Sunday, May 27, 2012

खीरा खाओ और वजन खटाओ

पानी का स्रोत माना जाने वाला खीरा अधिकतर कई लोगों को नहीं अच्‍छा लगता है। पर क्‍या आपको पता है कि इसको कई बॉलीवुड स्‍टार अपने आपको स्‍लिम-ट्रिम बनाएं रखने के लिए खाते हैं। अगर आप जानना चाहते हैं कि खीरा खा कर वजन कैसे कम होता है तो हमारा यह लेख जरुर पढ़ें। 

फायदे- 
खीरे में 95% पानी और 5% फाइबर पाया जाता है। इसलिए यह शरीर में पानी की कमी को पूरा करने के साथ ही पाचन क्रिया को भी सही रखता है तथा नमक को भी बैलेंस करता है। साथ ही खीरे से शरीर में ठंडक रहती है और यह आंखों तथा त्‍वचा को भी साफ करता है। 

डाइट- 
अगर आपको खीरे को अपनी डाइट में शामिल करना है तो इसका सलाद तैयार करें जिसमें 2 खीरे काटें और उसमें नमक, ऑलिव आयल तथा कुछ पत्‍तेदार सब्‍जियां भी मिला लें। यह खाने से आपका पेट कम होगा और पेट भर भी जाएगा।

कुछ हर्ब जैसे, धनिया, में विटामिन ए और आयरन, कॉपर और मैगनीश्यिम जैसे मिनरल पाए जाते हैं। इसलिए इनको अपने सलाद में जरुर शामिल करें जिससे आपकी बॉडी को पोषण मिल सके। 

1. ब्रेकफास्‍ट में खाएं- 
गेहूं की ब्रैड और जैम
1 कटोरा खीरे का सलाद
1 गरम कप चाय 

2. लंच- 
दाल, रोटी, सब्‍‍जी और खीरे का सलाद। 

3. डिनर-
डिनर में आपको केवल सलाद ही खाना चाहिये। 

अगर आप खीरे से तैयार सलाद बना कर खाएगें तो 3 दिन में लगभग 2 किलो वजन तो कम ही हो जाएगा। इसके अलावा यह हमारी त्‍वचा का भी खास ख्‍याल रखता है।
भले ही आज जमाना पतले रहने का है, पर आज भी कुछ ऐसे पहले-दुबले लोग हैं जो अपना वजन बढ़ाने के लिए परेशान रहते हैं। एसे लोगों को अपने दोस्‍तों के बीच हंसी-मजाक का पात्र बनना पड़ता है, इसलिए अगर आप पतले-दुबले हैं और इस बात पर हमेशा परेशान रहते हैं कि आपका वजन क्‍यों नहीं बढ़ता। तो आपको बताएगें कुछ आसान से सुझाव जिससे आप अपना वजन बढ़ा सकते हैं। 

ऐसे बढ़ाएं मोटापा 

1. सब्‍जियो और ब्रेड की जगह पर डेयरी प्रोडक्‍ट चुनिये जैसे, अंडा, मछली और मीट। साथ ही ऐसे आहार जिनमें प्रोटीन की मात्रा अधिक पाई जाती हो, जैसे बींस, दाल और मटर आदि। इसके अलावा स्‍टार्च वाले खाने यानी की आलू और चावल आपका वजन बढ़ा सकते हें। 

2. आपको बहुत सारी हाई कैलोरी वाला स्‍नैक खाना चाहिये। स्‍नैक का मतलब केवल जंक फूड नहीं है। इसका मतलब चीज़, मिल्‍क शेक, सूखे मेवे और दही आदि। इसके अलावा दिन भर में पांच बार आपको थोड़ा-थोडा़ कर के खाना चाहिये। 

3. तरल पदार्थ लें जिसमें पोषक तत्व और कैलोरी शामिल हों, जैसे दूध, ताजा फलों का रस और ऊर्जा पेय।

4. आप रोज़ाना अपनी मासपेशियों को बढ़ाने के लिए कस कर व्‍यायाम करें। खुद को फ्री वेट एक्‍सर्साइज पर केंद्रित करें। इसमें आपको किसी मशीन की सहायता लेनी की जरुरत नहीं पड़ेगी। इसके लिए आपको केवल डमबेल की जरुरत होगी। 

5. थोड़ा धैर्य रखें। अगर आपको अपना वजन बढ़ाना है तो कोई भी प्रोग्राम शुरु करने से पहले और बाद में अपने आपको यह समझाएं कि वजन बढने में थोड़ा समय लगता है। कुछ लोग अपनी डाइट और व्‍यायाम से ऊब जाते हैं और वहीं पर हर काम को रोक देते हैं, जिससे कुछ भी असर नहीं करता। 

*साथ ही यह भी ध्‍यान में रखे की वजन ज्‍यादा होना और कम होना आनुवंशिकता पर र्निभर करता है। सही से व्‍यायाम करना और अच्‍छी डाइट लेने से आपके वजन में जरुर बढोत्‍तरी होगी 

चाय पीने के गमर-गरम फायदे

चाय के बारे में क्‍या कहें, यह तो हमारी और आपकी जिंदगी से इस हद तक जुड़ चुकी है कि अब यह चाह कर भी दूर नहीं की जा सकती। सर्दियों का मौसम हो या गर्मियों की शाम, चाय पीना तो बनता ही है। कई लोगों की तो दिन की शुरुआत ही चाय से होती है और चाय पर ही खतम। अगर आप भी चाय प्रेमी हैं और इसको अपनी जिन्‍दगी का एक अटूट हिस्‍सा मान चुके हैं, तो चलिए आज जान लेते हैं इसके कुछ स्‍वस्‍थ्‍यवर्धक गुण। प्रस्‍तुत हैं चाय पीने के फायदे- 

चाय पीने के फायदे- 

1. उम्र घटाए- चाय में एंटीऑक्सीडेंट शामिल होता है। चाय उम्र बढ़ने और प्रदूषण के प्रभाव के प्रकोपों ​​से आपके शरीर की रक्षा करती है। 

2. कम कैफीन- चाय में कॉफी के मुकाबले कम कैफीन होती है। कॉफी में आमतौर पर चाय से दो से तीन बार अधिक मात्रा में कैफीन पाई जाती है। आठ औंस कप की कॉफी में 135 मिलीग्राम के आसपास कैफीन होता है, वहीं पर चाय के प्रति कप में केवल 30 से 40 मिलीग्राम कैफीन होता है। यदि कॉफी पीने से आपको अपच, सिर दर्द या सोने में कोई परेशानी आती है, तो बिना सोंचे चाय की ओर मुख करें। 

3. दिल का रोग- चाय दिल का दौरा और स्ट्रोक के जोखिम को कम कर सकती है। चाय पीने की वजह से धमनियां चिकनी और कोलेस्‍ट्रॉल से मुक्त हो जाती हैं। छह कप से अधिक चाय पीने से दिल की बीमारी होने का खतरा एक तिहाई कम रहता है। 

4. हड्डियां बने मजबूत- चाय आपकी हड्डियों को भी बचाती है। केवल इसलिए नहीं कि इसमें दूध मिला होता है बल्कि एक अध्ययन में उन लोगों की तुलना एक साथ की गई थी, जो चाय का सेवन 10 साल से करते आ रहे हैं और जो चाय नहीं पीते। अध्‍ययन में पाया गया कि चाय पीने वालों की हड्डियां उम्र, अधिक वजन, व्‍यायाम, धूम्रपान और अन्‍य रिस्‍क फैक्‍टरों के बावजूद भी मजबूत है। 

5. दांत बने दुरुस्‍त- चाय पीने से आपके दांत मजबूत बनेगें। जी हां, अगर आप बिना चीनी की चाय पीएगें तो ऐसा जरुर होगा। चाय वास्तव में फ्लोराइड और में टैनिंन से बनी होती है जो प्‍लेग को दूर रखता है। तो स्वस्थ दांतों और मसूड़ों के लिए चाय पीना शुरु कर दें। 

6. रोग से लड़े- चाय पीने से आपके शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को संक्रमण से लड़ने में बहुत मदद मिलती है। सर्दी-जुखाम जैसी आम बीमारियां चाय पीने से एक दम गायब हो जाती हैं। 

7. कैंसर से बचाए- चाय कैंसर के विरुद्ध सुरक्षा करती है क्‍योंकि इसमें पॉलीफिनॉल और एंटीऑक्‍सीडेंट मिला होता है। इन दोनों के प्रभाव कैंसर से लड़ने के लिए बहुत मदद करते हैं।

8. पानी की कमी पूरा करे- चाय हाइड्रेटेड रहने में मदद करती है। चाय हमारे शरीर की जरुरत है जबकि कॉफी पीने से पेशाब ज्‍यादा लगती है, इसलिए यह शरीर में ज्‍यादा देर तक न रह कर बाहर निकल जाती है। इसलिए हमारे शरीर में पानी की पूर्ती नहीं हो पाती। अगर आप रोज दिन में पांच से छ: कप कॉफी के पी जाते हैं, तो आपके अंदर पानी की कमी हो सकती है। 

9. कम कैलोरी- चाय कैलोरी मुक्त होती है। चाय में किसी भी प्रकार की कैलोरी नहीं होगी, जब तक आप उसमें किसी प्रकार का स्वीटनर या दूध न मिला लें। यदि आप एक संतोषजनक, कैलोरी मुक्त पेय पीना चाहते हैं, तो चाय उसमें से सबसे सेफ ऑप्‍शन है। 

10. फैट घटाए- चाय पीने से आपके शरीर का मैटाबॉलिज्‍म बढ़ जाता है। कई लोगों की शिकायत होती है कि व्‍यायाम करने पर भी उनका वजन नहीं घटता, पर अगर आप ग्रीन टी पियेगें तो आपका मैटाबॉलिज्‍म रेट बढे़गा जिससे 70 से 80 कैलोरी आराम से बर्न हो सकती है। इसके साथ ही आपाको रोज 30 घंटे की वाल्‍क भी लेनी जरुरी है।

Saturday, May 26, 2012

ब्रोकली खाने के स्‍वास्‍थ्‍यलाभ

ब्रोकली खाने के कई न्‍यूट्रिशनल फायदे होते हैं। यह गहरी हरी सब्‍जी, ब्रेसिक्‍का फेमिली की है, जिसमें पत्तागोभी और गोभी भी शामिल होती है। ब्रोकली को पका कर या फिर कच्‍चा भी खाया जा सकता है, लेकिन अगर आप इसे उबाल कर खाएंगे तो आपको ज्‍यादा फायदा होगा। इस हरी सब्‍जी में लोहा, प्रोटीन, कैल्‍शियम, कार्बोहाइड्रेट, क्रोमियम, विटामिन ए और सी पाया जाता है, जो सब्‍जी को पौष्टिक बनाता है। इसके अलावा इसमें फाइटोकेमिकल्स और एंटीऑक्‍सीडेंट भी होता है, जो बीमारी और बॉडी इंफेक्‍शन से लड़ने में सहायक होता है। आइये जानते हैं, ब्रोकली खाने के और भी स्‍वास्‍थ्‍यलाभ: 

health benefits broccoli aid0204ब्रोकली के स्‍वास्‍थ्‍यलाभ - 

- ब्रोकोली विटामिन सी से भरी हुई है, जो प्रतिरक्षा प्रणाली के समुचित कार्य को बनाए रखने के लिए एक महान पोषक तत्व मानी जाती है। 

- ब्रोकोली क्रोमियम का बहुत अच्छी स्रोत है, जो मधुमेह पर नियंत्रण और शरीर में इंसुलिन के उत्पादन को नियंत्रित करती है।

- शोधकर्ताओं के अनुसार, ब्रोकोली में बीटा - कैरोटीन होता है जो आंखों में मोतियाबिंद और मस्‍कुलर डीजेनरेशन होने से रोकती है। 

- यह माना जाता है कि ब्रोकोली में यौगिक सल्‍फोरापेन होता है जो यूवी रेडियेशन के कारण होने वाले प्रभाव से त्वचा को नुकसान पहुंचाने और सूजन को कम करने में सहायक होती है। 

- ब्रोकोली में कैल्शियम, फास्फोरस, मैग्नीशियम और जिंक होता है, जो हड्डियों को मजबूत बनाता है। इसलिए, यह बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं के लिये बहुत अच्‍छी मानी जाती है क्‍योंकि इनमें ऑस्टियोपोरोसिस होने का खतरा बहुत ज्‍यादा होता है। 

- ब्रोकली शरीर को एनीमिया और एल्‍जाइमर से बचाती है क्‍योंकि इसमें बहुत ज्‍यादा आइरन और फोलेट पाया जाता है। 

- ब्रोकोली को नियमित खाने से गर्भवती महिलाओं को मदद मिलती है। यह फोलेट का एक अच्छा स्रोत है जो भ्रूण में मस्तिष्क संबंधी दोषों को रोकने में मदद करती है। 

- डाइट में ब्रोकली को शामिल करने से कुछ तरह के कैसर जैसे स्‍तन कैंसर, लंग और कोलोन कैंसर के रिस्‍क को कम करती है। इसमें फाइटोकेमिकल्स होने के कारण, यह एंटी कैंसर न्‍यूट्रिशनल वेजिटेबल है। 

- यह फाइबर, क्रोमियम, और पोटेशियम का अच्‍छा स्‍त्रोत है, जो कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम कर सकता है और रक्तचाप को भी नियंत्रित करता है। 

- ब्रोकोली में कैरोटीनॉयड ल्‍यूटिन होता है जो हृदय की धमनियों को मोटा होने से रोकता है, जिससे हार्ट अटैक और अन्‍य हार्ट सबंधी बीमारियों का रिस्‍क टलता है। 

- ब्रोकली खाने से न केवल स्‍वास्‍थ्‍य और पोषण मिलता है, बल्कि इस‍में लो कैलोरी होने की वजह से वजन भी कम होता है। अब आप जब भी सब्‍जियां खरीदने जाएं, तो ब्रोकली को कभी नजरअंदाज न करें।

मलाई : ब्यूटी की भरोसेमंद साथी

यह जरूरी नहीं कि सर्दी में ही होठों पर पपड़ी और चेहरे पर खुश्की आती है। गर्मियों में भी पानी की कमी से होठों में रूखापन आ जाता है। बाजार की नित-नई क्रीमें तो आप हमेशा ही ट्राय करती आई हैं, लेकिन कभी घर में हमेशा उपलब्ध रहने वाली उपयोगी क्रीम यानी मलाई पर भी नजर डाल लें। मलाई को कुछ इस तरह आजमाकर देखें- 

* एक चम्मच मलाई में नींबू का रस मिलाकर रोज चेहरे और होंठ पर लगाने से ये फटते नहीं हैं। 

* थोड़ी-सी मलाई और एक चम्मच बेसन का उबटन साबुन का बेहतरीन विकल्प है। इससे त्वचा मुलायम होती है। 

* मुल्तानी मिट्टी को पीसकर, मलाई में मिलाकर चेहरे तथा कोहनियों पर लगाने से रंग में निखार आता है। 

* तीन-चार बादाम और दस-बारह देसी गुलाब की पत्तियां पीसकर, एक चम्मच मलाई मिलाकर चेहरे पर लगाने से झुर्रियां और त्वचा के धब्बे दूर हो जाते हैं। 

* मलाई में समुद्र फेन का बारीक पाउडर मिलाकर लगाने से मुंहासे ठीक हो जाते हैं। 

* मौसंबी या संतरे के छिलकों को पीसकर, मलाई मिलाकर उबटन लगाने से त्वचा मुलायम व साफ होती है। 

* एक चम्मच मलाई में एक चम्मच सेब का रस मिलाकर, फेंटकर, हल्के हाथ से चेहरे पर मलने से कुछ ही दिनों में रंग साफ होने लगता है। 

* मलाई को दवाई की तरह भी उपयोग में लाया जा सकता है। 

*खांसी की समस्या हो तो आधी कटोरी मलाई में एक चम्मच नारियल का बुरा, पांच बड़ी इलायची का पावडर तथा दस काली मिर्च दरदरी पीसकर, धीमी आंच पर चलाकर गर्म कर लें। सोने से पहले रोगी को गर्म-गर्म ही दें। कुछ दिन इसका सेवन करने से खुश्क खांसी ठीक हो जाती है। 

* कांसे या पीतल की थाली में दो चम्मच ताजी मलाई को थोड़ा सा पानी डालकर खूब फेंट लें। मलाई फूलकर मक्खन जैसी हो जाएगी। इसमें एक डली कपूर की पीसकर मिलाएं। फोड़े-फूंसी आदि पर यह लेप लगाने से लाभ होता है। 

इसी कपूर मिले मक्खन को छोटे बच्चों के सिर के बीचोंबीच रखकर हल्के हाथ से मालिश करें। इससे खोपड़ी मजबूत होती है और गर्मियों में ठंडक पहुंचती है।

नकसीर से निपटने के घरेलू उपचार

चिलचिलाती धूप में अक्सर कुछ लोगों को नाक से खून बहने की शिकायत होती है। इसे नकसीर भी कहा जाता है। यह मौसम के अनुसार शरीर में अधिक गर्मी बढ़ने से भी हो सकता है और कुछ लोगों को अधिक गर्म पदार्थ का सेवन करने से भी। पेश है नकसीर से निपटने के घरेलू उपचार-
  - प्याज को काटकर नाक के पास रखें और सूंघें।
- काली मिट्टी पर पानी छिड़ककर इसकी खुशबू सूंघें।
 - रुई के फाए को सफेद सिरका में भिगोकर उस नथुने में रखें, जिससे खून बह रहा हो।
 - जब नाक से खून बह रहा हो तो कुर्सी पर बिना टेका लिए बैठ जाएं, नाक की बजाय मुंह से सांस लें।
 - सिर को आगे की ओर झुकाएं न कि पीछे की ओर।
- ठंडे पानी में भीगे हुए रुई के फाए को नाक पर रखें। रुई के छोटे-छोटे फायों को पानी में भिगोकर फ्रीजर में रख लें। इनसे सिकाई करें।
 - किसी भी प्रकार के धूम्रपान (एक्टिव या पैसिव दोनों) से बचें।
 - साफ हरे धनिए की पत्तियों के रस की कुछ बूंदें नाक में डाल लें।
 - इन उपायों के अलावा सिर पर ठंडे पानी की पट्टी रखने से भी राहत मिलेगी।

Wednesday, May 23, 2012

रोजाना बस थोड़ी देर ऐसे बैठे, वजन चमत्कारी तरीके से घटने लगेगा

योगासन को शरीर के लिए बहुत अधिक लाभदायक माना जाता है। वैसे ही योगासन की ही तरह रोजाना कुछ देर योग मुद्रा लगाकर बैठना भी बहुत फायदेमंद है।वैसे तो योग मुद्रा कई तरह की होती है लेकिन सूर्य मुद्रा लगाने के अनेक फायदे हैं। सूर्य की अंगुली यानी अनामिका जिसे रिंग फिंगर भी कहते हैं। इस अंगुली का संबंध सूर्य और यूरेनस ग्रह से है। सूर्य ऊर्जा स्वास्थ्य का प्रतिनिधित्व करती है और यूरेनस कामुकता, अंतज्र्ञान और बदलाव का प्रतीक है।



विधि-



सूर्य की अंगुली को हथेली की ओर मोड़कर उसे अंगूठे से दबाएं। बाकी बची तीनों अंगुलियों को सीधा रखें। इसे सूर्य मुद्रा कहते हैं।



लाभ- यह जठराग्रि को संतुलित करके पाचन संबंधी तमाम समस्याओं से छुटकारा दिलाती है।
- इसे नियमित करने से बेचैनी और चिंता कम होकर दिमाग शांत बना रहता है।
- यह मुद्रा शरीर की सूजन मिटाकर उसे हल्का और चुस्त-दुरुस्त बनाती है।



- इस मुद्रा का रोज दो बार 5 से 15 मिनट के लिए अभ्यास करने से शरीर का कोलेस्ट्रॉल घटता है।



- वजन कम करने के लिए यह असान क्रिया चमत्कारी रूप से कारगर पाई गई है।



- पेट संबंधी रोगों में भी यह मुद्रा बहुत लाभदायक है।

हर तरह के बदन दर्द के लिए बढ़िया पेन किलर है लहसुन

लहसुन भारतीय सब्जियों का स्वाद बढ़ाने वाला ऐसा पदार्थ है जो प्रायः हर घर में इस्तेमाल किया जाता है। ज्यादातर लोग इसे सिर्फ मसाले के साथ भोजन में ही इस्तेमाल करते हैं। परंतु यह औषधि के रूप में भी उतना ही फायदेमंद है। आयुर्वेद में लहसुन को जवान बनाए रखने वाली औषधि माना गया है। यह जोड़ों के दर्द की भी अचूक दवा है। लहसुन सिर्फ स्वाद बढ़ाने का साधन ही नहीं है बल्कि इसमें ऐसी कई खूबियां होती हैं जो इसे बेजोड़ और बहुत कीमती बनाती हैं। आइए जानें लहसुन के कुछ खास प्रयोग..



- 100 ग्राम सरसों के तेल में दो ग्राम (आधा चम्मच) अजवाइन के दाने डालकर धीमी-धीमी आंच पर पकाएं। लहसुन और अजवाइन काली हो जाए तब तेल उतारकर ठंडा कर छान लें। इस गुनगुने गर्म तेल की मालिश करने से हर प्रकार का बदन का दर्द दूर हो जाता है।



- लहसुन दमा के इलाज में कारगर साबित होता है। 30 मिली दूध में लहसुन की पांच कलियां उबालें और इस मिश्रण का हर रोज सेवन करने से दमे में शुरुआती अवस्था में काफी फायदा मिलता है। अदरक की गरम चाय में लहसुन की दो पिसी कलियां मिलाकर पीने से भी अस्थमा नियंत्रित रहता है।

गहरी चोट का घाव परेशान कर रहा हो तो ये करें

- नारंगी खाने से घाव जल्दी भर जाता है।

- नियमित रूप से अंगूर खाने से घाव जल्दी भर जाते हैं।

- सहजन की पत्तियों को पीसकर लेप करने से घाव ठीक हो जाता है।

- गाजर को उबालकर इसकी लुगदी बना लें। इसे घाव पर लगाएं। घाव जल्दी ठीक हो जाएगा।

- एरण्ड का तेल घाव पर लगाकर पट्टी बांध देने से लाभ होता है।

- पिसी हल्दी में  घी या तेल मिलाकर गर्म कर इसमें रुई भिगोकर घाव पर रोजाना पट्टी बांधने से घाव भर जाता है। 

- शहद की पट्टी बांधने से भी आराम मिलता है।

- तुलसी के सूखें पत्तों को पीसकर सुंघने से घाव में लाभ होता है।

- घाव होने पर ठंडे पानी से भीगा हुआ कपड़ा बांध दे।

- एक कटोरी पानी में एक चम्मच देशी घी डालकर गर्म करें। इस पानी से रुई को भिगोकर निचोड़कर घाव पर डाल दें। ऊपर से पान का पत्ता रखकर पट्टी बांध दे।

 - एक भाग लहसुन का रस और दो भाग पानी मिला कर रुई में भिगोकर घाव पर लगाने से जल्द लाभ होता है।

Tuesday, May 22, 2012

सफेद बाल खूबसूरती में ग्रहण लगा रहे हों... तो आजमा कर देखें ये घरेलू फंडे

आजकल कम उम्र में होने वाली बालों की सफेदी जहां खूबसूरती में ग्रहण लगाती है वहीं यह हमारी शारीरिक कमजोरी को भी प्रदर्शित करती है। अगर आप भी कम उम्र में बालों की सफेदी से परेशान हैं तो आजमाएं ये आसान घरेलू उपाय....

- नींबू के रस से सिर में मालिश करने से बालों का पकना, गिरना दूर हो जाता है। नींबू के रस में पिसा हुआ सूखा आंवला मिलाकर सफेद बालों पर लेप करने से बाल काले होते हैं।

- घी खाएं और बालों के जड़ों में घी मालिश करें। 

- रोजाना गाजर का जूस पीने से भी बाल स्वस्थ रहते हैं।

- अगर बाल सफेद हो या बाल झड़ते हों तो तिल खाएं व तिल का तेल बालों में लगाएं।

- तुरई के टुकड़े कर उसे सूखा कर कूट लें। फिर कूटे हुए मिश्रण में इतना नारियल तेल डालें कि वह डूब जाएं। इस तरह चार दिन तक उसे तेल में डूबोकर रखें फिर उबालें और छान कर बोतल भर लें। इस तेल की मालिश करें। बाल काले होंगे।

- मेथी भी बालों को सफेद होने से रोकती है। 

- गेहूं के पौधे यानी जवारे का रस पीने से भी बाल कुछ समय बाद काले हो जाते हैं।

गर्मियों में चेहरे की चिप-चिप से तुरंत छुटकारा चाहिए तो ये आजमाएं

तैलीय त्वचा की यह खासियत है कि इससे लम्बी उम्र तक चेहरे पर झुर्रिया या झाइयां नहीं पड़तीं। साथ ही चेहरे की चमक भी लंबे समय तक कायम रहती है। लेकिन तैलीय त्वचा की अगर सही देखभाल न की जाए तो अच्छे भले चेहरे पर कील-मुहांसो या फुंसियों का हमला शुरू हो जाता है। ऐसी त्वचा पर जल्दी कोई मेकअप भी सूट नहीं करता है। ऐसे में प्राकृतिक चिकित्सा और आयुर्वेदिक नुस्खों की मदद बेहद कारगर होती है। तो आइए जाने कि प्राकृतिक तरीकों से कैसे अपने चेहरे की खूबसूरती को बरकरार रखा जाए....

-त्वचा को प्राकृतिक रूप से खूबसूरत बनाना हो तो प्रतिदिन 8-10 लीटर तरल पदार्थ लें। इससे त्वचा में कुदरती नमी बनी रहेगी और त्वचा चिपचिपी नजर नहीं आएगी।

- त्वचा का पीएच स्तर बरकरार रखने के लिए चेहरे पर खीरे का रस लगाएं और हो सके तो थोड़ा रस नियमित रूप से पीएं। इसके अलावा टमाटर का गूदा हलके हाथों से चेहरे पर मलें।

- बारीक पिसा हुआ बेसन, आटा, संतरे के सूखे हुए छिलकों का पाउडर तथा एक चम्मच मलाई मिलाकर उबटन बनाएं। नहाने से पहले इस उबटन को चेहरे पर लगाकर 5 से 7 मिनिट तक रखने से तैलीय त्वचा की समस्या से तत्काल छुटकारा मिलता है।

प्याज के रस का अनोखा प्रयोग: इससे रहने लगेगा ब्लडप्रेशर कंट्रोल में

कुछ बीमारियां ऐसी होती हैं, जिसमें रोगी को रोज दवाई खानी पड़ती है। लेकिन अगर इन रोगों का देसी तरीके से इलाज किया जाए तो इन्हें प्रभावी तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है । कई ऐसी देसी दवाईयां हैं, जो रोगों पर नियंत्रण करके शरीर को स्वस्थ बनाती है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं हाइब्लडप्रेशर को कंट्रोल करने के लिए कुछ देसी नुस्खे..... 

-प्याज का रस और शुद्ध शहद बराबर मात्रा में मिलाकर रोज करीब दस ग्राम की मात्रा में लें।

- तरबूज के बीज की गिरि और खसखस दोनों को बराबर मात्रा में मिलाकर पीस लें। रोज सुबह-शाम एक चम्मच खाली पेट पानी के साथ लें(यह प्रयोग करीब एक महीने तक नियमित करें)।

- मेथीदाने के चूर्ण को रोज एक चम्मच सुबह खाली पेट लेने से हाई ब्लडप्रेशर से बचा जा सकता है।

-खाना खाने के बाद दो कच्चे लहसुन की कलियां लेकर मुनक्का के साथ चबाएं। ऐसा करने से हाई ब्लड प्रेशर की शिकायत नहीं होती।

अंगूर है ऐसा रसीला फल.... जिसमें छुपा है इलाज इन बड़ी बीमारियों का


कहते हैं कि जब लगभग सभी खाने की चीजें अपथ्य हो जाएं, अर्थात खाने को मना हों तो भी अंगूर का सेवन किया जा सकता है। यानि रोगी के लिए बलवर्धक पथ्य फल है यह अंगूर। स्वाद के अनुसार काले अंगूर(जिसे सुखाकर मुनक्का बनाया जाता है ) ,बैंगनी अंगूर ,लम्बे अंगूर ,छोटे अंगूर और बीज रहित अंगूर होते हैं जिन्हें सुखाकर किशमिश बनाई जाती है। अब इसके गुणों के बारे में चर्चा करें तो पके अंगूर शीतल, नेत्रों के लिए हितकारी, कसैले, वीर्यवर्धक,पौष्टिक एवं रुचि बढ़ाने वाले होते हैं। जबकि कच्चे अंगूर गुणों में हीन ,भारी एवं कफ व पित्त को कम करने वाले होते हैं।

गोल मुनक्का, वीर्यवर्धक,भारी गुणों से युक्त। जबकि किशमिश, शीतल, रुचिकारक और मुख के कड़वेपन को दूर करने वाली होती है। अंगूर के ताजेफल खून को बढ़ाने एवं पतला करने वाले और छाती से सम्बंधित रोगों में भी लाभकारी होते हैं। अब हम कुछ ऐसे नुस्खे बताते हैं। जिनमें अंगूर की महत्वपूर्ण भूमिका होती है ...

-यदि सिर में दर्द हो रहा हो तो 8-10 नग मुनक्का ,10 ग्राम मिश्री और इतनी ही मात्रा में मुलेठी एवं थोड़ी मात्रा में शुद्ध जल रात भर खुले आसमान के नीचे छोड़ दें और सुबह मिलाकर पीस लें। नाक में दो बूँद टपका दें। सिरदर्द में लाभ मिलेगा। नाक से खून आना (नकसीर)में भी ऊपर लिखा फार्मूला अत्यंत लाभकारी है।

-यदि पांच से दस ग्राम मुनक्का नियमित रूप से खाई जाए तो मुख की दुर्गन्ध में लाभ मिलता है।

-आठ से दस नग मुनक्का और हरीतकी का काढ़ा लगभग20 मिली की मात्रा में शहद के साथ मिलाकर खाने से दमा रोग में भी लाभ मिलता है।

-घी ,मुनक्का,खजूर ,पिप्पली एवं कालीमिर्च, इन सब को बराबर मात्रा में लेकर पीसकर एक चटनी सी बनाकर नित्य सेवन करने से सुखी खांसी और क्षयरोग में लाभ मिलता है।

-आइए अब आपको हम एक एंटासिड बनाना बताते हैं :मुनक्का एवं हरड़ बराबर मात्रा में लेकर उतनी ही मात्रा में शक्कर मिला लें। अब सबको पीसकर 1-1- ग्राम की गोली बना लें। हो गयी एंटासिड गोली तैयार। अब एक गोली सुबह-शाम ठन्डे पानी से लें और हायपरएसिडीटी की समस्या से निजात पाएं।

-अगर आप कब्ज से हैं परेशान तो मुनक्का 6 से सात नग, भुना जीरा 5 से 10 ग्राम और सैंधा नमक 1.5 ग्राम(उच्च रक्तचाप के रोगी के लिए मात्रा चिकित्सक अनुसार ) इन सबका चूर्ण बनाकर गुनगुने पानी से लें ..देखें आपको इस समस्या से निजात मिल जाएगी।

-खूनी बवासीर के रोगी अंगूर के गुच्छों को एक बर्तन (मिट्टी का हो ) में बंद कर राख बना लें, अब मिलनेवाली भस्म को तीन से पांच ग्राम की मात्रा में मिश्री एवं घी के साथ लेने से खून आना बंद हो जाता है।

- यदि पेशाब खुल कर नहीं आ रहा हो तो आठ से दस मुनक्का एवं लगभग दस ग्राम मिश्री को पीसकर दही के पानी से लेने पर यह एक अच्छा डाययूरेटिक का काम करता है।

-दस ग्राम मुनक्का ,पाषाणभेद ,पुनर्नवा की जड़ तथा अमलतास की गुदी पांच ग्राम की मात्रा में मोटा-मोटा कुटकर आधा लीटर पानी में खुले बर्तन में उबालकर आठ भाग बचने पर छान कर बना काढ़ा पीने से पेशाब से सम्बंधित तकलीफों में फायदा पहुंचाता है।

- मुनक्का 10 नग, छुहारा 3 नग तथा मखाना तीन नग शारीरिक रूप से कमजोर रोगी नियमित 250 मिली दूध से सेवन करें और लाभ देखें।

-अंगूर और अड़ूसे (वासा) का काढ़ा बीस से तीस मिली की मात्रा में पिलाने पर पेटदर्द दूर होता है।

-सोते समय पांच से दस ग्राम किशमिश के साथ गुनगुना दूध पीएं, इससे प्रात:काल आपका पेट साफ रहेगा।

-गले की परेशानी में अंगूर के रस से गरारे कराना भी फायदेमंद होता है।

-अंगूर के शरबत का नित्य सेवन गर्मी में लू के कारण होनेवाली परेशानियों को दूर करता है। तो है न कमाल का अंगूर। एक रसीला फल लेकिन गुणों की खान बस इसका औषधीय प्रयोग चिकित्सकीय परामर्श से करें तो बेहतर है।


गर्मियों में ऐसे बनाकर पीएं चाय नुकसान नहीं, होगा फायदा ही फायदा


अभी तक आपने यही सुना होगा गर्मियों में चाय सेहत के लिये बहुत हानिकारक होती है, लेकिन यह सिक्के का सिर्फ एक पहलू है। हानिकारक समझे जाने वाली यही चाय आपके लिये बेहद लाभदायक भी हो सकती है। तरीके बदलने से परिणाम भी बदल जाते हैं। सही तरीके से बनी चाय आपके लिये काफी फायदेमंद हो सकती है। आइये जाने कि गुणों से भरपूर ऐसी लाभदायक चाय किस तरह बनती है....

आवश्यक सामग्री:

तुलसी के सुखाए हुए पत्ते (जिन्हें छाया में रखकर सुखाया गया हो) 500 ग्राम, दालचीनी 50 ग्राम, तेजपात 100 ग्राम, ब्राह्मी बूटी 100 ग्राम, बनफ शा 25 ग्राम, सौंफ 250 ग्राम, छोटी इलायची के दाने 150 ग्राम, लाल चन्दन 250 ग्राम और काली मिर्च 25 ग्राम थोड़ा पुदीना। सब पदार्थों को एक-एक करके इमाम दस्ते (खल बत्ते) में डालें और मोटा-मोटा कूटकर सबको मिलाकर किसी बर्नी में भरकर रख लें। बस, तुलसी की चाय तैयार है। 
बनाने की विधि :

आठ प्याले चाय के लिए यह 'तुलसी चाय' का मिश्रण (चूर्ण) एक बड़ा चम्मच भर लेना काफी है। आठ प्याला पानी एक तपेली में डालकर गरम होने के लिए आग पर रख दें। जब पानी उबलने लगे तब तपेली नीचे उतार कर एक चम्मच मिश्रण डालकर फौरन  ढक्कन से ढक दें। थोड़ी देर तक सीझने दें फिर छानकर कप में डाल लें। इसमें दूध नहीं डाला जाता। मीठा करना चाहें तो उबलने के लिए आग पर तपेली रखते समय ही उचित मात्रा में शकर डाल दें और गरम होने के लिए रख दें।

फायदे:

ऊपर बताए गए प्रयोग से बनी चाय आपको ताजगी और स्फूर्ति के साथ ही तंदरुस्ती का अतिरिक्त लाभ भी दे सकती है। तुलसी की चाय प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाकर रोगों से बचाने वाली, स्फूर्तिदायक, पाचन शक्ति बढ़ाने वाली और शरीर को ऊर्जा प्रदान करने वाली होती है।

अचूक दवा है ये सब्जी, करेगी इन रोगों का पक्का इलाज

आयुर्वेद यह मानता है कि इस संसार में जो भी द्रव्य हैं, उनमें कुछ न कुछ औषधीय गुण मौजूद हैं ,बस आवश्यकता है, जानकारी की। इसी प्रकार  हमारे दैनिक प्रयोग में आने वाले फल सब्जियों में भी औषधीय गुण होते हैं।ऐसी ही एक सब्जी जिसका प्रयोग हम अक्सर अपने भोजन में करते हैं। नाम है मूली। आप सोचते होंगे मूली। अरे इसमें भला क्या खास  होगा, तो आप हम आपको कुछ ऐसी चंद जानकारी देंगे जिससे आप मूली को केवल मूली नहीं रोगों के मूल पर प्रहार करनेवाली के रूप में जानेंगे।

- मूली के पत्तों को सुखा कर इसे जला लें। अब बची राख को पानी में मिलाकर आग पर तब तक उबालें। जब तक सूखकर  क्षार  का रूप न ले लें। अब इस क्षार को 500 मिलीग्राम की मात्रा में नियमित सेवन श्वांस के रोगियों के लिए अच्छी औषधि है।

 -मूली की पत्तियों का रस को तिल के तेल में उबाल कर तेल बनाएं। 2-3 बूँद कान में टपकाने से पीड़ा में आराम मिलता है।

-मूली के पत्तों का रस दिन में दो से तीन बार 25 से 30 मिली की मात्रा में भोजन के बाद लेना। यकृतदौर्बल्य में फायदेमंद है।

-पीलिया (जौंडिस) के रोगी के लिए मूली की सब्जी पथ्य है।

-यदि बवासीर के कारण खून आ रहा हो, तो फिटकरी पांच ग्राम ,मूली की पत्तियों का रस आधा लीटर। एक साथ उबाल लें। जब यह गाढा हो जाए तो छोटी-छोटी गोलियां (250-500 मिलीग्राम ) बना लें। अब इसे उम्र  के अनुसार एक से दो गोली मक्खन के साथ देने से निश्चित लाभ मिलता है।-मूली के बीज का चूर्ण  पांच  से दस ग्राम की मात्रा में देने से स्त्रियों में अनियमित मासिकस्राव जिसे समस्या से निजात मिल  जाती  है। 

- मूली के ताजे पत्ते का रस डाययूरेटिक एवं मृदु विरेचक  का काम करता है, अत: पथरी को बाहर निकालने में भी मददगार होता है।

- मूली के पत्तों का रस यदि मिश्री के साथ सेवन करें तो यह एंटएसिड का काम करता है।

-तिल के साथ आधी मात्रा में मूली के बीजों का सेवन किसी भी सूजन में प्रभावी है।

-मूली का सूप हिचकी को रोकने में कारगर होता है।

-मूली के पत्तों को दस से बीस ग्राम की मात्रा में एक से दो ग्राम कलमी शोरा के साथ मिलाकर पिलाने से मूत्र साफ आता है।तो मूली में ऐसे कई गुण मौजूद हैं जिनका संक्षिप्त वर्णन  यहां प्रस्तुत किया गया है। हाँ यदि इसे  चिकित्सकीय  परामर्श से मात्रा एवं पथ्य खाने योग्य- अपथ्य व चिकित्सा के समय त्याग देने योग्य को ध्यान में रखकर लिया जाए तो यह  कमाल की औषधि है।

Friday, May 11, 2012

जानिए कब-कब ले सकते हैं आयुर्वेदिक दवाएं.


आयुर्वेदिक दवाओं के बारे में अक्सर हम यह सोचते हैं, कि इसे कभी भी ले लो क्या फर्क पड़ता है? तो आप गलत सोचते हैं, आज हम आपको बताएंगे इन दवाओं को लेने के भी अपने कुछ नियम होते हैं, जिसके अनुसार-

1.सूर्योदय का समय

2.दिन में भोजन करते समय

3.सायंकाल भोजन करते समय

4.अनेक बार यानि पुन: पुन:

5.रात्रि में

ये पांच समय दवाओं के प्रयोग हेतु निर्देशित किये गए हैं।

-सूर्योदय के समय कफ एवं पित्त दोष अपने स्थान से बाहर निकलने को बेताब होते है, अत: वामक एवं विरेचक दवाओं के सेवन के लिए यह बेहतर समय माना गया है।

-मलाशय में उपस्थित अपान वायु के कारण होने वाली परेशानियों में दिन में भोजन के पहले दवा का सेवन करना बेहतर होता है।

-यदि खाने की इच्छा न हो यानि अरुचि जैसी स्थिति हो तो, रुचिकर भोजन के साथ मिलाकर दवा का सेवन करना बेहतर होगा।

-यदि रोगी में समान वायु के बिगड़ जाने से अग्नि मंद हो गयी हो तो, बुझी हुई अग्नि को प्रज्वलित करने हेतु भोजन करते समय या आधा भोजन कर लेने के बाद औषधि का सेवन करना चाहिए।

- इसी  प्रकार व्यान वायु बिगडने पर भोजन के बाद दवा का सेवन करना चाहिए ...,पुन:  यदि किसी को हिचकी,झटके एवं कम्पवात जैसी समस्या हो एवं समान वायु भी विकृत हो तो, भोजन के पूर्व या भोजन करने के बाद दवा देना चाहिए ...उदान वायु के बिगडऩे पर या सांस,खांसी आदि  स्थितियों में रात्रि के पूर्व प्रहर में दो ग्रास के मध्य औषधी देनी चाहिए।

- प्राणवायु के विकृत होने पर सायंकालीन नाश्ते  के अंत  मे  दवा देनी  चाहिए ..प्यास,उल्टी दमा या विष के सेवन किये रोगी को जल्दी-जल्दी अनेक बार अलग से या भोजन में मिलाकर दवा देने का निर्देश है।

- इसी प्रकार कान,नाक ,गला जिव्हा ,दांत आदि से समबंधित रोगों में दोषों को घटाने  या बढाने के लिए रात्रि में सोते समय भोजन से पूर्व दवा दी जानी चाहिए .....।

 इसलिए बेहतर यह होगा कि आप कुशल आयुर्वेदिक चिकित्सक के परामर्श से ही आयुर्वेदिक दवा का सेवन करें ...जिनसे दवा के किस समय लेने ,न लेने ,किसके साथ लेने न लेने,पथ्य एवं अपथ्य  से सम्बंधित परामर्श भी मिले।
 

गर्मी में इन 8 आयुर्वेदिक हेल्दी आदतों को अपनाएं और देखें कमाल

आयुर्वेद में ऋतुओं को काल के अनुसार आदान काल एवं विसर्ग काल में बांटा गया है। आदान काल में वर्षा ,शरद एवं हेमंत ऋतुएं आती हैं तथा विसर्ग काल में शिशिर ,वसंत एवं ग्रीष्म ऋतु का समावेश होता है। आदानकाल में सूर्यबल क्षीण एवं चन्द्रबल पूर्ण होता है, जबकि इसके  विपरीत विसर्ग काल में सूर्यबल पूर्ण एवं चन्द्रबल क्षीण होता है। ध्यान रहे , ऋतुओं का यह वर्गीकरण भारतीय उपमहाद्वीप के मौसम के हिसाब है। प्रत्येक ऋतु में रहने-खाने के बारे में कुछ नियमों को बतानेवाला विज्ञान मात्र आयुर्वेद है आइये आज हम आपको गर्मी के दिनों में स्वस्थ  रहने के टिप्स बताते हैं 

- गर्मी के मौसम में सूर्य जगत के स्नेहों का आदान यानी अवशोषित कर लेता है। इसलिए इस मौसम में क्षमता से अधिक व्यायाम,धूप एवं कटु,अम्ल  ,लवण रसयुक्त भोजन के सेवन का सर्वथा परित्याग कर देना चाहिए।

-  शराब का सेवन नहीं करें तो बेहतर है, शक्कर मिली हुई ठंडी पानक ,शरबत या सत्तू के घोल का सेवन करना चाहिए।

- मिट्टी के बर्तन में रखे गए जल का सेवन शरीर में शीतलता को बनाए रखते हैं। 

- द्राक्षा (अंगूर ),नारियल का पानी,प्राकृतिक हवा का सेवन उत्तम है।

- स्नान में चन्दन एवं कपूर का प्रयोग गर्मी से राहत देता है।

- मैथुन को भी प्रतिदिन वज्र्य माना गया है।

- हल्के पतले कपडे पहनना ही इस ऋतु में शरीर को सुख देता है।

- पूल ,तालाब या नदी में तैरना भी उचित माना गया है। ये सभी रहने के नियम आयुर्वेद में ऋतुचर्या की नाम से ग्रथों में बताये गए हैं जिनके सयंमित      प्रयोग से आप स्वस्थ रह सकते हैं।

Monday, May 7, 2012

कोलेस्ट्रोल कंट्रोल करने के लिए, कच्चे लहसुन का बहुत आसान प्रयोग

कोलेस्ट्रोल का स्तर जब सामान्य से अधिक हो जाता है तो वह रक्त वाहिनियों में जमने लगता है जिसके कारण हृदय रोग होने की संभावना बढ़ जाती है। अगर आप भी बढ़े हुए कोलेस्ट्रोल या दिल की बीमारी से पीड़ित हैं तो नीचे लिखे उपाय आपके बहुत लाभदायक सिद्ध होंगे। 

- कच्चा लहसुन रोज सुबह खाली पेट खाने से कोलेस्ट्रोल कम होता है।



- रोज 50 ग्राम कच्चा ग्वारपाठा खाली पेट खाने से कोलेस्ट्रोल कम हो जाता है।



- अंकुरित दालें भी खाना आरंभ करें।



- भोजन में सोयाबीन का तेल जरूर प्रयोग करें यह भी एक उपचार है।



- लहसुन, प्याज का रस भी उपयोगी हैं।



- नींबू, आंवला जैसे भी ठीक लगे,प्रतिदिन लें।



- शराब या कोई नशा न करें।



- ईसबगोल के बीजों का तेल आधा चम्मच दिन में दो बार लें कोलेस्ट्रोल कंट्रोल में रहेगा।



- दूध में दालचीनी डालकर पीएं तो कोलेस्ट्रोल कण्ट्रोल में हो जाएगा।



- रात के समय दो चम्मच धनिया एक गिलास पानी में भिगो दें। प्रात: हिलाकर पानी पी लें। धनिया भी चबाकर निगल जाएं।



- तुलसी के पत्तों का रस और नींबू का रस मिलाकर पीने से भी लाभ होता है।

ब्लडप्रेशर...??? ये पांच नुस्खे अचूक रामबाण हैं

अगर आपको कभी भी चक्कर आने लगते हैं, सिर घूमने लगता है, या किसी किसी काम में मन नहीं लगता, कमजोरी महसूस होती है और नींद भी नहीं आती तो जरा सावधान हो जाइए। वर्तमान समय में बढ़ते मानसिक तनाव और भागदौड़ से लोगों में हाई ब्लड प्रेशर की शिकायत होना आम हो गया है। थोड़ी सी टेंशन या जम्मेदारियों को पूरा न कर पाने का दबाव इस बीमारी को लगातार बढ़ावा दे रहा है। आयुर्वेद के कुछ घरेलू नुस्खों को अपनाकर आप काफी हद तक इस बीमारी से बच सकते हैं।

-प्याज का रस और शुद्ध शहद बराबर मात्रा में मिलाकर रोज करीब दस ग्राम की मात्रा में लें।

- तरबूज के बीज की गिरि और खसखस दोनों को बराबर मात्रा में मिलाकर पीस लें रोज सुबह-शाम एक चम्मच खाली पेट पानी के साथ लें। यह प्रयोग करीब एक महीने तक नियमित करें।

- मेथीदाने के चूर्ण को रोज एक चम्मच सुबह खाली पेट लेने से हाई ब्लडप्रेशर से बचा जा सकता है।

- खाना खाने के बाद दो कच्चे लहसुन की कलियां लेकर मुनक्का के साथ चबाएं, ऐसा करने से हाई ब्लड प्रेशर की शिकायत नहीं होती।

- 21 तुलसी के पत्ते तथा सिलबट्टे पर पीसकर एक गिलास दही में मिलाकर सेवन करने से हाई ब्लडप्रेशर में लाभ होता है। 

खाना न पचने पर अपनाएं ये छोटे-छोटे घरेलू टिप्स

1- नींबू को काटकर नमक डालकर गर्म करके चूसने पर खाना आसानी से पच जाता है।



2- दही में सिका हुआ जीरा, नमक और कालीमिर्च डाल कर रोज खाने से खाना जल्दी पच जाता है। 



3- दो लौंग पीसकर उबलते हुए आधा कप पानी में डाले फिर ठंडा करके पी जाएं। इसे रोज तीन बार करें। 



4- प्याज काटकर नींबू निचोड़ कर भोजन के साथ खाने से बदहजमी दूर होता है। 



5- तीन ग्राम राई को पीसकर पानी में घोलकर पीने से फायदा मिलता है।



6- खाने के बाद तुलसी और कालीमिर्च चबाने से अपच की समस्या खत्म हो जाती है।



7- खाने के बाद छाछ पीने से भी लाभ होता है।



8- दालचीनी, सौंठ और इलायची थोड़ी-थोड़ी मात्रा में मिलाकर खाएं अपच की समस्या नहीं होगी।

शहद खाएं तो इन बातों का रखें ध्यान वरना ये जहर बन जाएगा

शहद को आयुर्वेद में अमृत माना गया है। रोजाना सही ढंग से शहद लेना सेहत के लिए अच्छा होता है। लेकिन गलत तरीके से शहद का सेवन करने से फायदे की जगह नुकसान भी हो सकता है। इसलिए जब भी शहद का सेवन करें नीचे लिखी बातों को जरूर ध्यान में रखें।



- चाय, कॉफी में शहद का उपयोग नहीं करना चाहिए। शहद का इनके साथ सेवन जहर के समान काम करता है।



- अमरूद, गन्ना, अंगूर, खट्टे फलों के साथ शहद अमृत है।



- इसे आग पर कभी न तपायें।



- मांस, मछली के साथ शहद का सेवन जहर के समान है।



- शहद में पानी या दूध बराबर मात्रा में हानिकारक है।



- चीनी के साथ शहद मिलाना अमृत में विष मिलाने के समान है।



- एक साथ अधिक मात्रा में शहद न लें। ऐसा करना नुकसानदायक होता है। शहद दिन में दो या तीन बार एक चम्मच लें।



- घी, तेल, मक्खन में शहद जहर के समान है।



- शहद खाकर किसी तरह की परेशानी महसूस हो रही हो तो नींबू का सेवन करें।