Friday, December 30, 2011

चंद मिनटों में इस नुस्खे से गर्दन व कंधे का दर्द हो जाएगा रफूचक्कर

बदलते समय ओर परिस्थितियों को रोकना भले ही हमारे हाथों में न हो, लेकिन अपनी लॉइफ स्टाइल में आवश्यक फेरबदल करके हम कई शारीरिक और मानसिक समस्याओं से निजात पा सकते हैं।स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं कि यदि आप दफ्तर से गर्दन और कंधे का दर्द के साथ में लेकर लोटते हैं तो नियमित व्यायाम जरूरी है। ऐसा करने से मांसपेशियों के दर्द में चंद मिनटों में ही राहत मिल सकती है। साफ-सुथरे स्थान पर चटाई बिछाकर बैठें। गर्म तौलिए को गर्दन के चारों ओर लपेट लें। कुछ सेकंड तक ऐसे ही रहें। इस क्रिया को छह बार दोहराएं।

तौलिए के दोनों किनारों को खींचकर पकड़ें और अपने कंधे के चारों ओर लपेटें। उंगलियों का हलका सा दबाव पिछले कंधे पर बनाए रखें। हथेलियों को इधर-उधर घुमाते रहें ताकि कंधे पर दबाव बना रहे। थोड़ी देर ऐसा करने के बाद तौलिया हटा लें। इसे छह बार दोहराएं। व्यक्ति स्वाभाविक तौर पर सदा स्वस्थ नहीं रह सकता, इसलिए फिट बने रहने के लिए निरंतर प्रयास की जरूरत होती है

ठंड में दस दिनों तक ऐसे खाएं दस दाख और देखें कमाल

आयुर्वेद के अनुसार ठंड मे ड्रायफ्रूटस के सेवन को बहुत लाभदायक माना गया है। दाख भी ऐसा ही एक ड्रायफ्रूट है। लेकिन बड़ी दाख यानी मुनक्का छोटी दाख से अधिक लाभदायक होती है। आयुर्वेद में मुनक्का को गले संबंधी रोगों की सर्वश्रेष्ठ औषधि माना गया है। मुनक्का के औषधीय उपयोग इस प्रकार हैं-



- शाम को सोते समय लगभग 10 या 12 मुनक्का को धोकर पानी में भिगो दें। इसके बाद सुबह उठकर मुनक्का के बीजों को निकालकर इन मुनक्कों को अच्छी तरह से चबाकर खाने से शरीर में खून बढ़ता है। इसके अलावा मुनक्का खाने से खून साफ होता है और नाक से बहने वाला खून भी बंद हो जाता है। मुनक्का का सेवन 2 से 4 हफ्ते तक करना चाहिए।



- मुनक्का का सेवन करने से कमजोरी मिट जाती है। इससे मल-मूत्र भी साफ हो जाता है।



- भूने हुए मुनक्के में लहसुन मिलाकर सेवन करने से पेट में रुकी हुई वायु (गैस) बाहर निकल जाती है और कमर के दर्द में लाभ होता है।



-  250 ग्राम दूध में 10 मुनक्का उबालें फिर दूध में एक चम्मच घी व खांड मिलाकर सुबह पीएं। इससे वीर्य के विकार दूर होते हैं। इसके उपयोग से हृदय, आंतों और खून के विकार दूर हो जाते हैं। यह कब्जनाशक है।



- सर्दी-जुकाम होने पर सात मुनक्का रात्रि में सोने से पूर्व बीज निकालकर दूध में उबालकर लें। एक खुराक से ही राहत मिलेगी। यदि सर्दी-जुकाम पुराना हो गया हो तो सप्ताह भर तक लें।



- जिन व्यक्तियों के गले में निरंतर खराश रहती है या नजला एलर्जी के कारण गले में तकलीफ बनी रहती है, उन्हें सुबह-शाम दोनों वक्त चार-पांच मुनक्का बीजों को खूब चबाकर खा ला लें, लेकिन ऊपर से पानी ना पिएं। दस दिनों तक निरंतर ऐसा करें।



- जो बच्चे रात्रि में बिस्तर गीला करते हों, उन्हें दो मुनक्का बीज निकालकर रात को एक सप्ताह तक खिलाएं।

ब्लैक हेड्स और व्हाईट हेड्स में सौ-फीसदी कारगर हैं ये आयुर्वेदिक उपाय

चेहरे पर ब्लैक हेड्स होना एक आम समस्या है। दरअसल युवाअवस्था में ब्लैक हेड्स होने की एक वजह हार्मोनल डिसऑर्डर भी होता है। हारमोंस का बैलेंस बिगडऩे से ऑयल ग्लैंड्स ज्यादा ऑयल रिलीज करने लगते है, जिसकी वजह से पोर डिवेलप हो जाते हैं। यही ब्लैक हेड्स होने की वजह बनते हैं

 - चावल का आंटा,जौ का आंटा दरदरा पीस कर दूध में भिंगोकर हल्के हाथों से चेहरे पर मसाज करें ,इसके अलावा पानी का भाप चेहरे पर लें आपको इस समस्या से छुटकारा मिलेगा।

- एक भाग नींबू का रस एवं एक भाग मूंगफली का तेल मिलाकर प्रभावित हिस्से में लगायें, ब्लैक हेड्स को ठीक करने के लिए यह अचूक नुस्खा है।

-  केवल उबले दूध में नींबू का रस मिलाकर भी चेहरे पर लगाने से ब्लैक हेड्स एव फटी हुई स्कीन में लाभ मिलता है।

- मूली के बीज का पाउडर का पेस्ट बनाकर हल्के हाथों से चेहरे पर लगायें,इससे भी ब्लैक हेड्स निकल जाते हैं।

- कच्चे आलू को ग्राईंड कर पिप्म्पल्स,व्हाईट हेड्स या ब्लैक हेड्स पर लगाएं।

- अन्नानास के छिलके का पाउडर भुनकर पेस्ट  बनाएं और  नींबू के रस के साथ मिलाकर चेहरे पर लगायें आपको व्हाईट हेड्स से मुक्ति मिल जाएगी।

- सहिजन की फली और पत्तियों  का पेस्ट बनाकर आप यदि चेहरे पर लगाएं तो व्हाईट हेड्स ,ब्लैक हेड्स एवं पिम्पल्स सभी में लाभ मिलता है।

Thursday, December 29, 2011

लहसुन व हींग का देसी प्रयोग, दांत के दर्द में दिखाएगा जादू सा असर

दांतों की सफाई न करने पर दांतों के बीच फंसे अन्न का कण बाहर नहीं निकल पाता है जिससे दांतों के बीच फंसे अन्न के कण रात को सोने पर मुंह से निकलने वाली लार के प्रभाव में आकर सडऩे लगते हैं। उन अन्न के कणों के सडऩे से दांतों की जड़े खोखली हो जाती हैं। खोखली जगहों में भोजन का अंश भरने से दांत सडऩे लगते हैं तथा दांतों में अत्यधिक तेज दर्द होने लगता है। अगर आप भी दांतों के दर्द से परेशान हैं तो नीचे लिखे देसी नुस्खों को एक बार जरूर आजमाएं।

 - लहसुन की एक कली थोडे से सैंधा नमक के साथ पीसें और इसे दुखने वाले दांत पर रख कर दबाएं यह एक रामबाण उपाय है।

- रोजान एक लहसुन कली चबाकर खाने से दांत की तकलीफ से छुटकारा मिलता है।

- दांत की केविटी में थोडी सी हींग भरदें। दर्द में राहत मिलेगी।

- तंबाकू और नमक महीन पीसलें। इस टूथ पावडर से रोज दंतमंजन करने से दांत के दर्द से मुक्ति मिल जाती है।

-  बर्फ का टुकडा दुखने वाले दांत के ऊपर या पास में रखें। बर्फ उस जगह को सुन्न करके लाभ पहुंचाता है।

- गरम पानी की थैली से सेक से भी राहत मिलती है।

-  प्याज को कूटकर लुग्दी दांत पर रखना हितकर उपचार है।

-  लौंग के तैल का फाया दर्द वाले दांत के मध्य रखने से निश्चित ही लाभ होगा। 

- दांत के दर्द के रोगी को दिन में 3-4 बार एक लौंग मुंह में रखकर चूसने की सलाह दी जाती है।

- पुदिने की सूखी पत्तियां पीसकर दांतों के बीच रखें, ऐसा दिन में 10 बार करने से लाभ मिलेगा।

- दो ग्राम हींग नींबू के रस में पीसकर पेस्ट बनाकर मंजन करें।

कुदरती फंडा: जवानी कायम रहेगी और छोटी-मोटी बीमारियां पास भी नहीं आएगी


हमेशा स्वस्थ और जवान रहना तो सभी चाहते हैं और इसके लिए कई औषधीयां और नुस्खे भी अपनाते हैं। लेकिन आज हम आपको एक ऐसा योगासन बताने जा रहे हैं, जिसे अपनाने से छोटी- मोटी बीमारियां आपके पास भी नहीं फटकेगी। इस आसन से हमारे शरीर की आंतरिक और बाह्य शक्ति में गुणोत्तर वृद्धि होती है। कुछ ही दिनों में इस आसन के लाभ नजर आने लगते हैं।



बकासन की विधि



समतल पर स्थान पर कंबल आदि बिछाकर बैठ जाएं। अब दोनों हाथों को अपने सामने भूमि पर रखें। सांस सामान्य रखें। दोनों घुटनों को हाथों की कोहनियों पर स्थिर कीजिएं। सांस अंदर की ओर लेते हुए शरीर का पूरा भार धीरे-धीरे हथेलियों पर आने दें और अपना शरीर ऊपर की ओर उठा लें। यह आसन काफी कठिन है परंतु निरंतर अभ्यास होने पर आसन की पूर्ण अवस्था प्राप्त की जा सकती है। परंतु ध्यान रखें यदि आपके हाथों में कोई परेशानी या बीमारी हो तो यह आसन ना करें।



बकासन के लाभ



बकासन में हमारे शरीर का पूरा भार हाथों पर होता है अत: इस आसन से हमारे हाथों के स्नायुओं को विशेष बल एवं आरोग्य मिलता है। मुख की कान्ति बढ़ती है। सुंदरता में आश्चर्यजनक बढ़ोतरी होती है। जवानी बनी रहती है। शरीर हष्ट-पुष्ट बना रहता है। इस आसन को निरंतर करने से शरीर की कई छोटी-छोटी बीमारियां हमेशा दूर रहती है।

Wednesday, December 28, 2011

ये फंडू टिप्स अपनाएं और तनाव को भूल जाएं

बहुत अधिक वर्किंग प्रेशर के कारण ऑफिस या वर्किंग प्लेस पर ही नहीं। मानसिक अशांति घर तक पीछा नहीं छोड़ती। इसका बुरा प्रभाव घर के रिश्तों पर भी पड़ता है। इससे बचने के लिए संयमित दिनचर्या की योजना बनाने से दिनभर के कार्य के बाद भी दिमाग शांत ही रहेगा और पारिवारिक रिश्ते हमेशा खुशियां देने वाले ही रहेंगे।

स्वस्थ और निरोगी शरीर के लिए आवश्यक है कि आप दिमाग शांति और सुकुन महसूस करें। परंतु आज के दौर में दिमाग को शांति मिलना लगभग असंभव सा ही है। फिर भी प्रयत्न करने पर आप कुछ हद तक मानसिक तनाव को दूर कर सकते हैं-

- दिन की शुरुआत योग, व्यायाम, ध्यान से आदि से करें।

- अपने जीवन साथी या अविवाहित अपने प्रेमी के साथ कुछ समय प्रतिदिन अवश्य बिताएं।

- लगातार लंबे समय पर कार्य न करें। थोड़ी-थोड़ी देर में शरीर और दिमाग को विश्राम अवश्य दें।

- खाना-पीना समय पर करें।

- किसी भी तरह की चिंता मित्रों के पलभर के साथ से ही दूर हो जाती है, इसलिए अच्छे मित्रों के साथ समय बिताएं।

- शांत संगीत मन को सुकून देता है, थोड़ा समय संगीत के लिए भी निकालें।

- मानसिक तनाव की सबसे बड़ी वजह होती है पैसा। पैसे जुड़ी समस्याओं जल्द से जल्द सुलझा लें।

- कार्य को समय पर पूरा करें और योजना बनाकर कार्य करें।

- एक साथ कई कार्य करने में उलझे, एक-एक कार्य निपटाएं।

- प्रतिदिन कम से कम 6-8 घंटे की सुकुन की नींद अवश्य लें।

रूक जाएगा कम उम्र में बालों का झडऩा, रखें इन छोटी -छोटी बातों का ध्यान

कम उम्र में  बालों का झडऩा या गंजापन आना सिर्फ पुरुषों में ही नहीं बल्कि महिलाओं में भी एक आम समस्या बन गई है। लेकिन यही समस्या यदि 20-30 वर्ष की युवा उम्र में ही सामने आने लगे तो प्रभावित व्यक्ति का चिन्तित होना स्वाभाविक हो जाता है। इस समस्या के समाधान हेतु सबसे पहले इस समस्या से प्रभावित लोगों को निम्न नियमों को अपनी दिनचर्या में शामिल करना बहुत आवश्यक होता है। 

 - देर रात तक जागना और सुबह देर तक सोए रहना इस समस्या का मुख्य कारण है अत: सबसे पहले जल्दी सोकर सुबह जल्दी जागने की दिनचर्या अनिवार्य रुप से बनाना आवश्यक समझें ।

- महिलाएं प्राय: इस सोच से अपने बाल काट लिया करती हैं कि काटने से बाल अधिक बढेंगे जबकि यह एक गलत धारणा है । अत: महिलाएं इस सोच से अपने बाल कभी न काटें ।

- अपना कंघा व तौलिया हमेशा अलग रखें, दूसरे का कंघा व टावेल कभी भी प्रयोग में न लें ।



- बालों को कभी भी किसी बाजारी या इश्तहारी शैम्पू से न धोएं ।



 - हमेशा एक ही प्रकार का तेल प्रयोग करें । तेल बदल-बदल कर नहीं । नारियल के तेल में नींबू का रस मिलाकर लगाने से बाल स्वस्थ व चमकीले बने रह सकते हैं ।



 -  दोनों वक्त सुबह-शाम या रात को सोने से पहले शौच क्रिया अवश्य करें जिससे पेट साफ रहे और कब्ज न रहने पाए । किसी भी स्थिति में तनाव से बचें।

-  भोजन के साथ सलाद के रुप में मूली, गाजर, हरी ककडी, पके टमाटर, पालक, पत्ता गोभी आदि कोई भी हरी पत्तेदार सब्जी का सलाद काली मिर्च व सेंधा नमक बुरककर बिना चूके प्रतिदिन कम से कम एक बार तो अधिकतम मात्रा में अवश्य खाएं।

एक नहीं अनेक रोग दूर हो सकते हैं इस एक तरीके से

 स्वस्थ शरीर सभी चाहते हैं लेकिन स्वस्थ शरीर के लिए रोजाना योग व नियमित दिनचर्या इसके लिए आवश्यक है। कुछ योगासन ऐसे हैं जिन्हें नियमित रुप से करने से शरीर न सिर्फ स्वस्थ रहता है बल्कि एनर्जी भी मिलती है।

सिद्धासन की विधि-

समतल स्थान पर कंबल आदि आसन पर बैठकर पैर खुले छोड़ दें। अब बायें पैर की एड़ी को गुदा और जननेन्द्रिय के बीच रखें। दाहिने पैर की एड़ी को जननेन्द्रिय के ऊपर इस प्रकार रखें जिससे जननेन्द्रिय और अण्डकोष के ऊपर दबाव न पड़े। पैरों का क्रम बदल भी सकते हैं। दोनों पैरों के तलवे जंघा के मध्य भाग में रखें। हथेली ऊपर की ओर रहे इस प्रकार दोनों हाथ एक दूसरे के ऊपर गोद में रखें। अथवा दोनों हाथों को दोनो घुटनों के ऊपर ज्ञानमुद्रा में रखें। आंखें खुली अथवा बंद रखें। श्वास सामान्य रखें और ध्यान केन्द्रित करें। पांच मिनट तक इस आसन का अभ्यास कर सकते हैं। ध्यान की उच्च कक्षा आने पर शरीर पर से मन की पकड़ छूट जाती है।

सिद्धासन के लाभ-

सिद्धासन से शरीर की समस्त नाडिय़ों का शुद्धिकरण होता है। ध्यान लगाना सरल हो जाता है। पाचनक्रिया नियमित होती है। श्वास के रोग, हृदय रोग, जीर्णज्वर, अजीर्ण, अतिसार, शुक्रदोष आदि दूर होते हैं। मंदाग्नि, मरोड़ा, संग्रहणी, वातविकार, क्षय, दमा, मधुप्रमेह, प्लीहा की वृद्धि आदि अनेक रोगों दूर होते है। ब्रह्मचर्य-पालन में यह आसन विशेष रूप से सहायक होता है। विचार पवित्र बनते हैं। सिद्धासन का अभ्यासी भोग-विलास से बच सकता है। वीर्य की रक्षा होती है। स्वप्नदोष के रोगी को यह आसन अवश्य करना चाहिए। मानसिक शक्तियों का विकास होता है। कुण्डलिनी शक्ति जागृत करने के लिए यह आसन प्रथम सोपान है।

Tuesday, December 27, 2011

शतावरी पाक: ठंड मे एक अनोखी दवा बनाकर खाएं और देखें कमाल

ठंड में कुछ औषधीयां स्त्री और पुरुष दोनों के लिए समान रूप से पोषक व बलवर्धक है। ऐसी ही एक औषधि है शतावरी। आज हम आपको बताने जा रहे हैं शतावरी पाक की विधि जो सर्दियों में शरीर के लिए विशेष रूप से लाभदायक है।

सामग्री- शतावरी, पवार और खिरेंटी तीनों की जड़ 100-100 ग्राम, घी 250 ग्राम, मावा 450 ग्राम, एक किलो मिश्री, लौंग, छोटी इलायची, जायफल, जावित्री, छोटे गोखरु- ये पांचों 10-10 ग्राम, 200-200  ग्राम।



विधि- 
तीनों जड़ों को कूट पीस कर महीन छान ले। कढ़ाई में सब घी डाल कर भून लें। मावा अच्छी तरह सेंक कर इसमें मिला दें। मिश्री की चाशनी बना कर इसमें चूर्ण मिला हुआ मावा डाल कर गरम करें। फिर इस चूर्ण को डालकर भून लें। मावा अच्छी तरह सेंक कर लौंग, इलायची आदि।पांचों को पीस कर डाल दें। किशमिश व कतरी हुई बादाम डालकर घी का हाथ लग थाली में फैला कर बर्फी जमा लें। 20-20  ग्राम वजन की बर्फी काट कर बर्नी में भर रख लें।

 सेवन विधि- एक-एक बर्फी सुबह व रात को सोते समय खाकर एक गिलास मीठा दूध पीना चाहिए। पूरे शीतकाल इस पाक का सेवन करने से सब प्रकार की कमजोरियां नष्ट हो कर शरीर में खूब बलवीर्य की वृद्धि होती है।

अचूक आयुर्वेदिक उपचार: कैसी भी हो खांसी बस दो दिन में ठीक हो जाएगी!


बदलते मौसम में कोई भी खांसी की गिरफ्त में आ सकता है। इसके अलावा कई बार एलर्जी या ठंडा-गर्म खाने से भी खांसी हो जाती है। लेकिन लगातार खांसी बने रहना चिंता का विषय है क्योंकि खांसी क ई बड़े रोगों का कारण भी बन सकती है। इसीलिए जब खांसी हो तो इन घरेलू उपायों को जरूर अपनाएं, कैसी भी खांसी हो शीघ्र राहत मिलेगी।

 - 10 ग्राम फिटकरी को तवा गर्म करके उस पर रख दें। थोड़ी देर बुदबुदाहट के बाद वह फिटकरी ठंडी होकर बैठ जावेगी । फिर उसी फिटकरी को चाकू जैसी किसी नोकदार वस्तु से उस गर्म तवे पर पलट दें। थोड़ी देर में वह फिटकरी बुदबदाते दिखेगी व बैठ जावेगी । यह शोधित फिटकरी कहलाती है । इस फिटकरी को बेलन की मदद से बिल्कुल बारीक पीस लें और इसमें 100 ग्राम शक्कर का बुरा मिलाकर इसे एकजान करके इसकी बराबर वजन की 15 पुडिय़ा बना लें। अगर खांसी कफ वाली हो तो इस पुडिय़ा को सुबह-शाम पानी से लें, सुखी हो तो गुनगुने दूध से इसका सेवन करें।

Monday, December 26, 2011

छोटे-छोटे उपाय जो आपको छरहरा बना देंगे

जो लोग हमेशा छरहरा बने रहना चाहते हैं, वे कुछ न कुछ फंडे अवश्य अपनाते हैं जिससे उनका शरीर फीट रहता है। कुछ सामान्य टिप्स जिससे आप भी फिट फि गर प्राप्त कर सकते हैं-



- प्रतिदिन सुबह उठने के बाद ज्यादा से ज्यादा 2 घंटे नाश्ता  अवश्य करें। नाश्ता में कुछ भी ले सकते हैं जो आपके स्वास्थ्य के ठीक है।



- खाने में रोटी और चावल अलग-अलग समय पर खाएं।



- प्रतिदिन एक केला, सेब और फ्रूट ज्यूस अवश्य लें। दिनभर थोड़ी-थोड़ी देर में  फ्रूटआदि खाते रहें।



- ज्यादा मिठाई ना खाएं।



- लंच और डीनर प्रतिदिन समय पर लें।



- तली हुई चीजों से भी दूर रहें।



- प्रतिदिन सुबह उठकर हल्की एक्सरसाइज या व्यायाम अवश्य करें।



- कम से कम 15-20 मिनिट प्रतिदिन ध्यान लगाएं। आंख बंद करके शांत बैठें और मस्तिष्क को आराम दें।



- प्रतिदिन सुबह या शाम को लॉन्ग वॉक पर जाएं।



- चटपटे खाने और मैदे से बनी खाने की चीजों से दूर रहें।



- खाने पहले सलाद अवश्य खाएं।



- खाने के बाद छाछ पीएं।



- रात का खाना सोने से कम से कम 2 घंटे पहले खा लें।



- खाने के तुरंत बाद कभी न सोएं।



- कुछ ना कुछ शारीरिक कार्य अवश्य करते रहें। जैसे डांस, वॉक, एक्सरसाइज आदि। 

Sunday, December 25, 2011

बुढ़ापे के प्रभाव को कम कर सकता है दूध अगर.....

दूध मनुष्य के लिये सर्वोत्तम आहार है क्योंकि दूध में वे सभी पोषक तत्व मौजूद होते हैं, जो कि शरीर के सम्पूर्ण विकास के लिये अनिवार्य होते हैं। आयुर्वेद ग्रथों में पुरुषों के लिये प्रतिदिन कम से कम 250 मिली ग्राम यानी कि लगभग1 गिलास दूध बहुत आवश्यक बताया गया है। आयुर्वेद के अनुसार शाम के भोजन के 2-3 घंटे बाद तथा सोने से 1 घंटा पहले प्रतिदिन सभी को दूध का सेवन अवश्य करना चाहिये, खासकर पुरुषों के लिये तो इसे अनिवार्य ही बताया गया है क्योंकि...



- पुरुषों को घर से बाहर दौड़-धूप तथा शारीरिक श्रम करना पड़ता जिसकी भरपाई सिर्फ दूध जैसा कम्पलीट फूड ही कर  सकता है।



- प्रतिदिन के काम-काज के दौरान हमारे शरीर के हजारों पुराने कोष नष्ट हो जाते हैं, तथा नए कोषों के बनने के लिये दूध ही सर्वश्रेष्ठ साधन है।



- स्त्रियों की बजाय पुरुषों में उम्र का ढलान ज्यादा तेजी से आता है तथा पुरुषों में बुढ़ापे के प्रभाव को धीमा करने में दूध बेहद कारगर सिद्ध होता है।

बुढ़ापे के प्रभाव को कम कर सकता है दूध अगर.....


थोड़ी सी बादाम दिलवा सकती है आपको इस जानलेवा बीमारी से छुटकारा

बादाम से जुड़ी ये एक खबर आपके लिये राहत और खुशी का कारण बन सकती है। वह खुशखबर यह है कि अपने प्रतिदिन के नाश्ते में बादाम को भी शामिल करें। अमेरिका के यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिसिन तथा पेनसिल्वेनिया यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का कहना है कि बादाम खाने में से हानिकारण कोलेस्ट्रॉल का स्तर घटता है साथ ही इंसुलिन को सक्रिय करता है।

इससे ब्लड शुगर का स्तर नियत्रित रहता है।एक मुठ्ठी बादाम में 164 कैलोरी और 7 ग्राम प्रोटीन पाया जाता है। भारत में इस बीमारी से हैरान-परेशान लोगों की संख्या दिनो-दिन बढ़ती ही जा रही है। आंकड़े तो बताते हैं कि अकेले भारत देश में ही डायबिटीज से ग्रसित लोगों की संख्या 5 करोड़ के स्तर को पार कर चुकी है।

बादाम डायबिटीज में फायदेमंद है यह बात तो हालिया शोध से पता चली है लेकिन इसके दूसरे कई चमत्कारी गुणों के विषय में तो अधिकांश भारतवासी परिचित हैं ही। कमजोर स्मरण शक्ति, मानसिक तनाव, स्नायुदौर्बल्य, हड्डियों की कमजोरी, बौद्धिक क्षमता की कमी...आदि कई बेहद कठिन समस्याओं में भी बादाम का प्रयोग बहुत ही फायदेमंद और कारगर होता है।

भूख नहीं लगती तो आजमाएं ये देसी तरीका

खाना ठीक से न पचने पर गैस, कब्ज या एसीडिटी जैसी समस्याएं हो ही जाती है। माना जाता है कि हर बड़ी बीमारी की शुरुआत पेट से ही होती है। इसीलिए सही पाचन न होने की स्थिति में कई बीमारियों का सामना करना पड़ता है। इनसे बचने के लिए प्रतिदिन योग करना चाहिए। स्वस्थ पाचनतंत्र के लिए नौकासन श्रेष्ठ उपाय है। इसके नियमित अभ्यास से पेट से जुड़ी सभी समस्याएं दूर होती हैं। इस आसन में हमारा शरीर नौका के समान दिखाई देता है, इसी कारण इसे नौकासन कहते है।



नौकासन करने की विधि- समतल स्थान पर दरी या कबंल आदि बिछाकर उस पर पीठ के बल लेट जाएं। अब दोनों हाथों, पैरों और सिर को ऊपर की ओर उठाएं। जैसा कि चित्र में दिखाया गया है। इसी अवस्था को नौकासन कहते हैं। कुछ देर इसी पोजीशन में रहें और फिर पुन: धीरे-धीरे हाथ, पैर और सिर को जमीन पर ले आएं।



नौकासन के लाभ: इस आसन से आपका पाचन तंत्र स्वस्थ रहेगा, भूख बढ़ेगी, भोजन का पाचन ठीक से होगा, हर्निया की समस्या में राहत मिलेगी। अंगूठे से अंगुलियों तक खिंचाव होने के कारण शुद्ध रक्त तीव्र गति से प्रवाहित होता है, जिससे शरीर निरोगी बना रहता है। यदि आपको नींद अधिक आती है तो उसे नियंत्रित करने में ये नौका आसन सहायक है। इस आसन में अपने इष्ट देव के मंत्रों का जप करने से त्वरित लाभ प्राप्त होता है।

भूख नहीं लगती तो आजमाएं ये देसी तरीका


टमी कंट्रोल करना हैं तो डाइटिंग मत कीजिए, खाइए ऐसा खाना

मोटापा कम करने के लिए या वजन घटाने के लिए अधिकतर लोग घंटों पसीना बहाते हैं या भूखे रहते हैं। लेकिन कई बार बहुत डाइटिंग करने और एक्सरसाइज करने पर भी वजन कम नहीं होता है। अगर आप भी दुबला होने के लिए डाइटिंग करने की सोच रहे हैं तो जनाब! जरा ठहर जाइए, क्योंकि ताजा शोध के अनुसार भूखे रहने से नहीं वरन गुणवत्ता वाला भोजन जैसे दही और अखरोट वजन कम करने में ज्यादा प्रभावी होते हैं।



इस शोध में अनुसंधानकर्ताओं ने अपने अध्ययन में पाया कि जितना अच्छा भोजन होगा, लंबे अंतराल में उसका वजन उतना ही कम होगा। वैज्ञानिकों ने बताया कि छरहरी काया बरकरार रखने के लिए खाना कम करने की बजाय ज्यादा जरूरी है स्वस्थ खाना लेना। वैज्ञानिकों ने 1,20,000 लोगों का अध्ययन किया जिसमें 83 महिलाएं थीं। उन्होंने पाया कि दही, अखरोट, फल और सब्जियों से वजन कम करने में सहायता मिलती है।

बिना फेशियल ही दमकने लगेगा चेहरा इस नेचुरल तरीके से

किसी को भी आकर्षित करने के लिए अच्छे व्यवहार के साथ आपकी सुंदरता काफी महत्व रखती है। सुंदरता के लिए जरूरी है कि आपकी त्वचा स्वस्थ और चमकदार हो। चेहरा आकर्षक बनाने के लिए हंसासन श्रेष्ठ उपाय है।



हंसासन की विधि



किसी साफ-स्वच्छ वातावरण वाले स्थान पर कंबल बिछाकर घुटनों के बल बैठ जाएं। फिर दोनों हाथों को सामने जमीन पर टिकाकर रखें। अंगुलियों को आगे की ओर करके खोलकर रखें। दोनों हाथों के बीच दूरी रखें। घुटनों को तथा कोहनियों को मोड़कर पीछे की ओर ले जाएं। इसके बाद धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए दोनों हथेलियों पर जोड़ देकर अपने शरीर के पिछले भाग को ऊपर उठाएं तथा शरीर का पूरा भार हथेलियों पर रखकर संतुलन बनाएं। अब गर्दन को आगे की ओर झुकाकर शरीर का आकार पक्षी की तरह बनाएं। इस स्थिति में कुछ देर रुके। इस आसन को 2-3 बार करें। यह आसन कठिन होता है परंतु कुछ दिन नियमित करने के बाद यह सहज हो जाएगा। सांस सामान्य रखें।



हंसासन के लाभ-



इस आसन से हाथ व पैरों की मांसपेशियां मजबूत होती है तथा गर्दन का मोटापा कम होता है। इससे छाती मजबूत, पुष्ट व चौड़ा होता है तथा शरीर शक्तिशाली बनता है। इस आसन से चेहरे पर तेज, चमक तथा शरीर में स्फूर्ति व ताजगी आती है। नाड़ी-तंत्र सही रूप से काम करने लगता है, जिससे रक्त संचार तेज हो जाता है।  यह पेट की चर्बी को कम कर मोटापे को घटाता है। इससे फेफड़े स्वच्छ एवं अधिक सक्रिय बने रहते हैं। हंसासन पेट दर्द, पीठ दर्द, कमर दर्द, पसली का दर्द जैसे कई रोगों में राहत प्रदान करता है।

शॉर्टकट : सिगरेट छुट जाएगी, वो भी बिना मशक्कत

कहते हैं किसी चीज की आदत हो जाए, तो उसे छोडऩे के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती है। फिर आदत अच्छी हो या बुरी यह बात दोनों के लिए लागू होती है। किसी कार्य का बार-बार किया जाना या अभ्यास आदत का रूप ले लेती है। इस आदत या अभ्यास को विपरीत आदत द्वारा बदला जा सकता है। विज्ञान के अनुसार शरीर एक मशीन है। और उस मशीन में आपने जो आदतें डाली हैं, उन आदतों को आपको नई आदतों से बदलना पड़ेगा नई बातें सुनकर नहीं। 



अगर आपको सिगरेट पीना छोडऩा है तो आपको ताजगी पैदा करने की दूसरी आदतें डालना पड़ेंगी। नहीं तो आप कभी नहीं छोड़ पाएँगे।समझिए कि मैं आपको कहता हूं कि जब भी आपको सिगरेट पीने का खयाल हो तब गहरी दस सांस लें, जिनसे ऑक्सीजन ज्यादा भीतर चला जाएगा। तो ताजगी ज्यादा देर रुकेगी, जितनी देर निकोटिन से रुकती है, और ज्यादा स्वाभाविक होगी। यह एक नई आदत है। 



जब भी सिगरेट पीने का खयाल आए, गहरी दस सांस लें। और सांस लेने से शुरू मत करें, सांस निकालने से शुरू करें। जब भी सिगरेट पीने का खयाल आए एक्झेल करें, जोर से साँस को बाहर फेंक दें, ताकि भीतर जितना कार्बन डाइआक्साइड है, बाहर चला जाए। फिर जोर से साँस लें, ताकि जितना कार्बन डाइआक्साइड की जगह थी उतनी ऑक्सीजन ले ले। आपके खून में ताजगी दौड़ जाएगी। तब आप सिगरेट छोड़ सकते हैं। क्योंकि उससे ज्यादा बेहतर, ज्यादा अनुकूल, ज्यादा स्वाभाविक, ज्यादा श्रेष्ठ विधि आपको मिल गई। तो सिगरेट छूट सकती है। नहीं तो कोई उपाय नहीं।

ऐसी मछलियां लगा देती है किस्मत और पैसों का जेकपॉट

मछलियों के बारे में ये सच बहुत कम लोग जानते हैं। कुछ ही लोग जानते हैं कि मछलियां आपकी किस्मत तो चमका ही देगी साथ ही इनसे आपको अचानक बड़ा धन लाभ भी हो सकता है।

फेंगशुई के अनुसार धन और सुख-शांति बढ़ाने के लिए उपाय बताए गए हैं। इन उपायों में मछलियों को भी शामिल किया गया है। फेंगशुई के अनुसार मछलियां रखना सौभाग्य, धन, मान-सम्मान में वृद्धि करने का एक कारगर उपाय है।

इनको घर में रखने से हमेशा सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है, इससे स्वास्थ्य को लाभ प्राप्त होता है साथ ही धन संबंधी कई समस्याएं दूर हो जाती हैं। 



- फेंगशुई के अनुसार गोल्डफिश पैसा देने वाली मछली होती है। इसे आप अपने शयनकक्ष, रसोईघर अथवा शौचघर को छोड़ कर घर में कहीं भी रख सकते हैं।



- इस मछली को अपने ड्रॉइंगरूम में रखने से हर काम पूरे होते हैं और किस्मत का साथ मिलता है।



- मछली घर को पूर्व, दक्षिण-पूर्व तथा उत्तर दिशा में ही रखना चाहिए। 



- अगर आपके घर में 9 गोल्डफिश है तो चायनिज वास्तु के अनुसार आपकी किस्मत और पैसे डबल होने लग जाते हैं।



- इस मछली को फिश बाउल में रखें। इनमें 8 मछलियां लाल या सुनहरी और एक काले रंग की होनी चाहिए।



- अगर कोई  गोल्डफिश मर जाती है तो आपको घबराने की जरूरत नहीं, आप उसे बदल दें और नई मछली ले आएं। ऐसा माना जाता है कि जब आपके घर की कोई गोल्डफिश मर जाती है तो वह अपने साथ कई दुर्भाग्यों को भी ले जाती है।महीने भी जीवित नहीं रहता।

Friday, December 23, 2011

Home Made Skin Paste and Tips


निम्नलिखित प्रक्रिया को अपनाइए। फल के निचोड़ से बनी सिर्फ एक ही बूँद काफी है आपकी त्वचा रक्षा के लिए। इसमें खर्च भी कम होगा और बाजारू कॉस्मेटिक जैसी मिलावट से भी परे। विभिन्न मौसम में इस्तेमाल के लिए यह एक अत्यंत सफल और वैज्ञानिक प्रक्रिया है।
सेब : यह त्वचा का तेल कम करता है।
विधि : सेब के एक बड़े टुकड़े की लुगदी बनाकर उसकी पतली तह चेहरे पर 10-15 मिनट तक लगाकर लेट जाएँ। फिर गरम पानी से चेहरा धो लें।
बादाम : रूखी त्वचा के लिए उपयोगी। यह त्वचा को पोषकता एवं कोमलता देती है।
विधि : एक कप ठंडा दूध लें। इसमें 1 औंस पीसा हुआ बादाम डालकर खूब फेंटें। फिर आधा औंस शकर उसमें मिला दें। फिर आहिस्ता-आहिस्ता मुँह, हाथ पर इसका लेप लगाएँ। 20 मिनट बाद ठंडे पानी से धो लें।
टमाटर : दूसरे अन्य फलों की अपेक्षा टमाटर में अधिक विटामिन होते हैं। यह त्वचा को रेशमी, मुलायम बनाने में सहायक है। इसके प्रयोग से त्वचा के दाग-धब्बे धीरे-धीरे कम होकर मिट जाते हैं।
विधि : टमाटर का रस, नीबू का रस, ग्लिसरीन समान मात्रा में लेकर मिलाएँ। हाथ-मुँह धोने के बाद इस मिश्रण से त्वचा की मालिश करें। आधे घंटे बाद गुनगुने पानी से धो लें।
झरबेरी : यह कांतिहीन मुरझाई त्वचा को दिव्यता प्रदान करती है। सूखी त्वचा को मुलायम बनाने के लिए मक्खन मिलाएँ।
विधि : थोड़े से मक्खन में ताजे झरबेरी पीसकर मिलाएँ। पतला लेप चेहरे पर लगाकर आधे घंटे बाद गरम पानी से धो लें। त्वचा एकदम मुलायम हो जाएगी।
तरबूज : यह प्रकृति प्रदत्त नमी देने वाला फल है। इसकी शीतलता, नमी अन्य फलों की अपेक्षा अधिक देर तक रहती है। झुलसी त्वचा के निशानों को मिटाने के लिए यह एक आदर्श फल है।
विधि : फल के सफेद भाग का रस निकालकर उसमें थोड़ा-सा शहद मिलाकर चेहरे पर लगाएँ। सूखने पर फिर लगाएँ। ऐसा 10-15 मिनट तक करें। चाहें तो इस रस में कॉटन भिगोकर चेहरे पर फैला लें। फिर ठंडे पानी से धो लें।
खीरा : तैलीय त्वचा के तेल को सामान्य रखने तथा कांतिहीन त्वचा में कांति लाने के लिए खीरे का रस प्रकृति की अनुपम देन है। इसका प्रयोग टोनिंग के तौर पर किया जाता है।
विधि : (टोनिंग) खीरे का रस निकालकर चेहरे पर बार-बार लगाएँ। 15-20 मिनट बाद चेहरा ठंडे पानी से धो लें। खीरे के टुकड़ों को दूध में उबालकर मैश करें। अब पूरे चेहरे पर लगाकर आधे घंटे के लिए छोड़ दें। फिर ठंडे पानी से धो लें। यह एक बेहतरीन मास्क है, जो त्वचा में कसाव लाता है।
शहद : यह त्वचा की झुर्रियाँ मिटाने में बड़ा सहायक है। यह खुश्क त्वचा को मुलायम कर रेशमी व चमकदार बनाता है।
विधि : चेहरे पर शहद की एक पतली तह चढ़ा लें। इसे 15-20 मिनट लगा रहने दें, फिर कॉटनवूल भिगोकर इसे पोंछ लें। तैलीय त्वचा वाले शहद में चार-पाँच बूँद नीबू का रस डालकर उपयोग करें।
नीम : यह त्वचा में रोग प्रतिरोधी क्षमता बढ़ाता है। इसके प्रयोग से मुँहासे में जादू जैसा लाभ होता है।
विधि : चार-पाँच नीम की पत्तियों को पीसकर मुलतानी मिट्टी में मिलाकर लगाएँ, सूखने पर गरम पानी से धो लें।
केला : यह त्वचा में कसाव लाता है तथा झुर्रियों को मिटाता है।
विधि : पका केला मैश कर चेहरे पर लगाएँ। आधा घंटे बाद ठंडे पानी से धो लें।
* गर्मी के दिनों में तेज धूप और गर्म हवाएँ त्वचा को काफी नुकसान पहुँचाती हैं। इस मौसम में पसीने की चिपचिपाहट का भी सामना करना पड़ता है।
* गर्मी के मौसम में पसीना अधिक निकलने की वजह से घमौरी, खाज, खुजली आदि की शिकायत भी उत्पन्न हो जाती है।
* तेज धूप में निकलने पर त्वचा पर सनबर्न, पिगमेंटेशन आदि की समस्या भी उत्पन्न हो जाती है।
* अधिक गर्मी और पसीने की वजह से बगलों व जाँघों में संक्रमण हो जाता है।
बचाव के उपाय
* दिन में कम से कम दो बार ठंडे पानी से रगड़-रगड़कर स्नान करें।
* साफ, धुले, सूती कपड़े पहनें। अंतर्वस्त्र दो बार बदलें।
* दिनभर में 3-4 बार चेहरे को फेसवॉश से साफ करें।
* ककड़ी, खीरा, संतरा या मौसम्बी का रस निकाल लें। इसे ट्रे में डालकर फ्रिज में जमने के लिए रख दें। इसके क्यूब को चेहरे पर मलें। चेहरा चमक उठेगा। रोमकूपों और मुँहासों के लिए भी लाभदायक होता है।
* पानी में थोड़ी-सी फिटकरी मिलाकर इसे आइस क्यूब में रखकर फ्रिज में जमा लें। यह क्यूब चेहरे पर रगड़ने से ताजगी मिलती है।
* गर्मी के दिनों में ब्लीचिंग न करवाएँ। इससे त्वचा काली हो जाने का डर रहता है।
* धूप में निकलने पर सनस्क्रीन या सन ब्लॉक क्रीम, लोशन का इस्तेमाल करें।
* सुबह-सबेरे या शाम को व्यायाम हेतु समय अवश्य निकालें।
* घर से कहीं भी बाहर जाते समय सन्सक्रीन लोशन लगाएँ, पूरी तरह कवर्ड (स्कार्फ, ग्लब्स, समर कोट आदि) होकर बाहर निकलें, ढेर सारा पानी पिएँ।
* आँखों को सूर्य की तेज किरणों से बचाने के लिए अच्छी क्वालिटी के सनग्लासेस इस्तेमाल करें।
* हमेशा पानी की बॉटल साथ में रखें। इसमें ग्लूकोज या नींबू पानी भी मिला सकते हैं।
* कॉटन के हल्के रंगों को पहनावे में प्राथमिकता दें।
* 10 से 4 बजे तक घर या ऑफिस से बाहर निकलते समय अपना विशेष ध्यान रखें।
इसके अलावा गर्मी में रॉक साल्ट (खनिज नमक), जीरा, सौंफ व इलायची जैसे मसाले तथा दही, कच्ची केरी का पना, पुदीना, बेल के फल का रस, ठंडाई, चटनियाँ, सत्तू और जलजीरा जैसी चीजें भी शरीर के लिए बेहद अनुकूल होती हैं।

अशोक के अनेक रोगों में लाभ


ऐसा कहा जाता है कि जिस पेड़ के नीचे बैठने से शोक नहीं होता, उसे अशोक कहते हैं, अर्थात् जो स्त्रियों के सारे शोकों को दूर करने की शक्ति रखता है, वही अशोक है। अशोक का पेड़ आम के पेड़ की तरह सदा हरा-भरा रहता है, जो 7.5 से 9 मीटर तक ऊंचा तथा अनेक शाखाओं से युक्त होता है। इसका तना सीधा आमतौर पर लालिमा लिए हुए भूरे रंग का होता है। यह पेड़ सारे भारत में आसानी से मिलता है। अशोक के पत्ते डंठल के दोनों ओर 5-6 के जोड़ों में 9 इंच लंबे, गोल व नोकदार होते हैं। प्रारंभ में पत्तों का रंग तांबे के रंग के समान होता है, जो बाद में लालिमा लिए हुए गहरे हरे रंग का हो जाता है। सूखने के बाद पत्तों का रंग लाल हो जाता है। पुष्प प्रारंभ में सुंदर, पीले, नारंगी रंग के होते हैं। बंसत ऋतु में लगने वाले पुष्प गुच्छाकार, सुगंधित, चमकीले, सुनहरे रंग के होते हैं, जो बाद में लाल रंग के हो जाते हैं। मई के माह में लगने वाली फलियां 4 से 10 बीज वाली होती हैं। अशोक फली गहरे जामुनी रंग की होती है। फली पहले गहरे जामुनी रंग की होती है, जो पकने पर काले रंग की हो जाती है। पेड़ की छाल मटमैले रंग की बाहर से दिखती है, लेकिन अंदर से लाल रंग की होती है।
पेड़ : अशोक का पेड़ 7.5 से 9 मीटर तक ऊंचा, सदाहरित, अधिक शाखाओं वाला घना व छायादार होता है।
पत्ते : अशोक के पेड़ के पत्ते 9 इंच लंबे, गोल व नोकदार दोनों ओर 5-6 जोड़ों में लगते हैं। कोमल अवस्था में ये श्वेताभ लाल वर्ण के परंतु बाद में गहरे हरे रंग के हो जाते हैं। पत्तों के किनारे लहरदार होते हैं।
फूल : अशोक के फूल गुच्छों में नारंगी और लाल रंग के सुगंधित और अति सुंदर होते हैं।
फली : अशोक की फली 4 से 10 इंच लंबी, 1 से 2 इंच चौड़ी, मई महीने में लगती है। फली के अंदर 4-10 बीज तक होते हैं। इसकी कच्ची फली गहरे बैंगनी रंग की और पकने पर काले रंग की हो जाती है।
बीज : अशोक के बीज 1 से 1.5 इंच लंबे, चपटे, ऊपर का छिलका लाल चमड़े के समान मोटा होता है। पेड़ में गोदने से सफेद रस निकलता है जो शीघ्र ही वायु में सूखकर लाल हो जाता है। यही अशोक का गोंद होता है।
गुण : आयुर्वेदिक मतानुसार अशोक का रस कड़वा, कषैला, शीत प्रकृति युक्त, चेहरे की चमक बढ़ाने वाला, प्यास, जलन, कीड़े, दर्द, जहर, खून के विकार, पेट के रोग, सूजन दूर करने वाला, गर्भाशय की शिथिलता, सभी प्रकार के प्रदर, बुखार, जोड़ों के दर्द की पीड़ा नाशक होता है।
होम्योपैथी मतानुसार अशोक की छाल के बने मदर टिंचर से गर्भाशय सम्बंधी रोगों में लाभ मिलता है और बार-बार पेशाब करने की इच्छा होना, पेशाब कम मात्रा में होना, मासिक-धर्म के साथ पेट दर्द, अनियमित स्राव तथा रक्तप्रदर का कष्ट भी दूर होता है।
वैज्ञानिक मतानुसार, अशोक का मुख्य प्रभाव पेट के निचले भागों यानी योनि, गुर्दों और मूत्राशय पर होता है। गर्भाशय के अलावा ओवरी पर इसका उत्तेजक असर पड़ता है। यह महिलाओं में प्रजनन शक्ति को बढ़ाता है। इसकी रासायनिक संरचना करने पर अशोक की छाल में टैनिन 7 प्रतिशत, कैटेकॉल 3 प्रतिशत, इसेन्शियल आइल 4 प्रतिशत, कैल्शियम युक्त कार्बनिक 2 प्रतिशत, लौह खनिज 4 प्रतिशत तथा ग्लाइकोसाइड भी पाया जाता है, जिसकी क्रिया एस्ट्रोजन हार्मोन जैसी होती है। अशोक की मुख्य क्रिया स्टेरायड और कैल्शियम युक्त लवणों के यौगिक के कारण होती है।
मात्रा :
अशोक की छाल का चूर्ण 10 से 15 ग्राम। बीज और पुष्प का चूर्ण 3 से 6 ग्राम। छाल का काढ़ा 50 मिलीलीटर।
Helpfull In
1 : गर्भ स्थापना हेतु
अशोक के फूल दही के साथ नियमित रूप से सेवन करते रहने से स्त्री का गर्भ स्थापित होता है।
2 : श्वेत प्रदर
अशोक की छाल का चूर्ण और मिश्री समान मात्रा में मिलाकर गाय के दूध के साथ 1-1 चम्मच की मात्रा में दिन में 3 बार कुछ हफ्ते तक सेवन करते रहने से श्वेत प्रदर नष्ट हो जाता है।
3 : खूनी प्रदर में
अशोक की छाल, सफेद जीरा, दालचीनी और इलायची के बीज को उबालकर काढ़ा तैयार करें और छानकर दिन में 3 बार सेवन करें।
4 : योनि के ढीलेपन के लिए
अशोक की छाल, बबूल की छाल, गूलर की छाल, माजूफल और फिटकरी समान भाग में पीसकर 50 ग्राम चूर्ण को 400 मिलीलीटर पानी में उबालें, 100 मिलीलीटर शेष बचे तो उतार लें, इसे छानकर पिचकारी के माध्यम से रोज रात को योनि में डालें, फिर 1 घंटे के पश्चात मूत्रत्याग करें। कुछ ही दिनों के प्रयोग से योनि तंग (टाईट) हो जायेगी।
5 : पेशाब करने में रुकावट
अशोक के बीज पानी में पीसकर नियमित रूप से 2 चम्मच की मात्रा में पीने से मूत्र न आने की शिकायत और पथरी के कष्ट में आराम मिलता है।
6 : मुंहासे, फोड़े-फुंसी
अशोक की छाल का काढ़ा उबाल लें। गाढ़ा होने पर इसे ठंडा करके, इसमें बराबर की मात्रा में सरसों का तेल मिला लें। इसे मुंहासों, फोड़े-फुंसियों पर लगाएं। इसके नियमित प्रयोग से वे दूर हो जाएंगे।
7 : मंदबुद्धि (बृद्धिहीन)
अशोक की छाल और ब्राह्मी का चूर्ण बराबर की मात्रा में मिलाकर 1-1 चम्मच सुबह-शाम एक कप दूध के साथ नियमित रूप से कुछ माह तक सेवन करें। इससे बुद्धि का विकास होता है।
8 : सांस फूलना
पान में अशोक के बीजों का चूर्ण एक चम्मच की मात्रा में चबाने से सांस फूलने की शिकायत में आराम मिलता है।
9 : खूनी बवासीर
अशोक की छाल और इसके फूलों को बराबर की मात्रा में लेकर रात्रि में एक गिलास पानी में भिगोकर रख दें। सुबह पानी छानकर पी लें। इसी प्रकार सुबह भिगोकर रखी छाल और फूलों का पानी रात्रि में पीने से शीघ्र लाभ मिलता है।अशोक की छाल का 40-50 मिलीलीटर काढ़ा पिलाने से खूनी बवासीर में खून का बहना बंद हो जाता है।
10 : श्वास
अशोक के बीजों के चूर्ण की मात्रा एक चावल भर, 6-7 बार पान के बीड़े में रखकर खिलाने से श्वास रोग में लाभ होता है।
11 : त्वचा सौंदर्य
अशोक की छाल के रस में सरसों को पीसकर छाया में सुखा लें, उसके बाद जब इस लेप को लगाना हो तब सरसों को इसकी छाल के रस में ही पीसकर त्वचा पर लगायें। इससे रंग निखरता है।
12 : वमन (उल्टी)
अशोक के फूलों को जल में पीसकर स्तनों पर लेप कर दूध पिलाने से स्तनों का दूध पीने के कारण होने वाली बच्चों की उल्टी रुक जाती है।
13 : रक्तातिसार
अशोक के 3-4 ग्राम फूलों को जल में पीसकर पिलाने से रक्तातिसार में लाभ होता है।
14 : मासिक-धर्म में खून का अधिक बहना
अशोक की छाल 80 ग्राम और 80 ग्राम दूध को डालकर चौगुने पानी में तब तक पकायें जब तक एक चौथाई पानी शेष न रह जाए, उसके बाद छानकर स्त्री को सुबह-शाम पिलायें। इस दूध का मासिक-धर्म के चौथे दिन से तब तक सेवन करना चाहिए, जब तक खून का बहना बंद न हो जाता हो।
15 : स्वप्नदोष
स्त्रियों के स्वप्नदोष में 20 ग्राम अशोक की छाल, कूटकर 250 ग्राम पानी में पकाएं, 30 ग्राम शेष रहने पर इसमें 6 ग्राम शहद मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से लाभ होता है।
16 : पथरी
अशोक के 1-2 ग्राम बीज को पानी में पीसकर नियमित रूप से 2 चम्मच की मात्रा में पिलाने से मूत्र न आने की शिकायत और पथरी के कष्ट में आराम मिलता है।
17 : अस्थिभंग (हड्डी का टूटना) होने पर
अशोक की छाल का चूर्ण 6 ग्राम तक दूध के साथ सुबह-शाम सेवन करने से तथा ऊपर से इसी का लेप करने से टूटी हुई हड्डी जुड़ जाती है और दर्द भी शांत हो जाता है।
18 : गर्भाशय की सूजन
अशोक की छाल 120 ग्राम, वरजटा, काली सारिवा, लाल चंदन, दारूहल्दी, मंजीठ प्रत्येक की 100-100 ग्राम मात्रा, छोटी इलायची के दाने और चन्द्रपुटी प्रवाल भस्म 50-50 ग्राम, सहस्त्रपुटी अभ्रक भस्म 40 ग्राम, वंग भस्म और लौह भस्म 30-30 ग्राम तथा मकरध्वज गंधक जारित 10 ग्राम की मात्रा में लेकर सभी औषधियों को कूटछानकर चूर्ण तैयार कर लेते हैं। फिर इसमें क्रमश: खिरेंटी, सेमल की छाल तथा गूलर की छाल के काढ़े में 3-3 दिन खरल करके 1-1 ग्राम की गोलियां बनाकर छाया में सुखा लेते हैं। इसे एक या दो गोली की मात्रा में मिश्रीयुक्त गाय के दूध के साथ सुबह-शाम सेवन करना चाहिए। इसे लगभग एक महीने तक सेवन कराने से स्त्रियों के अनेक रोगों में लाभ मिलता है। इससे गर्भाशय की सूजन, जलन, रक्तप्रदर, माहवारी के विभिन्न विकार या प्रसव के बाद होने वाली दुर्बलता नष्ट हो जाती है। जरायु (गर्भाशय) के किसी भी दोष में अशोक की छाल का चूर्ण 10 से 20 ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन सुबह क्षीरपाक विधि (दूध में गर्म कर) सेवन करने से अवश्य ही लाभ मिलता है। इससे गर्भाशय के साथ-साथ अंडाशय भी शुद्ध और शक्तिशाली हो जाता है।
19 : कष्टार्तव (मासिक धर्म का कष्ट के साथ आना)
अशोक की छाल 10 से 20 ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन क्षीरपाक विधि (दूध में गर्म करके) प्रतिदिन पिलाने से कष्टरज (माहवारी का कष्ट के साथ आना), रक्तप्रदर, श्वेतप्रदर आदि रोग ठीक हो जाते हैं। यह गर्भाशय और अंडाशय में उत्तेजना पैदा करती है और उन्हें पूर्ण रूप से सक्षम बनाती है।
20 : खूनी अतिसार
100 से 200 ग्राम अशोक की छाल के चूर्ण को दूध में पकाकर प्रतिदिन सुबह सेवन करने से रक्तातिसार की बीमारी समाप्त हो जाती है।
21 : मासिक-धर्म सम्बंधी परेशानियां
अशोक की छाल 10 ग्राम को 250 ग्राम दूध में पकाकर सेवन करने से माहवारी सम्बंधी परेशानियां दूर हो जाती हैं।
22 : प्रदर रोग
अशोक की छाल को कूट-पीसकर कपड़े से छानकर रख लें। इसे 3 ग्राम की मात्रा में शहद के साथ दिन में 3 बार सेवन करने से सभी प्रकार के प्रदर में आराम मिलता है।अशोक की छाल के काढ़े को दूध में डालकर पका लें, इसे ठंडा कर स्त्री को उसके शक्ति के अनुसार पिलाने से प्रदर में बहुत लाभ मिलता है। लगभग 20-24 ग्राम अशोक की छाल लेकर इससे आठ गुने पानी के साथ पकाकर चतुर्थांश शेष काढ़ा बना लें और फिर 250 ग्राम दूध के साथ उबालकर रोगी को पिलायें। इससे सभी तरह के प्रदर रोग मिट जाते हैं।अशोक की छाल को चावल के धोवन के पानी के साथ पीसकर छान लें। इसमें थोड़ी मात्रा में शुद्ध रसांजन और शहद डालकर पीयें। इससे सभी तरह के प्रदर में लाभ होता है।2 ग्राम अशोक के बीज, ताजे पानी के साथ ठंडाई की तरह पीसे, उसमें सही मात्रा में मिश्री मिलाकर रोगी को पिलायें। इससे रक्तप्रदर और मूत्र आने में रुकावट, पथरी सभी में बहुत अधिक लाभ मिलता है।अशोक के फूलों (पुश्पों) का रस शहद में मिलाकर पीने से प्रदर में आराम मिलता है।अशोक की छाल के काढ़े में वासा पंचाग का चूर्ण 2 ग्राम शहद 2 ग्राम चम्मच मिलाकर पीने से रक्त प्रदर में लाभ होता है। इसे दिन में 2 बार सेवन करना चाहिए।अशोक की छाल के काढे़ से योनि का धोये तो इससे खून के बहाव को रोकने में सहायता मिलती है। इससे रक्तप्रदर, श्वेतप्रदर तथा योनि की सड़न में भी लाभ होता है।अशोक की छाल का काढ़ा, सफेद फिटकरी के चूर्ण में मिलाकर गुप्तांग (योनि) में पिचकारी देने से दोनों प्रकार के प्रदर और उनकी विभिन्न बीमारियां मिट जाती हैं।अशोक और पुनर्नवा मिश्रित काढ़े से योनि का प्रक्षालन करने से योनि की सूजन में लाभ होता है और खून का बहाव भी कम हो जाता है। इससे प्रदर रोग और योनि की सूजन भी मिट जाती है।100 ग्राम अशोक की छाल और बबूल की छाल, 50-50 ग्राम लोध्र की छाल और नीम के सूखे पत्ते को जौकूट (पीस) करें और चौगुने पानी में गर्म कर लें। जब आधा पानी ही रह जाये तो इसे उतारकर छान लें। ठंडा होने पर बोतल में भरकर रख लें। इस काढे़ से योनि को धोयें। इससे प्रदर में फायदा होता है।अशोक की छाल 10 से 20 ग्राम की मात्रा में सुबह के समय चूर्ण बनाकर दूध में उबालकर सेवन करने से लाभ मिलता है। यह रक्तप्रदर, कष्टरज और श्वेतप्रदर आदि दोषों से मुक्ति दिलाकर गर्भाशय और अंडाशय को पूर्ण सक्षम और सबल बना देता है। अशोक की छाल के 40-50 मिलीलीटर काढ़े को दूध में मिलाकर सुबह-शाम पिलाने से श्वेत प्रदर और रक्त प्रदर में लाभ होता है।अशोक की 3 ग्राम छाल को चावल के धोवन (चावल को धोने से प्राप्त पानी) में पीस लें, फिर छानकर इसमें 1 ग्राम रसौत और 1 चम्मच शहद मिलाकर नियमित रूप से सुबह-शाम सेवन करें। इससे सभी प्रकार के प्रदर में लाभ होगा। इस प्रयोग के साथ इसकी छाल के काढ़े में फिटकरी मिलाकर योनि में इसकी पिचकारी लेनी चाहिए।अशोक के 2-3 ग्राम फूलों को जल में पीसकर पिलाने से रक्त प्रदर में लाभ होता है। इसकी अंतर छाल का महीन चूर्ण 10 ग्राम, साठी चावल का चूर्ण 50 ग्राम, मिश्री चूर्ण 10 ग्राम, शहद 3 ग्राम सुबह-शाम सेवन करने से रक्तप्रदर में विशेष लाभ होता है। इसे दिन में तीन बार सेवन करें।