में उबाल दो 1 लीटर पानी बच जाये, वो किडनी के रोग वाले को थोड़ा-थोड़ा कर के पिला दो, Problem solve.
मक्की आता है, उसकी सुरक्षा के लिये जो जाल होता है बाल का, वो बाल 50 ग्राम, उसको तोड़ मसल के 2 लीटर पानी में उबालना खुले में, धीमी आंच पर, गैस फुल नहीं होना चाहिये कम गैस पे, एक लीटर पानी बच जाये उसको छान लो, फिर धीरे-धीरे दिन-भर में वो पीलें - किडनी का function अच्छा हो जायेगा ऐलोपैथी की दवाईयों से किडनी ठीक नहीं होती लेकिन गुरुमंत्र और यह प्रयोग से किडनी ठीक होने लगती है


अभी शिवरात्रि आयेगी उस दिन "बं बं" का सवा लाख जप करने से वायु संबंधी बीमारियाँ दूर होंगी
Shivaratri is coming soon, Japa of mantra "Bam Bam" for 1।25 Lacs on that day, relieves from gas related problems।


दिशा विवेक
पूजा आरती पश्चिम में है तो खुशियाँ दबेंगी
दक्षिण में है तो बिमारी आयेगी
तुम्हारी पूजा की दिशा पूरब या उत्तर में हो तो स्थिति उन्नत होगी पूजा की दिशा उत्तर में है तो अध्यात्मिक उन्नति होगी, पूर्व में है तो लौकिक उन्नति होगी गुरूमंत्र है तो दोनों में आध्यात्मिक और लौकिक उन्नति होगी
तो देख लेना की आरती की दिशा, पूजा करते तो आपकी दिशा पश्चिम की तरफ तो नहीं, होगी तो बदल देना सत्संग से कैसा ज्ञान मिलता है
सोते समय पश्चिम में सिर रहेगा तो चिंता पीछा नहीं छोड़ेगी उत्तर में सिर करते हैं तो बिमारी पीछ नहीं छोड़ेगी सोते समय सिराना पूरब की तरफ अथवा दक्षिण की तरफ हो


Insomnia
60 ग्राम सरसों का तेल और 1 ग्राम कपूर ( 2 छोटी वड़ी कपूर ) मिलाकर घर में जलाना चाहिए गुगल का धूप करना चाहिए थोड़े पानी में कपूर की 2 छोटी वड़ी डालकर घर में चारों ओर छिड़कें


उबटन
गौ मूत्र सारे शरीर में रगड़ कर नहाओ सात चीजों का उबटन लगा के नहाओ सात चीजें हैं :
१ गेहूँ
२ चावल ( जो ज्वार खाते हों वो ज्वार और जो चावल खाते हों वो चावल ले सकते हैं )
३ मूँग
४ चना
५ उड़द
६ जौं
७ तिल
इस का समान भाग मिश्रण बना लें उसको चक्की में पिसवाकर उस पाउडर का घोल बनाकर उससे नहाऐ पहले ललाट पर (भस्म की तरह बीच की तीन उँगलियों से लगायें) लगायें आध-एक मिनट “ॐनमःशिवाय” बोलें इससे पाप नाशिनी ऊर्जा पैदा होगी और स्वास्थय में कितने लाभ होगें बता नहीं सकते, बोलोगे कि बाबा पहले क्यों नहीं बताया साबुन लगाने से डिप्रेशन होता है, शरीर के रोम-कूप पर बुरा असर पड़ता है


Heart Blockage
डॉक्टर भारी रुकावट बोलकर जल्दी एमरजेन्सी में ऑपरेशन करवाओ बोले तो मत करवाना
आश्रम के डॉक्टर की दवाई लेना
अगर आश्रम नहीं जा सकते तो देसी गाय का झरण ( गौ मूत्र) 40-50 मि ली छान कर पिला दो तो रुकावट खुल जायेगी और हृदय की परेशानियाँ दूर हो जायेंगी


In Cold सर्दी
सर्दी है तो दायें नथुने से श्वास लो, एक मिनट रोको और “रं रं” का जप करो, ऐसा २ बार करें, इससे बिना दवाई के सर्दी गायब हो जाती है


For wine addicted
किशमिश के दाने रखे अपनी जेब में और 2-2 खाते रहे किशमिश के दाने भिगा के, धोकर, पोंछकर रखले हर 2/5 मिनट में 2-2 दाने चूसता रहे
जाम पे जाम क्या पीते हो, रात को पी सुबह को उतर जायेगी तू हरि नाम कि प्याली ,पी तेरी सारी जिन्दगी सुधर जायेगी


Raipur Tips
रात को सोने से आधा घंटा पहले पैर अच्छे से धो लो, गीले पैर नहीं सोयें
सोते समय सिराना पूरब या दक्षिण की तरफ कर के सोयें
जो घर में दिया जलाते हैं वो ध्यान रखें कि दिये की लौ (ज्योत) दक्षिण या पश्चिम की तरफ न हो दिये की ज्योत पूरब की ओर या उत्तर की ओर होगी तो शांति और प्रीति रहेगी, दरिद्रता, बिमारी, अशांति दूर होगी
दिये को प्रार्थना करके संकल्प करे कि हितभाषी बनूँ, मितभाषी बनूँ, प्रीतभाषी बनूँ, शांत बनूँ, सब के लिये हितकारी होगा वो ही बोलूँ, हितकारी नहीं होगा तो नहीं बोलूँ चिढ़ाने से मुसीबत बढ़ती है
रोज एक मामरी बादाम खाये, या रात को एक बादम भिगा दिया, सुबह छिलका उतार के खा लिया करो
खाना बहुत ठांस (ज्यादा खाना) नहीं खाये दही, मावा नहीं खाये हितकारी भोजन करे खाना खाते समय बीच-बीच में ताजा और गुनगुना पानी पिया करे, पाचन ठीक रहेगा
जिनको धातु नाश, वीर्य नाश, हस्त मैथुन जैसी गन्दी आदतें हैं, वे 100 ग्राम आंवला चूर्ण और 100 ग्राम हल्दी पाउडर मिलाकर रखें रोज सुबह 3-3 ग्राम फांक लें युवाधन पुस्तक बार-बार पढ़े सब बिमरियाँ दूर हो जायेंगी
14 फरवरी को मातु-पितु दिवस मनायें
बाल धोने का तरीका : मातायें बहनें सिर पर शैम्पू लगा के बाल धोने से बालों की जड़ें कमजोर होती हैं शैम्पू के साबुन से रोम कूप पर बुरा असर पड़ता है मैं ऐसा उपाय बताता हूँ जो आप कर सकते हैं, वो उपाय बताता हूँ 7 चीजों क मिश्रण बनाकर घोल बनाकर सिर पर "ॐ नमः शिवाय" बोलकर लगायें तीन उँगलियों से ललाट पर, कंठ में, भुजाओं में, घुटनों पर, नाभि पर और सारे शरीर में रगड़ दिया अगर बाल झड़ते हैं तो आंवले का रस सिर में ड़ाल दिया तो बालों की जड़ें मजबूत हो जायेंगी आप आराम से बना सकते हैं 7 चीजें हैं : गेहूँ, चावल, जौं, चना, उडद, मूँग, तिल एक-एक किलो सभी का मिश्रण बनायें और पिसवा दें उसी के घोल से नहाओ एक दिन में आपको कितना फायदा लगेगा चिंता सेछुटकारा, आपको लगेगा कि प्रसन्न्ता आ रही है भगवान को अपना मानकर अंतराअत्मा को, आपके ठाकुर जी को पाने का आपको भाव पैदा होगा प्रभु प्रेम की कला उत्पन्न होने में मदद होती है
बालों को काला करने के लिये ड़ाई नहीं चढ़ायें, उससे भारी नुक्सान होता है


लाभकारी प्रयोग
काले तिल 250 ग्राम और 125 ग्राम आंवला चूर्ण का मिश्रण अच्छी तरह से बारीक कर लो रोज साढ़े 11 ग्राम ( 1 तोला) खाओ
बहरा है तो सुनने की शक्ति बढ़ती है, अन्धा है तो देखने की शक्ति बढ़ती है
एक साल तक सेवन करने वाले  नेत्र ज्योति बढ़ती है
सेवन काल में दूध ही सेवन करे बाल काले होते हैं खारा-खट्टा नहीं खाये, पुरुष सहवास नहीं, अपनी रक्षा करे ये सारे लाभ होते हैं ऐसा लिखा गया है

Boiled water cures
पानी को उबालकर पीयें, पानी उबलकर 75% बचे तो वायु नाशक होता है, 50% बचे - यह पित्त नाशक होता है, और 25% बचा हुआ पानी कफ नाशक होता है
Drink water after being boiled, if remaining boiled water is 75% , it cures gas problems, if 50% water remains, it cures pitta(heat) problemes, if 25% water remains, it cures cough problems।

For good intellect
अगर बच्चे-बच्चियों की बुद्धि कम लगती हो तो 25 मि लि ग्राम तुलसी का रस और आँवले का या नारंगी का रस या च्यवन प्राश में पानी ड़ाल के वो तुलसी के रस में मिलायें ये मिश्रण चालीस दिन देने से बच्चों की बुद्धि में विलक्षणता आ जाती है लगभग 25 मि लि ग्राम तुलसी का रस और फल का रस (नारंगी/आँवला या च्यवन प्राश ) आधी कटोरी मिश्रण होगा ये बच्चे को चालीस दिन पिलायें, बच्चे चमक जायेंगे
Give 25 mg। Tulsi juice, with Amla(Gooseberry) juice or Orange juice or with mixing chyawanprash in water. On giving this mixture for 40 days to children, they will shine with outstanding intellect.

Insomnia (अनिद्रा)
यदि आपके माता पिता को अनिद्रा की तकलीफ हो तो, उनको पता न चले इस प्रकार उनके तकिये के नीचे तुलसी के इक्कीस पत्ते रखने से लाभ होता ही है लेकिन दोपहर बारह बजे के बाद तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ें, कोई फूल पत्ता दोपहर के बाद तोड़ने से पाप लगता है बारह बजे के बाद नहीं तोड़ें इस प्रयोग का बहुत उपयोग होता है … तुलसी के पत्ते पीस कर रगड़ के नहायें तो सुर्खिया नहीं लगती


घर में आरोग्यता, सुख, शांति
पीपल को जल सींचने से दरिद्रता दूर होती है, पुण्यलाभ होता है हरा पीपल कभी काटना नहीं चाहिए, पाप होता है पीपल का पेड़ लगाना पुण्यदायी है घर के पश्चिम की ओर पीपल का पेड़ हो तो घर की हवा शुद्ध रहेगी और घर में आरोग्यता, सुख, शांति रहेगी
Watering the sacred fig (peepal) removes poverty and accrues the merits. Planting a sacred fig accrues the merits, and by cutting it, one incurs sin upon himself. A sacred fig, planted in the west side of a house, purifies the air and bestows the house with health, wealth and happiness.


Caution on these days
पति पत्नी का व्यवहार सिर्फ़ संतान उत्पत्ति के लिए उपयोग करते तो अपने कुल खानदान को तारते पति पत्नी का व्यवहार अमावस्या, पूनम, एकदशी, अष्टमी के दिन करते तो अकाल मृत्यु को बुलाते, और अगर संतान रह गई तो विकलांग संतान ही होगी
Abstain from indulging in copulation with your spouse on amavasyaa, poornima, ekadashi and ashtami। Copulation should be done to beget progeny and not for sensual pleasure .


स्फूर्ति और बल के लिए (To cast away weekness)
रात को दो किशमिश के दाने धोके ग्लास में डाल दो, और एक नीम्बू निचोड़ के डाल दो; रातभर पड़ा रहे, सुबह मंजन करके वह पी लो; अपने को स्फूर्ति और बल में पाओगे
Squeeze the juice of one लेमन।Soak two properly washed raisins, in that juice overnight. Drink this juice next morning, after brushing your teeth।

For eye weakness
जो लोग चश्मा पहनते हैं या आँखों की कोई भी तकलीफ है तो उन्हें त्रिफला रसायन रोज 11 ग्राम सुबह और 11 ग्राम शाम को लेना चाहिए बापूजी 68 की आयु में बिना चश्मे के पढ़ते हैं क्योंकि उन्होंने भी त्रिफला रसायन का प्रयोग किया है सभी साधकों को उनका अनुसरण करना चाहिए


For Gas troubles
वायु की 80 प्रकार की शिकायत होती है एक बढ़िया उपाय है:100 ग्राम धनिया (सूखा) ,100 ग्राम हरड़ ,50 ग्राम शक्कर पाउड़र करके रखो 6 ग्राम सुबह और 6 ग्राम शाम को ले लो सभी वायु दोषों से, gas trouble से मुक्ति

Health 19


ह्रदय रोग की सरल व अनुभूत चिकित्सा

  • १ कटोरी लौकी के रस में पुदीने व तुलसी के ७-८ पत्तों का रस, २-४ काली मिर्च का चूर्ण व १ चुटकी सेंधा नमक मिलाकर पियें l इससे ह्रदय को बल मिलता है और पेट की गड़बडियां भी दूर हो जाती हैं l
  • नींबू का रस, लहसुन का रस, अदरक का रस व सेवफल का सिरका समभाग मिलाकर धीमी आंच पर उबालें l एक चौथाई शेष रहने पर नीचे उतारकर ठंडा कर लें l तीन गुना शहद मिलाकर कांच की शीशी में भरकर रखें l प्रतिदिन सुबह खाली पेट २ चम्मच लें l इससे Blockage खुलने में मदद मिलेगी l
  • अगर सेवफल का सिरका न मिले तो पान का रस, लहसुन का रस, अदरक का रस व शहद प्रत्येक १-१ चम्मच मिलाकर लें l इससे भी रक्तवाहिनियाँ साफ़ हो जाती हैं l लहसुन गरम पड़ता हो तो रात को खट्टी छाछ में भिगोकर रखें l
  • उड़द का आटा, मक्खन, अरंडी का तेल व शुद्ध गूगल संभाग मिलाके रगड़कर मिश्रण बना लें l सुबह स्नान के बाद ह्रदय स्थान पर इसका लेप करें l २ घंटे बाद गरम पानी से धो दें l इससे रक्तवाहिनियों में रक्त का संचारण सुचारू रूप से होने लगता है l
  • १ ग्राम दालचीनी चूर्ण एक कटोरी दूध में उबालकर पियें l दालचीनी गरम पड़ती हो तो १ ग्राम यष्टिमधु चूर्ण मिला दें l इससे कोलेस्ट्रोल के अतिरिक्त मात्रा घट जाती है l
  • भोजन में लहसुन, किशमिश, पुदीना व हरा धनिया की चटनी लें l आवलें का चूर्ण, रस, चटनी, मुरब्बा आदि किसी भी रूप में नियमित सेवन करें l
  • औषधि कल्पों में स्वर्ण मालती , जवाहरमोहरा पिष्टि, साबरशृंग भस्म, अर्जुन छाल का चूर्ण, दशमूल क्वाथ आदि हृदय रोगों का निर्मूलन करने में सक्षम है l

गौ माता की महिमा

गाय से शरीर से जो सात्विक उर्जा निकलती है, उस घर या इलाके में गाय होने से बहुत साड़ी अशुभ चीजें दूर हो जाती हैं l गाय के शरीर में सुर्यकेतु नाड़ी होती है, जो सूर्य किरणों को पीती है, इसलिए गाये के गोबर व मूत्र में भी सात्विक पॉवर होता है l मरते समय भी गाय के गोबर का लीपन करके व्यक्ति को सुलाया जाता है l
  • कैसी भी जहरी दवाएं खायी हो, गौमूत्र थोड़े दिन पिये, Blockage खुल जायेगा और जहरी दवाओं का असर उतर जायेगा l
  • बच्चों को गाय की पूंछ का झाड़ा देने से ऊपर की आई हुई हवा या कुप्रभाव नाश होता है l
  • जिसको रात को ठीक से नींद न आती हो, वो मोर के पंख रख दे, सिरहाने के नीचे और "हरि ॐ" का गुंजन करे , नींद आने लगेगी l
  • जिसको बुरे स्वप्न आते हों वो बुरे स्वप्न न आयें इसका आग्रह छोड़ दें l पैरों को गाय का घी मल दें और सिर में थोड़ा हलकी मालिश कर दें किसी भी तेल की l
  • गाए के दूध से बनी दही शरीर पर रगड़कर स्नान करने से स्वास्थ्य, प्रसन्नता और दरिद्रता दूर हो जाती है l
  • चावल पानी में पका लें फिर गाय के दूध में डालकर खीर बना लें, ज्यादा मीठा और मेवा न डालें और फिर "ॐ" का १२० माला जप करें l ७ सप्ताह तक करें तो ७ जनम की दरिद्रता दूर हो जाती है और ७ जनम तक कुटुंब में दरिद्रता नहीं आती l
  • जिस रोग के लिए डॉक्टर ने मना कर दिया हो की ये रोग ठीक नहीं हो सकता, वो व्यक्ति घर में गाय पालें और चारा-पानी खुद खिलाये और स्नेह करें l गाय की प्रसन्नता उसके रोमकूपों से प्रकट होगी और आप अपने हाथ गाय की पीठ पर घुमाएंगे तो आपके हाथों की उँगलियों द्वारा वो प्रसन्नता, रोग प्रतिकारक शक्ति बढाएगी l २-४ महीने तक ऐसा करें l
  • काली गाय का घी बुढापे में भी जवानी ले आता है l हार्ट अटैक की तकलीफ है और चिकनाहट खाने की मनाही है तो गाए का घी खाएं, हार्ट मज़बूत बनता है l

किडनी व पेशाब की प्रॉब्लम में

६० साल के बाद पेशाब की तकलीफ होती है । पेशाब धीरे-धीरे आता है और पेशाब नली दब जाती है । प्रोटेस्ट ग्रंथि बड़ जाती है । पुनर्नवा का रस पीने से पेशाब खुल कर आएगा, किडनी नयी बन जाएगी । पुनर्नवा की सब्जी खाने से किडनी बढ़िया रहती है व पेशाब की प्रॉब्लम दूर होती है l


तुलसी के बीज
तुलसी के बीज एक चुटकी रात को भिगा दो और सुबह को ले लो l सारी बीमारियाँ दूर रहती हैं और बुदापे की कमजोरी भी नहीं रहती l दोपहर के भोजन के बाद जो पान खाते हों, वो पान में एक चुटकी तुलसी के बीज डालकर खाओ , बुढापा जल्दी नहीं आएगा |



खुजली में
खुजली में खुजलाना नहीं वरन शतघृत लगाना चाहिए | काँसे की थाली में घी और थोड़ा पानी डालकर १०० बार रगड़ो, ये शतघृत बन गया | खुजली पित्त व खून की खराबी के कारण होती है| खून की सफाई के लिए :-
  • खाली पेट टमाटर या खीर खाएं |
  • दो नींबू पानी में निचोड़ कर पियें |
  • त्रिफला फाँकें |

नेत्रज्योति बढ़ाने के लिए

११ से १५ मिनट तक चंद्रमा को एकटक देखें और आँखों को पटपटायें और फिर देखें | शरद पूनम की रात को खीर बनाकर चंद्रमा की किरणों में रखें और चंद्रमा को एकटक देखते हुए जप करें | नेत्र ज्योति और स्वभाव में शीतलता बढती है |

नेत्रज्योति बढ़ाने के लिए

२ से ५ ग्राम त्रिफला, घी और मिश्री चाटने से भी नेत्रज्योति बढ़ती है |

नाड़ी ब्लोकेज व हार्ट प्रॉब्लम में

दोनों हाथ की हथेलिओं को रगड़ते हुए "ॐ" जपें और छाती पर रखें | गोमूत्र ५० मिलीग्राम दो कपड़े में छानकर पियें | -५ दिन में आराम होगा |

किडनी की प्रॉब्लम व पेशाब की गड़बडी में

मकई के बाल ५० ग्राम, २ लीटर पानी में मसल दो | धीमी आंच पे उस पानी को उबालो | १ लीटर होने पर छानकर, पीने लायक होने पर पियें | २-५ दिन में आराम हो जायेगा |

सभी प्रकार की बीमारियों में

  • असाध्य रोगों में सुश्रुत भगवान् (आयुर्वेद ग्रन्थ रचयिता) ने प्राणायाम करके इस मंत्र का जप करने का बताया है :- "अच्युताय गोविन्दाय, अनंताय नाम भेषजाम नश्यन्ति सर्व रोगाणी, सत्यं सत्यं वदाम्यहम l"
  • सुबह सूर्य नारायण के सामने सिर को अच्छी तरह ढककर 7-8 मिनट पेट की तरफ और 8-10 मिनट धूप पीछे की तरफ लगे ऐसे बैठे, उसी में लम्बे श्वास लें और वज्रासन में बैठकर श्वास अंदर-बाहर (पेट अंदर ज्यादा और बाहर कम) करें l
  • दायें नथुने से श्वास लें और रोककर "नासै रोग हरे सब पीरा, जपत निरंतर हनुमंत बीरा" मंत्र जपें, फिर बायें नथुने से श्वास छोड़ दें l इसी प्रकार बायें से श्वास लें और रोककर मंत्र जपें, फिर दाएं से छोड़ दें l ऐसे १० प्राणायाम करें और दो प्राणायाम सवा मिनट तक रोककर करें l

कमज़ोर बच्चों के लिए

कमज़ोर बच्चों को गाय के थन से सीधे ही धार बच्चे के मुंह में डालें | प्रतिदिन दो - चार धार बच्चे के मुंह में डालने से बच्चे का स्वास्थ्य धीरे-धीरे ठीक होने लगेगा |


शराब छुड़ाने का उपाय
जब शराब पीने की इच्छा हो तब किशमिश का १-१ दाना मुंह में डालकर चूसें | किशमिश का शरबत पीने से भी दिमाग को ताकत मिलेगी और धीरे-धीरे शराब छोड़ने की क्षमता आ जायेगी l साथ ही इस मंत्र का जप करें : - " ॐ ह्रीं यं यश्वराये नमः " अथवा जब शराबी निद्रा में हो तो कुटुम्बी उसकी चोटी वाले भाग में देखते हुए मन ही मन इसका जप करें l


वायु सम्बन्धी तकलीफ

वायु सम्बन्धी तकलीफ :-
गर्मी के दिनों में शरीर वायु संग्रह करता है और बारिश के दिनों में वायु प्रकोप होता है | वायु सम्बन्धी रोगों में :-
• १०० ग्रा.म. पुराना गुड व ५० ग्रा.म. हरड मिलाकर १-१ ग्रा.म. की गोलियां बना लें और १५ दिन तक सुबह-शाम चूसें और थोडा गुनगुना पानी पी लें l इससे गैस, अजीर्ण, कब्ज़ व बदहजमी में आराम होता है l
• १ लीटर पानी उबालें और जब ७५० मि.ली. हो जाए तो उतार लें और उसे पियें l इससे वायु सम्बन्धी बीमारियाँ दूर होती हैं l

Diabetes नियंत्रित करने के लिए

Diabetes नियंत्रित करने के लिए :-
१/२ किलो कच्चा करेला टुकड़े - टुकड़े करके तसले में डाल दें और अपने पैरों से १/२ से ३/४ तक तब तक रौंधे जब तक जीभ में कड़वाहट का अहसास ना हो l ७-१० दिन तक ये प्रयोग करें l इससे Diabetes नियंत्रित होती है l

स्मृतिशक्ति बढ़ाने हेतु प्रयोग
५ ममरी बादाम रात को भिगोकर सुबह छिलके उतारके पीस लें | २५० मि.ली. दूध में समभाग पानी, ११ काली मिर्च, पिसे हुए बादाम व मिश्री मिला लें | फिर मिलाया हुआ पानी जल जाने तक उबालें l गुनगुना होने पर 'ॐ श्री सरस्वत्यै नमः' मंत्र जपते हुए चुसकी लेते हुए पिये l इससे यादशक्ति व शारीरिक बल मिलता है l

सिरदर्द व गर्मी शमन हेतु

सिरदर्द होता हो या शरीर में गर्मी जैसा लगता हो, तो पैरों तले गाय का घी रगड़ना चाहिए |

गठिया और जोडों का दर्द
प्याज के रस को सरसों के तेल में मिलाकर मालिश करने से गठिया और जोडों का दर्द दूर होता है|

कब क्या न खाएं?

  • भादों और सावन में दही और मठा नहीं खाना चाहिए।
  • कार्तिक मास में करेला और बैगन नहीं खाना चाहिए
  • श्रावण में हरी सब्जियां (जैसे पालक) नहीं खाना चाहिए , (क्योंकि उनमें जंतु होते हैं)
  • भाद्रपद में दही नहीं खाना चाहिए
  • आश्विन में दूध और कार्तिक में दाल नहीं खाना चाहिए।
  • सूर्यास्त के बाद तिल की कोइ भी वास्तु का प्रयोग नहीं करनी चाहिए।
  • अमावस्या , रविवार और पूनम को तिल का तेल हानिकारक होता है
  • रविवार को तुलसी, अदरक, लाल मिर्च और लाल सब्जी नहीं खाना चाहिए।
  • आँवला रविवार, शुक्रवार और षष्ठी को नहीं खाना चाहिए।·
  • तृतीया तिथि को परवल नहीं खाना चाहिए (तृतीया को परवल खाने से शत्रुओं की वृद्धि होती है)·
  • चतुर्थी को मूली नहीं खाना चाहिए (चतुर्थी को मूली खाने से धन-नाश होता है)
  • अष्टमी को नारियल नहीं खाना चाहिए (अष्टमी नारियल खाने से बुद्धि कमजोर होगा, रातको नारियल नहीं खाना चाहिए)
  • त्रयोदशी को बैगन नहीं खाना चाहिए ( त्रयोदशी को बैंगन खाने से पुत्र नाश या पुत्र से दुख मिलता है)·
  • श्रावण में हरड़ और कार्तिक में मूली स्वास्थ्य के लिए अच्छा है (श्रावण में जठराग्नि कम होने से पेट के बीमारियाँ ज्यादा होती हैं, इसलिए हरड़ खाना चाहिए)
  • भाद्रपद में दूध या दूध से बनी हुई खीर स्वास्थ्य के लिए अच्छा है, इससे शरीर का पित्त निकल जाता है

Holi Tips
  • होली के बाद खजूर नहीं खाना चाहिए, ये पचने में भारी होते है, इन दिनों में सर्दियों का जमा हुआ कफ पिघलता है और जठराग्नि कम करता है. इसलिए इन दिनों में हल्का भोजन करें, धाणी और चना खाएं, जिससे जमा हुआ कफ निकल जाये
  • इन दिनों में १५-२० दिन सुबह १५-२० नीम के पत्ते और काली मिर्च चबा-चबाकर खाने से चर्म रोग दूर होते हैं. भोजन में नीम का तेल उपयोग करने से भी लाभ होता है.
  • होली के दिनों में १५-२० दिन तक नमक न खाएं, अथवा कम कर दें, इससे वर्ष भर स्वास्थ्य में मदद मिलती है
  • इन दिनों में पलाश/केसुडे/गेंदे के फूलों के रंग से होली खेलने से शरीर के ७ धातु संतुलन में रहते हैं, इनसे होली खेलने से चमड़ी पर एक layer बन जाती है जो धूप की तीखी किरणों से रक्षा करती है.
  • होली के दिन १५-२० min. सूर्यस्नान बहुत लाभकारी होता है, जरुर करना चाहिए
  • होली की रात जप-ध्यान करने से अनंत्गुना फल होता है.

काली मिर्च
लाल मिर्च ज्यादा नहीं खाना चाहिए, थोडा बहुत भोजन में काली मिर्च हो तो नाड़ी-शुद्धि होती है लाल मिर्च से पित्त की बीमारी बनती है भगवान् ने पैसा दिया है तो भोजन में काली मिर्च खाएं

खट्टी चीज़ खाने से

खट्टी चीज़ खाने से आँखें जलती हैं और स्वभाव बिगड़ता है, गुस्सा आता है, अकारण जलन होती है

दही कैसी खाना?

दही खट्टा दुश्मन को भी नहीं खिलाना और दही खाने से तो नाड़ियों में blockage होता है बड़ी उम्र में; दही को मथ के लस्सी बनाओ फिर मक्खन सब खा लो; लस्सी पी सकते हैं, दही नहीं, और दही खट्टा तो बहुत नुकसान करता है

रक्त-पित्त

रक्त-पित्त की तकलीफ है तो गुलाब जल में किशमिश भीगा कर खाए; तकलीफ शांत होती है;

करेला सेवन

हफ्ते में एक दिन करेला खाना स्वास्थ्य के लिए अच्छा है (कड़वा रस भी शरीर के स्वास्थ्य के लिए ज़रूरी है )

तिल का तेल कब नहीं खाना चाहिए?

अमावस्या और रविवार को तिल का तेल नहीं खाना चाहिए

For strong teeth

रात को नमक - सरसों के तेल से रगड़कर सोयें, तो दांत मज़बूत रहते हैं

Caution on Sunday

रविवार को अदरक, टमाटर, लाल रंग के कपड़े, गुस्सा बढ़ाते हैं 
अदरक को फ्रिज (refrigerator) में नहीं रखा जाता

AC Cooler Direction

पश्चिम दिशा में air-conditioner (a।c.)/cooler से बीमारी होगी

Sleeping related tips

  • शयन करने से १-२ घंटे पहले हाथ पैर धो लेने चाहिए रात को गीले पैर नहीं सोना चाहिए
  • रात्रि को स्नान नहीं करना चाहिए (महिलाएं मासिक धर्म के दौरान कर सकती हैं)
  • ceiling fan के नीचे नहीं सोना चाहिए, नहीं तो गठिया का रोग हो जाता है; खिड़की खोलकर सोयें, अथवा तो table fan से थोडी हल्की हवा आती रहे;
  • रात को सोने से पहले भगवन्नाम की पुनावृत्ति करें; हास्य प्रयोग करें और हाथ ऊपर करें - भगवान् की शरणागति - हम जैसे तैसे हैं, तुम्हारे हैं; इस प्रकार सोते समय भावना करें कि हम भगवान् की गोद में जा रहे हैं
  • सुबह उठकर थोडी देर शांत बैठें; कोई परेशानी हो, तो गुरुमंत्र का जप करें भूमध्य में देखते हुए; इस प्रकार गुरुदेव के साथ मानसिक contact कर लें, फिर निर्णय लें;
-25th Jan'09, Vrindavan
. सोते समय सिराना (pillow) पूर्व या दक्षिण दिशा में होना चाहिए उत्तर या पश्चिम दिशा में सिराना है तो रोग, चिंता बढ़ेंगे

Speak the truth

सत्य बोलने से लक्ष्मी, प्रसन्नता, आरोग्य और भगवत प्राप्ति हो जाती है; झूठ बोले तो तीन दिन उपवास करें, ईश्वर से प्रार्थना करें, क्षमा मांगें;

असत्य बोलने के पाप से प्रकृति फिर ऐसी योनि देगी जिस में वाणी नहीं मिलेगी - भैंसा/कुत्ता बन गए; वाणी का दुरूपयोग न हो; सत्य, मधुर, हितकर, सारगर्भित, प्रसंगोचित, सामने वाला भगवान की तरफ लगे या उनका ज्ञान बढ़े ऐसा विचार कर बोलें; शत्रु के प्रति भी कटु वचन का प्रयोग नहीं करना चाहिए

कान की तकलीफ

सरसों का तेल डालने से सौ साल तक ठीक से सुन सकते हैं; प्याज़ का रस दाल दे, अगर कोई बहरा हो गया हो तो

सूर्य स्नान

आठ मिनट पेट के बल पर सुबह के सूर्य की किरणें लें; दस मिनट पीठ के बल पर सूर्य की किरणें लें; सिर ढका रहे; इस प्रकार सूर्य की किरणों में शरीर को स्नान कराओ; इसके बराबर की कोई औषधि दुनिया में नहीं है; इस प्रयोग से रोग ऐसे भागेंगे जैसे सूर्योदय होने से अन्धकार भागता है

पेशाब सम्बन्धी तकलीफें

जौ का आटा की रोटियां खाओ पेशाब सम्बन्धी तकलीफें दूर होते हैं।

पौष्टिक आटा
गुरुदेव ने आटा को पौष्टिक बनने के लिए निम्नलिखित composition बताया है:
गेहूं - ५ kg
सोयाबीन - १ kg
मक्का - १ kg
जाऊ - १ kg
इसके अलावा अपने रूचि और पाचन के अनुसार बाजरी भी डाल सकते हैं।


स्नान

गो-झरण से स्नान कराने से रोग नष्ट होंगे पाप नष्ट होंगे…स्नान में गो-झरण डाले…पंचगव्य से स्नान करने से पापनाशिनी उर्जा मिलती है

कभी बिलि के पत्ते से स्नान करो , कभी उबटन का स्नान करो..कभी गो-झरण का स्नान करो तो कभी दही लगा के स्नान करो… दही लगाके स्नान करने से लक्ष्मी प्राप्ति होती है ..ये सभी शरीर के लिए है….शरीर स्वस्थ रख के अंतरात्मा में आने के लिए ये सब है…

भूख लगाने के लिए

इन दिनों में अदरक , खजूर , सैंधा नमक और मिर्च की चटनी बना के भोजन से पहले खाए तो भूख अच्छी लगेगी॥