Friday, March 27, 2015

पेट (abdominal diseases) की बीमारियों का अचूक उपाय है परवल, इसके हैं 7 फायदे


 परवल भारत के हर राज्य में सब्जी के तौर पर खाया जाता है। दिखने में यह कुंदरू की तरह होता है, लेकिन आकार में उससे थोड़ा बड़ा। बाजार में परवल लगभग सभी मौसम में बिकते हुए देखा जा सकता है। सब्जियों के तौर पर इस्तेमाल किए जाने वाला परवल आदिवासियों के लिए किसी दवा से कम नहीं है। शहरी लोग इसके शायद इसके कई सारे औषधीय गुणों से वाकिफ नहीं हैं। इसकी सब्ज़ी और पत्ते भी बहुत फायदे करते हैं। इसमें पेट की कई बीमारियों का इलाज छिपा है। ये जल्दी चोट भी ठीक करता है।
तो चलिए आज जानते हैं किस तरह हिन्दुस्तानी आदिवासी परवल को अपनी हेल्थ की बेहतरी के लिए उपयोग में लाते हैं। परवल का वानस्पतिक नाम ट्रायकोसेन्थस डायोका है और इसे अंग्रेजी भाषा में पोईंटेड गोर्ड कहते हैं। अक्सर कई फलों और सब्जियों का अलग-अलग मौसम में सेवन करना ठीक नहीं माना जाता है, लेकिन सेहत के लिए उत्तम गुणों से भरपूर होने की वजह से आदिवासी परवल का साल भर सेवन करते हैं। हमारी सीरीज़ 'सेहत का खजाना' में आज हम परवल के बारे में जानेंगे।
परवल की सब्जी पेट की बीमारियों का अचूक उपाय
परवल की सब्जी खाने से पेट की सूजन दूर हो जाती है। जिन लोगों को पेट में अक्सर पानी भर जाने की शिकायत होती है, उनके लिए परवल वरदान है। आदिवासी हर्बल जानकारों के अनुसार परवल की सब्जी खाते रहने से पेट से जुड़ी कई प्रकार की समस्याओं में आराम मिलता है।

परवल और हरी धनिया से मर जाते हैं पेड़ के कीड़े
परवल और हरे धनिया की पत्तियों की समान मात्रा (20 ग्राम प्रत्येक) लेकर, उसे कुचलकर रात भर पानी में भिगोएं और सुबह इसे छानकर तीन हिस्से करके प्रत्येक हिस्से में थोड़ा-सा शहद डालकर दिन में 3 बार पीने से पेट के कीड़े मर जाते हैं।
परवल का जूस मोटापा करता है दूर
आदिवासी मानते हैं कि परवल के फलों का जूस तैयार कर लिया जाए और इसमें थोड़ी मात्रा में सौंफ और हींग का पिसा हुआ चूर्ण मिला लिया जाए और सेवन किया जाए, तो मोटापा दूर होने लगता है। परवल का ताजा तैयार जूस ताकत और ऊर्जा देता है।

परवल के रस का लेप सिरदर्द में फायदेमंद
सिरदर्द होने पर परवल के रस का लेप लगाना चाहिए। परवल को कुचलकर इसका रस निकालें और उसे माथे पर लगाएं। ज्यादा दर्द होने पर परवल की पत्तियों को तोड़कर उनका भी रस तैयार कर उपयोग में लाया जा सकता है। जड़ों का रस भी सिरदर्द में राहत दिलाता है।

घाव सूखाने में मददगार परवल के पत्ते
परवल के पत्तों को पीसकर इसका लेप मवाद युक्त फोड़ें- फुंसियों और घावों पर लगाने से वो जल्दी सूख जाते हैं। अगर शरीर में ज्यादा फोड़े-फुंसी हो जाएं, तो कम मसालों से तैयार की गई परवल की सब्जी को 15 दिनों तक लगातार खाने से काफी आराम मिलता है। आदिवासियों के अनुसार परवल खून साफ करने में बहुत कारगर होता है।

त्वचा के रोग मिटाने के लिए खाएं पका हुआ परवल
पातालकोट के आदिवासी मानते हैं कि पका हुआ परवल खाने से त्वचा के सभी रोग नष्ट हो जाते हैं। मध्यभारत में आदिवासी परवल का अचार तैयार करते हैं। माना जाता है कि परवल का अचार स्वादिष्ट होने के साथ- साथ सेहत के लिए भी काफी फायदेमंद होता है।
परवल की जड़ों से साफ होता है पेट
अपच, कब्ज या अन्य किसी वजह से पेट की सफाई जरूरी हो, तो परवल की जड़ों को पानी में उबालकर एक गिलास पीने से पेट की सफाई हो जाती है। डांग- गुजरात के आदिवासियों के अनुसार इस फॉर्मूले का सेवन रात को सोने से पहले करना चाहिए।

नुस्खे, ये करेंगे तो सालों तक बूढ़े नहीं दिखेंगे




वर्तमान समय में अनियमित जीवन शैली, नींद की कमी, पर्यावरण में मौजूद रसायन, धूल के कण, प्रदूषण आदि की वजह से कई लोग समय से पहले ही बूढ़े दिखाई देने लगते हैं। त्वचा पर असमय झुर्रियां आना भी ऐसा ही एक लक्षण है, जो बुढ़ापे की तरफ इशारा करता है। जब ऐसा कम उम्र में होता है तो आईने के सामने जाने से भी डर लगने लगता है। साथ ही, आत्मविश्वास में जबरदस्त कमी आने लगती है। खाने में पोषक तत्वों की कमी, तैलीय और मिर्च युक्त खाद्य पदार्थों, ज्यादा चाय-कॉफी और एल्कोहल आदि के सेवन से भी यह समस्या हो सकती है।

भागदौड़ और तनाव भरे जीवन में लोगों का ध्यान परंपरागत हर्बल नुस्खों से दूर होता जा रहा है। आहिस्ता-आहिस्ता रसायनयुक्त घातक उत्पादों ने घर-घर तक अपनी पहुंच बना ली है। अब वक्त आ चुका है जब कि हमें अपनी जड़ों तक जाना होगा। हमें सदियों से चले आ रहे परंपरागत हर्बल ज्ञान अपनाने की कवायद शुरू करनी होगी।
इस लेख के जरिए हम कुछ चुनिंदा हर्बल नुस्खों का जिक्र करेंगे, जिनका उपयोग कर आप झुर्रियों से छुटकारा पा सकते हैं।

1. सेब को कुचल कर उसमें कुछ मात्रा में कच्चा दूध मिलाएं। इस पेस्ट को चेहरे पर लगाएं। जब सूख जाए तो इसे धो लें। ऐसा सप्ताह में कम से कम चार बार करें, बहुत जल्दी असर दिखाई देने लगेगा।
2. दो टमाटर पीस लें। पीसे हुए टमाटर में तीन चम्मच दही और दो चम्मच जौ का आटा मिलाएं। चेहरे पर इस मिश्रण को कम से कम 20 मिनट के लिए लगाकर रखें। यह त्वचा में कसाव लाता है, जिससे झुर्रियां कम होने लगती हैं। इस उपाय को सप्ताह में दो बार कम से कम एक माह तक उपयोग में लाना चाहिए।
3. रात सोने जाने से पहले संतरे के दो चम्मच रस में दो चम्मच शहद मिलाकर 20 मिनट तक लगाकर रखें। इसके बाद में साफ कॉटन को दूध में डुबोकर चेहरे की सफाई करें। यह नुस्खा नियमित रूप से अपनाएं, फायदा दिखने लगेगा।
4. बरगद की हवाई जड़ों में एंटी-ऑक्सीडेंट सबसे ज्यादा पाए जाते हैं। इसलिए ये जड़ें झुर्रियां दूर करने में बहुत उपयोगी हैं। हवा में तैरती ताजी जड़ों के सिरों को काटकर पानी में कुचल लें। इस रस का चेहरे पर लेप करें। झुर्रियां दूर होने लगेंगी।

इमली या शहद का ऐसे उपयोग करने से चेहरा ग्लौ करने लगता है


फेयर और ग्लोइंग स्किन तो सभी चाहते हैं, लेकिन उसके लिए बहुत ज्यादा कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स यूज करना ठीक नहीं है। दरअसल, कई बार ज्यादा कॉस्मेटिक्स यूज करने से स्किन का कलर ज्यादा डार्क हो जाता है। ऐसे में रंगत निखारने के लिए कॉस्मेटिक्स की जगह घरेलू नुस्खों का उपयोग करेंगे तो सांवलापन कम हो जाएगा और चेहरा चमकने लगेगा। चलिए आज जानते हैं कुछ ऐसे ही घरेलू नुस्खों के बारे में जिन्हें अपनाने से रंग निखरने लगता है…..
1. इमली के गुदे को त्वचा पर लगाकर कुछ देर रखें और फिर चेहरा धो लें। रंग निखरने लगेगा।

2. एक छोटा चम्मच शहद लें उसमें उतना ही पानी मिलाएं। इस मिश्रण को चेहरे पर लगाएं। पंद्रह मिनट बाद चेहरा धो लें।

3. पेट को हमेशा दुरुस्त रखें, कब्ज न रहने दें।

4. एक बाल्टी ठण्डे या गुनगुने पानी में दो नींबू का रस मिलाकर कुछ महीने तक नहाने से त्वचा का रंग निखरने लगता है। (इस विधि को करने से त्वचा से संबंधित कई रोग ठीक हो जाते हैं)।

5. आंवले का मुरब्बा रोज एक नग खाने से दो तीन महीने में ही रंग निखरने लगते है।
6. दो छोटे चम्मच बेसन में आधा छोटी चम्मच हल्दी मिलाएं। फिर इस लेप में दस बूंद गुलाब जल व दस बूंद नींबू मिलाकर खूब फेंटे। नहाने से पहले इस लेप को चेहरे पर मलें। आधे घंटे बाद चेहरा धो लें।

7. कोहनियों का कालापन साफ करने के लिए गुलाब जल व ग्लिसरीन में नींबू रस मिलाकर लोशन तैयार करें। इस लोशन को पांच मिनट तक धूप में रखें। रोज इस मिश्रण को कोहनियों पर मलें।

8. आधा गिलास गाजर का रस सुबह खाली पेट लेने से एक महीने में रंग निखरने लगता है।

9. मुल्तानी मिट्टी में गुलाब जल मिलाकर लगाने से रंगत निखरने लगती है।

10. एक चम्मच शहद व एक चम्मच नींबू का रस मिलाकर चेहरे पर लगाएं। त्वचा निखर जाएगी।

11. एक चम्मच नींबू के रस में थोड़ा सा मूंगफली का तेल मिलाकर लगाएं। कुछ देर लगा रहने दें फिर साफ कर लें। रंग साफ होगा और चेहरा चमकने लगेगा।

नुस्खे: तरबूज और संतरे से भी होता है इन रोगों का इलाज


जिन फलों में पानी अधिक होता है, उन्हें गर्मी के मौसम में सेहत के लिए सबसे बेहतरीन माना जाता है। तरबूज और संतर गर्मी केे मौसम में ज्यादा आता है। इनका सेवन भी इसी मौसम में अधिक लाभदायक माना जाता है।
गर्मी के ये दोनों ही मौसमी फल शरीर को चुस्त और दुरुस्त रखते हैं। आज हम जिक्र कर रहे हैं। इन दोनो फलों से जुड़े पारंपरिक नुस्खों के बारे में और जानेंगे किस तरह आदिवासी इन दोनों फलों का इस्तेमाल रोगों के उपचार के लिए करते हैं...
1. पातालकोट के हर्बल जानकारों की मानी जाए तो तरबूज के बीजों की गिरी और मिश्री की समान मात्रा (6 ग्राम) एक साथ चबाकर खाने से नपुंसकता दूर होती है। इन बीजों को खाने के बाद दूध जरूर पिएं।
2. तरबूज का रस मिट्टी के बर्तन में रातभर खुले आसमान के नीचे रख दें। सुबह इसमें चीनी मिलाकर पिएं। इससे मूत्र में जलन की समस्या खत्म हो जाती है।
3. संतरा बहुत एनर्जी देने वाला फल है। भोजन करने के बाद अगर आधा गिलास संतरे का रस रोज लिया जाए तो पेट का अल्सर ठीक हो जाता है।
4. छांव में सुखाए संतरे के छिलकों को बारीक पीस लें। इस चूर्ण को घी के साथ बराबर मात्रा में मिलाएं। 1-1 चम्मच दिन में 3 बार लें। बवासीर में आराम मिलेगा।
5. आधुनिक विज्ञान भी तरबूज को वियाग्रा से ज्यादा असरदार मानता है। रोज तरबूज का सेवन करने से सेक्स पावर बढ़ता है। रिसर्च के मुताबिक, तरबूज का जूस सेक्स की इच्छा बढ़ाने वाले हॉर्मोन टेस्टास्टेरॉन के स्तर को बढ़ाता है।

6. तरबूज में बीटा-कैरोटीन और एंटीऑक्सीडेंट अधिक मात्रा में पाए जाते हैं। इसीलिए इसके सेवन से शरीर हमेशा जवान बना रहता है। साथ ही, त्वचा से झुर्रियां हमेशा दूर रहती हैं।

Tuesday, March 24, 2015

पैरों के दर्द और खिंचाव का प्राकृतिक घरेलू उपाय



    बर्फ या फ्रीज़िंग पैक को उस जगह पर लगायें जहाँ पर पैरों में दर्द है। बर्फ उस जगह को सुन्न करने के द्वारा आराम पहुंचाता है।
    स्नान करते समय पैरों पर गुनगुने पानि को डालना वास्तविक्ता में आराम पहुंचायेगा।
    बहुत सारा पानी पियें और पोषक फलों का उपभोग करें जिसमे कैल्शियम और पोटैशियम तत्व पाया जाता है।
    पैरों के व्यायाम करने की भी सलाहा दी जाती है जो अपके शरीर में खून के परिसंचरण को बढ़ाकर आपके पैर के दर्द को आराम पहुंचायेगा।
    हल्दी पाउडर, नीम्बू रस और नमक को मिलाकर एक चिकना लेप बनायें। इस लेप को प्रभावित क्षेत्र पर लगायें। यह आपको दर्द से तुरंत आराम देगा और पैरों के दर्द को खत्म भी करेगा।
    ऊंची एड़ियों वाले जूतों/चप्पलों से बचिये इनसे गिरने की सम्भावना रहती हैं और इसी प्रकार पैरों को लपेट कर न बैठें।
    अपने पैरों की नियमित मसाज करें, यह निश्चित रूप से आपके पैरों के दर्द को दूर करने में सहायता करेगा।
    अपने पैरों को ठण्ड से बचायें और ऐसे कपड़े का चुनाव करें जो ठण्ड के दिनों में आपके पैरों का न खोले रहे।

Monday, March 23, 2015

संतरे का रोज़ाना सेवन करने से होते हैं ये 10 Health Benefits


: संतरा गर्मियों के मौसम में बड़े चाव से खाया जाने वाला फल है। इसे खाकर आप अपनी भूख और इसका जूस पीकर कुछ देर तक के लिए अपनी प्यास भी शांत कर सकते हैं। एक पूरे संतरे में लगभग 85 प्रतिशत कैलोरी, कोलेस्ट्रॉल, सोडियम और फैट बिल्कुल ना के बराबर होता है। सेन डियागो की आहार विशेषज्ञ ने इस बात को प्रमाणित किया है कि संतरा विटामिन सी का सबसे अच्छा स्रोत है। यूएस के कृषि विभाग के अनुसार सामान्य संतरे में 86 प्रतिशत कैलोरी, 98 मिग्री विटामिन सी और 163 प्रतिशत न्यूट्रीशन्स पाए जाते हैं।
संतरा ना केवल रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है, बल्कि त्वचा के लिए भी बहुत फायदेमंद है। दिल की बीमारियों से लड़ने के साथ ही कोलेस्ट्रॉल लेवल को भी कंट्रोल करता है। इसके साथ ही सांस से संबंधित बीमारियों, कैंसर, गठिया रोग, पथरी की समस्या और मुंह तथा पेट के छालों से भी निजात दिलाता है।
फाइबर के अलावा संतरे के जूस में भी ये सारे तत्व मौजूद होते हैं। संतरे में पाए जाने वाले सफेद रेशे फाइबर का सबसे अच्छा स्रोत होते हैं। ये कई प्रकार की बीमारियों से छुटकारा दिलाते हैं।
संतरे से होने वाले स्वास्थ्य लाभ
रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है
ज्यादातर साइट्रस फल विटामिन सी से भरपूर होते हैं और संतरा भी उनमें से ही एक है। साल 2010 में छपे मेडिकल जर्नल फार्माकॉग्नोसी के अनुसार विटामिन सी सेल्स की रक्षा करने के साथ ही त्वचा की जड़ों से सफाई कर उसे भरपूर पोषण प्रदान करता है। ये कैंसर और दिल की बीमारियों से बचाता है। साथ ही रोजाना इसे खाने से कई प्रकार के संक्रमण जैसे सर्दी, जुकाम से भी छुटकारा मिलता है। और-तो-और, शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी काफी हद तक बढ़ जाती है।
त्वचा
विटामिन सी के साथ ही इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स त्वचा को नुकसान पहुंचाने वाले कारकों जैसे सूरज की गर्मी और प्रदूषण से बचाकर आपकी त्वचा को सुंदर बनाए रखते हैं। इससे समय से पहले त्वचा पर पड़ने वाली झुर्रियों की संभावना काफी हद तक कम हो जाती है। साथ ही इसके रस और छिलकों से निकलने वाले रस को त्वचा पर लगाकर दाग-धब्बे, पिंपल्स भी दूर किए जा सकते हैं।
Other benefits: कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करता है, मधुमेह रोग में फायदेमंद है, पाचन तंत्र को सही करने के साथ ही वजन भी कम करता है, आंखों की रोशनी बढ़ाता है, कैंसर बीमारी से बचाता है।

रोज़ाना वर्कआउट के बावजूद इन 23 आदतों की वजह से बढ़ सकता है मोटापा


 उच्च रक्तचाप, डाइबिटीज जैसी गंभीर बीमारियों में मोटापा भी शामिल हो चुका है। या यूं कहें कि इन दोनों बीमारियों की जड़ ही मोटापा है। दुनिया का हर दूसरा या तीसरा व्यक्ति इस बीमारी से जूझ रहा है, लेकिन इस समस्या का उचित समाधान नहीं मिल पा रहा। कोई वजन घटाने के लिए डाइटिंग कर रहा है तो कोई रोजाना एक्सरसाइज। इस बात से अंजान होकर कि खान-पान में थोड़ा-सा बदलाव करके हम इस समस्या से छुटकारा पा सकते हैं। साथ ही मोटापे के कारण होने वाली कई प्रकार की बीमारियों से भी। आइए जानते हैं क्या है ये आदतें जो जाने-अंजाने हमारा वजन बढ़ाने में मुख्य भूमिका निभा रही हैं।

1. ओवर इटिंग

आपके पास फैट बढ़ाने वाले खाने-पीने की चीज़ों की लंबी लिस्ट होगी। इन फूड्स को आप खाने से बचते भी हैं। लेकिन उसे खाने की अपनी इच्छा को नहीं मार पाते जो ओवर इटिंग का कारण भी बन जाती है। इसके लिए जरूरी है कि फैट बढ़ाने वाली अपनी मनपसंद चीज़ें कभी-कभार खा लें जिससे आपका मन भरा रहे और आप ओवर इटिंग से बचे रहें।

2. ज्यादा तनाव

तनाव हमारी सेहत का सबसे बड़ा शत्रु है। तनाव से हमारे शरीर में कॉरटिसोल का स्तर बढ़ जाता है। साथ ही वसा और कार्बोहाइड्रेट का भी। तनाव के कारण हम कई बार अपनी भूख को नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन फिर जब भूख लगती है तो हम जरूरत से ज्यादा खा भी लेते हैं। इसके लिए जरूरी है कि हम तनाव कम करने वाली एक्सरसाइज़ और योगासन करें।

Other Reasons: जंक फूड खाना, भूखा रहना, घूमना-फिरना, Genes (जीन), केमिकल इम्बैलेंस, गलत धारणा बना लेना, खड़े होकर खाना, इच्छानुसार खाना-पीना, हेल्दी खाने की अधिकता, नाश्ता ना करना, हर किसी की सलाह लेना, कैल्शियम की कम मात्रा, बैठकर-लेटकर खाना, कम सोना, देर से खाना, जल्दीबाजी में खाना, ऊंची हील पहनना, भावुक होकर खाना, हरी सब्ज़ियां नहीं खाना, खाली पेट एक्सरसाइज करना, एक्सरसाइज से पहले गलत खान-पान।

Friday, March 20, 2015

मुंह के छाले ठीक करने से लेकर HIV कंट्रोल करने में सक्षम है BANANA


  
 केले के बारे में दुनिया जानती है। किसी शहर या कस्बे का कोई भी बाजार ऐसा नहीं जहां केला बिकते हुए ना मिलें। घर-घर में पसंद किया जाने वाला केला 10 हजार साल से हमारे जीवन का हिस्सा है और आने वाले सैकड़ों हजारों सालों तक इस फल को हम सराहते रहेंगे। महज एक फल के तौर पर जाने वाले केले के बारे में बहुत कम लोग ही जानते हैं कि इसके पौधे में औषधीय गुणों का खज़ाना है। चलिए आज जानते हैं आधुनिक औषधि विज्ञान जगत ने केले के किन-किन गुणों को क्लिनिकल तौर पर प्रमाणित किया है। क्या सिर्फ स्टार्च से भरपूर होने के अलावा केले में और भी कुछ है जो आम तौर पर ज्यादा लोगों को नहीं पता?
मुंह के छाले ठीक करता है
कई आर्टिफिसल और केमिकल्स वाली दवाएं जैसे एस्पिरिन, इण्डोमेथासिन, सिस्टियामाइन, हिस्टामाइन आदि के सेवन के बाद कई लोगों को मुंह में छाले आ जाते हैं। आधुनिक शोधों से जानकारी मिलती है कि कच्चे केले को सुखाकर चूर्ण बना लिया जाए और इस चूर्ण को चाटा जाए, तो मुंह के छालों को ठीक कर देता है।

पथरी बाहर निकालता है
केले के तने का रस पथरी में बेहद कारगर है। एक शोध के अनुसार केले के तने का रस किडनी में होने वाली पथरी, खास तौर से ओक्सालेट की बनी पथरी को तोड़कर पेशाब मार्ग से बाहर निकाल देता है।
एचआईवी कंट्रोल करता है
अनेक शोधों के परिणामों पर नजर डाली जाए, तो जानकारी मिलती है कि केले में वायरस नियंत्रण के जबरदस्त गुण होते हैं। कुछ शोध तो इसे MRSA और HIV के नियंत्रण तक के लिए उपयोगी मानते हैं।

हेल्थ, त्वचा और बालों के लिए फायदेमंद है Mango, इसमें छिपे हैं ये गुण


 गर्मियां अपने साथ आमों का सीज़न भी लेकर आती है। फलों का राजा आम शायद ही किसी को नापसंद हो और जब ये पता चले कि आम ना सिर्फ स्वाद, बल्कि सेहत के लिहाज से भी बहुत फायदेमंद है, तो भला कौन इसे नहीं चखेगा। हमारे यहां आम के कई प्रकार पाए जाते हैं। इसी के चलते अलग-अलग आम के आकार और स्वाद में भी अंतर पाया जाता है। हापुस, बादाम, तोतापरी, लंगड़ा, सिंदूरी, नीलम, रत्नागिरी, लालपत्ता आदि आम की ही कुछ प्रजातियों के नाम हैं। आम कच्चे और पके दोनों ही रूपों में बड़ा उपयोगी है।
आम में अमिनो एसिड, विटामिन ए, सी और ई, नियासिन और बीटा-कैरोटीन, आयरन, कैल्शियम, मैग्नीशियम, पोटैशियम, विभिन्न प्रकार के एन्जाइम अत्यधिक मात्रा में पाए जाते हैं। विटामिन ए बाहरी वातावरण और कई प्रकार के जीवाणुओं के प्रभाव को रोकता है, तो वहीं विटामिन सी त्वचा के रोगों से बचाता है। विटामिन डी दांतों और हड्डियों के लिए बहुत फायदेमंद होता है।
कोलेस्ट्रॉल कम करता है
रोजाना आम खाने से इसमें मौजूद एडिपोनेक्टिन एक्स्ट्रा कोलेस्ट्रॉल का लेवल धीरे-धीरे कम करता है। और इंसुलिन बनने की प्रक्रिया को बढ़ाता है जिससे एक्स्ट्रा कोलेस्ट्रॉल अपने आप ऊर्जा में बदल जाता है। आम में लेप्टिन नामक केमिकल होता है जिससे भूख कम लगती है। इससे एक्स्ट्रा कैलोरी भी बर्न हो जाती है। पोटैशियम की भरपूर मात्रा हृदय गति और ब्लड प्रेशर दोनों को सुचारू रूप से चलाते हुए हार्ट अटैक के खतरे को कम करती है।
त्वचा निखारे
आम वाला फेस मास्क स्क्रबिंग के लिए भी काफी उपयोगी माना जाता है। इसमें पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट्स खासतौर पर विटामिन सी त्वचा को स्वस्थ रखने के साथ ही उसकी चमक को भी बनाए रखते हैं। आम में मौजूद फ्लेवोनॉयड्स त्वचा के रोम छिद्र (ओपन पोर्स) खोलकर मुहांसों को कम करते हैं। आम में पाया जाने वाला बीटा- कैरोटीन नामक तत्व विटामिन ए को कई तत्वों में बांट देता है, जो त्वचा को चमकदार बनाने के साथ ही उसे स्वस्थ भी रखते हैं। साथ ही विटामिन ई फ्री रेडिकल्स को खत्म करता है, जो समय से पहले बुढ़ापे को कम करता है और त्वचा की सफाई कर दाग-धब्बों से छुटकारा दिलाता है।
उपाय- खूबसूरत त्वचा पाने के लिए आम को खाने के बाद उसके छिलकों को फेंकने के बजाय उसके गूदे को अपनी त्वचा पर लगाकर 10-15 मिनट सूखने दें। उसके बाद गुनगुने पानी से धो लें। इतने आसान से तरीके को अपनाकर आप पा सकती हैं चंद मिनटों में दमकती त्वचा।
अन्य लाभ:- लू से बचाता है, आंखों के लिए फायदेमंद, पाचन क्रिया सही रखता है,किडनी की बीमारियां दूर करता है, कैंसर से बचाव, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है, याददाश्त बढ़ाता है, लव लाइफ सुधारता है, आम से पाएं दमकती त्वचा, ब्लैकहेड्स दूर करता है, उम्र कम करता है, रंग निखारता है, काले धब्बे दूर करे, कील-मुहांसे दूर करे, क्लींजर का काम करता है, फेसवॉश का काम करे, पपड़ी की परत उतारे, सेंसिटिव स्किन के लिए भी फायदेमंद, रूसी की समस्या दूर करे, बालों को झड़ने और सफेद होने से रोके।

आलू खाने से वज़न बढ़ता नहीं, बल्कि घटता है, ये हैं इसे खाने के फायदे


: भारत में आलू और इसकी सब्ज़ी, चिप्स, कचौड़ी, फ्रेंचफ्राइस लोगों को बहुत पसंद आते हैं, लेकिन अधिक चर्बी वाला समझकर, लोग इसे खाने से परहेज़ करते हैं। ऐसा नहीं है कि आलू मोटापा बढ़ाता है। इसमें विटामिन सी, विटामिन बी, आयरन, कैल्शियम और फॉस्फोरस पाए जाते हैं। आलू स्किन हेल्थ के लिए भी बहुत फायदेमंद है।
पारंपरिक तौर पर आलू का इस्तेमाल आदिवासी सदियों से करते आ रहे हैं। मध्यप्रदेश के पातालकोट घाटी और गुजरात के डांग जिले में आदिवासी आलू को सब्जी के तौर पर इस्तेमाल करते हैं। चलिए जानते हैं 10 आदिवासी हर्बल फॉर्मूलों के बारे में।
वजन कम करने में सहायक
उबले आलुओं पर हल्का-सा नमक छिड़क दिया जाए और उस व्यक्ति को दिया जाए जो वजन कम करना चाहता है, तो फायदा पहुंचता है। आदिवासियों के अनुसार ये सही नहीं है कि आलू मोटापा बढ़ाता है।
वज़न आलुओं की वजह से नहीं बढ़ता, बल्कि आलू को तलने के लिए इस्तेमाल में लाए जाने वाले तेल, घी आदि से बढ़ता है। कच्चे आलू या आलू जिसे तेल, घी आदि के बगैर पकाया जाए, तो वज़न कम करने में मदद मिलती है, क्योंकि इसमें कैलोरी के नाम पर कुछ खास नहीं होता है।
पेट के छालों के लिए कारगर फॉर्मूला
मध्यम आकार के आलू का रस तैयार किया जाए और करीब एक गिलास मात्रा का रस प्रतिदिन सवेरे लिया जाए, तो पाचन तंत्र ठीक होने लगता है। इस रस के सेवन से एसिडिटी नियंत्रण में भी जबरदस्त फायदा होता है। आदिवासियों की मान्यता है कि यह रस पेट के छालों के लिए भी बेहद कारगर फॉर्मूला है।
अन्य लाभ:- ब्लड प्रेशर कंट्रोल करता है, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है, घाव और छाले ठीक करता है, नींद न आने की समस्या दूर होती है, मस्से खुद टूट जाते हैं, बवासीर में आराम मिलता है, एनीमिया से बचाता है, सुंदर त्वचा के लिए फायदेमंद, बालों को मजबूत बनाता है।

Wednesday, March 18, 2015

स्नान के लिए प्राकृतिक घरेलु पाउडर सुन्नी पिंडी बनाने की विधि


बाजार में कई पाउडर उपलब्ध हैं पर सुन्नी पिंडी एक ऐसी पारंपरिक पाउडर है जो आंध्र प्रदेश के लोगों द्वारा इस्तेमाल की जाती है| यह त्वचा से मृत कोशिकाएं हटाकर उसे मुलायम करने में मदद करती है| कई घरों में यह पाउडर साबुन की जगह पर इस्तेमाल की जाती है|

सुन्नी पिंडी
सामग्री

    हरे चने का आटा – २५० ग्राम
    चने की दाल – २५० ग्राम
    काबुली चना – २५० ग्राम
    ताज़ी पीसी हुई हल्दी – २५ ग्राम
    मुलतानी मिटटी – २०० ग्राम
    गुलाब की पंखुड़ियों का पाउडर – ३० ग्राम
    संतरे के छिलके का पाउडर – ३० ग्राम
    नीम के पत्तों का पाउडर – ३० ग्राम
    शती – ३० ग्राम
    चावल का आटा – ३० ग्राम
    गेहू का आटा – ३० ग्राम
    तुलसी का पाउडर – १० ग्राम
    ४-५ बादाम
    १ बड़ा चम्मच मेथी के बीज

ऊपर दी गयी सामग्री में से जितनी उपलब्ध हो वह इस्तेमाल की जा सकती है| इनसे मिश्रण को अच्छी खुशबु मिलती है और यह त्वचा से सभी प्रकार के दाग धब्बे मिटाकर मृत कोशिकाओं को हटाता है| यह सामग्री किसी भी आयुर्वेदिक भंडार या किराने की दूकान पर आसानी से मिल सकती है|

    हरे चने का आटा, चने की दाल का आटा और काबुली चने का आटा त्वचा से धुल, मिटटी, लगाया हुआ तेल और अतिरिक्त पानी हटाते हैं|
    मेथी के बीज मिश्रण के सभी घटकों को बांधे रखते हैं|
    नींबू से त्वचा पर से गहरे रंग की परत हटती है| तुलसी और नीम त्वचा की कई बिमारियों से रक्षा करते हैं|
    शती और गुलाब की पंखुड़ियाँ सुन्नी पिंडी के मिश्रण को अच्छी खुशबु देते हैं जिस कारण आप इस फेस पैक को घंटो तक अपने चेहरे पर सहन कर सकें|

सुन्नी पिंडी बनाने की विधि

    ताजा हरे चने, चना दाल और काबुली चने लेकर उन्हें धुप में २ दिन के लिए सुखाएं| फिर उन्हें पीसकर आटा बना लें| घर के मिक्सर के ब्लेड को नुकसान से बचाने के लिए बाहर की चक्की में पिसवाने की सलाह है|
    हरे चने का आटा, चने की दाल का आटा, काबुली चने का आटा, हल्दी और अन्य सामग्री मिलाकर यह मिश्रण कांच के बर्तन में अच्छी तरह से ढक्कन लगाकर संग्रहित करें|

इस्तेमाल करने का तरिका

    सुन्नी पिंडी को पानी, दूध, नींबू का रस, मसली हुई ककड़ी, टमाटर का रस या दही इनमे से किसी एक में मिलाएं और पेस्ट बनाएं|
    जिस भाग पर आपको सुन्नी पिंडी लगानी हो उस पर तील का तेल, नारियाल का तेल, जैतून का तेल या सरसों का तेल इनमे से किसी एक तेल से मालिश करें|
    तेल लगाने से सुन्नी पिंडी त्वचा से अच्छी तरह से चिपक जाती है|
    सुन्नी पिंडी को त्वचा पर सूखने के लिए छोड़ दें और सूखने पर पानी से धो डालें|
    सुन्नी पिंडी आपकी त्वचा से धुल, मिटटी हटाकर मृत कोशिकाओं को भी निकालती है| इससे आपकी त्वचा मुलायम, साफ़ और उजली दिखती है|
    सुन्नी पिंडी त्वचा में खून के बहाव को नियमित करती है|

अगर रोज संभव न हो तो हफ्ते में एक बार सुन्नी पिंडी का उपचार करें और अपनी त्वचा को साफ़ सुथरी और मुलायम पायें|

कुंदरू के सेवन से उतर जाता है चश्मा, लाल भाजी से बढ़ते हैं ब्लड प्लेटलेट्स


: कुंदरू की जड़ों, तनों और पत्तियों में कई गुण हैं। ये चर्म रोगों, जुकाम, फेफड़ों के शोथ तथा डायबिटीज़ में लाभदायक बताया गया है। इसके अलावा अगर आप अपने खान-पान में सुधार करके आंखों से चश्मा हटाना चाहते हैं, तो भी कुंदरू का सेवन लाभ पहुंचाता है। कुंदरू के अलावा ऐसे कई आहार हैं, जिनके नियमित सेवन से हम स्वस्थ ज़िंदगी जी सकते हैं। इन आहारों को आदिवासी अपने भोजन में ज़रूर शामिल करते हैं।
आदिवासी भोजन और उसके गुण:
आदिकाल से ही वनस्पतियां मनुष्यों और जंतुओं के आहार का मुख्य स्त्रोत रही हैं। ग्रामीण, आदिवासी और वनांचलों के नजदीक रहने वाले लोग हमेशा से विभिन्न प्रकार की वन संपदाओं को ही अपना आहार अंग बनाए हुए हैं। एक तरफ हमारे गांव और जंगल हैं, वहीं दूसरी तरफ तथाकथित विकसित समाज है जिसने ज्यादा विकसित होने की दौड़ में अपने लालन-पालन में पोषक तत्वों को कहीं खो दिया है। पिछले दो दशकों में विश्व के तमाम बड़े वैज्ञानिकों ने अपनी शोध से ये साबित भी किया है कि आदिवासियों के प्राकृतिक आहार को अगर आज की दौड़ भरी जिंदगी में लोग अपना लें, तो सूक्ष्म तत्वों की कमी से होने वाले अनेक रोगों की छुट्टी हो सकती है। आइए हम भी जानते हैं कुछ ऐसे ही आहार के बारे में जो हम सभी की बेहतर सेहत के लिए रामबाण साबित हो सकते हैं।

चश्मा हटाए कुंदरू का सेवन
आदिवासियों के अनुसार कुंदरू के फल की अधकच्ची सब्जी लगातार कुछ दिनों तक खाने से आखों से चश्मा तक उतर जाता है। साथ ही माना जाता है कि इसकी सब्जी के निरंतर उपभोग से बाल झड़ने का क्रम बंद हो जाता है। यह गंजेपन से भी बचा जा सकता है।
ब्लड प्लेटलेट्स बढ़ाता है हरा और लाल साग
आदिवासियों के भोजन में हरी पत्तियों वाली साग-भाजियों की भरमार होती है। आदिवासियों के अनुसार शरीर में ताकत और चपलता बढ़ाने के लिए लाल भाजी बड़ी ही महत्वपूर्ण है, जबकि कुल्थी, डोमा और चौलाई जैसी भाजियां रक्त के लाल कणों (RBC) की संख्या बढ़ाने के साथ ब्लड प्लेटलेट्स को भी बढ़ाते हैं। यानी आपकी ताकत बढ़ाने और आपको स्वस्थ रखने की ताकत इन भाजियों में समाहित है।

Tuesday, March 17, 2015

स्तन कैंसर रोकती है पत्ता गोभी,चुकंदर दवाओं के साइड इफेक्ट्स करता है कम



 महिलाओं में स्तन कैंसर जैसी घातक बीमारी से निपटने के लिए इन आठ वनस्पतियों को काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। इन आठ वनस्पतियों और इनमें पाए जाने वाले रसायनों पर औषधि विज्ञान जगत में जबरदस्त शोध जारी है। चलिए आज जिक्र करते हैं इन्हीं आठ वनस्पतियों के बारे में और जानते हैं कि आखिर क्या कहती है मॉडर्न रिसर्च। साथ ही ये भी जानते हैं कि किस तरह ये वनस्पतियां महिलाओं में स्तन कैंसर को रोक सकती हैं या उपचार करने में कारगर साबित हो सकती हैं।
पत्ता गोभी: इंडोल-3-कार्बिनोल नामक रसायन पत्ता गोभी में काफी मात्रा में पाया जाता है। आधुनिक शोधों से जानकारी मिलती है कि यह रसायन स्तन कैंसर होने की संभावनाओं को काफी हद तक कम करता है।
चुकंदर: लाल चुकंदर का काढ़ा मल्टी ऑर्गन ट्यूमर्स की वृद्धि रोकने में कारगर है। अब वैज्ञानिक इसके काढ़े या जूस को अन्य कैंसर औषधियों के साथ उपयोग में लाने का प्रयास कर रहे हैं, ताकि कैंसर दवाओं के साइड इफेक्ट्स को कम करने में भी मदद मिले।

मसूड़ों की जलन जल्दी होती है दूर, इसकी छाल, बीजों में है कई बीमारियों का इलाज


 गले की खराश, गले में दर्द, मसूड़ों में जलन, अगर आपको ऐसी दिक्कतों का बार-बार सामना करना पड़ रहा है, तो इस पेड़ की छाल, बीज़ों, पत्तों आदि के कई फायदे हो सकते हैं।

लसोड़ा के बारे में:
लसोड़ा को हिन्दी में 'गोंदी' और 'निसोरा' भी कहते हैं। इसके फल सुपारी के बराबर होते हैं। कच्चे लसोड़ा का साग और आचार भी बनाया जाता है। पके हुए लसोड़े मीठे होते हैं और इसके अंदर गोंद की तरह चिकना और मीठा रस होता है। लसोड़ा मध्यभारत के वनों में पाया जाता है। यह एक विशाल पेड़ होता है जिसके पत्ते चिकने होते हैं। आदिवासी अक्सर इसके पत्तों को पान की तरह चबाते हैं। इसकी लकड़ी का इमारतों में उपयोग किया जाता है। इसे रेठु के नाम से भी जाना जाता है। इसका वानस्पतिक नाम कार्डिया डाइकोटोमा है। आदिवासी लसोड़ा का इस्तेमाल अनेक रोग निवारणों के लिए करते हैं। चलिए आज जानते हैं लसोड़ा के बारे में।
मसूड़ों की सूजन में आराम
इसकी छाल की लगभग 200 ग्राम मात्रा लेकर इतनी ही मात्रा पानी के साथ उबाला जाए और जब यह एक चौथाई शेष रहे तो इससे कुल्ला किया जाए, तो मसूड़ों की सूजन, दांतों का दर्द और मुंह के छालों में आराम मिल जाता है।
गले की तमाम समस्याएं होती हैं दूर

छाल के रस को अधिक मात्रा में लेकर इसे उबाला जाए और काढ़ा बनाकर पिया जाए, तो गले की तमाम समस्याएं खत्म हो जाती हैं। लसोड़े की छाल को पानी में उबालकर छान लें। इस पानी से गरारे करने से गले की आवाज़ खुल जाती है।

अदरक का लेप इस तरह लगाने से 2 दिन में खत्म होता है मोच का असर


 अदरक को कौन नहीं जानता? आम घरों की किचन में पाई जाने वाली अदरक औषधीय गुणों से भरपूर है। यह बहुत जल्द मोच का दर्द खत्म कर देती है, दांतों के दर्द में भी आराम दिलाती है और कब्ज़ जैसी दिक्कत भी भगाती है। सदियों से पारंपरिक तौर पर अदरक को अनेक रोगों के उपचार के लिए अपनाया जाता रहा है। आयुर्वेद में भी अदरक का खूब जिक्र है। अब तक आपने महज़ सर्दी-खांसी के लिए अदरक के कारगर होने की बात सुनी होगी, लेकिन आज हम आपको अदरक के कुछ और अनोखे गुणों के बारे में बताएंगे। साथ ही यह भी बताएंगे कि कैसे आदिवासी हर्बल जानकार अदरक का उपयोग तमाम देसी नुस्खों के लिए करते हैं।

1- मोच का असर खत्म

मोच आ जाए, तो अदरक का लेप लगाकर रख लें। जब लेप सूख जाए, तो इसे साफ करके गुनगुने सरसों के तेल से मालिश करनी चाहिए। दिन में दो बार दो दिनों तक किया जाए, तो मोच का असर खत्म हो जाता है।

2- वज़न बढ़ाने के लिए

जिन लोगों का वज़न कम है और जिन्हें मोटा होने की चाहत है, उन्हें भोजन से 15 मिनट पहले अदरक का एक टुकडा ज़रूर चबाना चाहिए। आदिवासियों के अनुसार अदरक खाने से भूख बढ़ती है।
3- सूजन और दर्द कम
4- दस्त में आराम
5- दातों में दर्द छू-मंतर
6- गैस और कब्ज़ लाभदायक
7- जोड़ दर्द गायब
8- इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए

तोरी के इस तरह सेवन से बाल होते हैं काले, झड़ते हैं मस्से


: उम्र से पहले बालों का सफेद होना आजकल आम बात हो गई है। इसकी वजह है लाइफस्टाइल। समय पर ठीक से ना खाना-पीना, सही से नहीं सोना, जंक फूड खाना। आजकल हम आपको बाल काले करने का ऐसा उपाय बता रहे हैं, जो घर पर आसानी से किया जा सकता है। जी हां, तोरी को ऐसे ऐसे उपचारों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। ये दर्द देने वाले मस्से भी ठीक करती है।
तोरी के बारे में:
तुरई या तोरी एक सब्जी है जिसे लगभग संपूर्ण भारत में उगाया जाता है। तुरई का वानस्पतिक नाम लुफ़्फ़ा एक्युटेंगुला है। तुरई को आदिवासी विभिन्न रोगों के उपचार के लिए उपयोग में लाते हैं। मध्यभारत के आदिवासी इसे सब्जी के तौर पर बड़े चाव से खाते हैं और हर्बल जानकार इसे कई नुस्खों में इस्तमाल भी करते हैं। चलिए आज जानते हैं ऐसे ही कुछ रोचक हर्बल नुस्खों के बारे में।
1- बाल काले करने के लिए
पातालकोट के आदिवासियों के अनुसार तुरई के छोटे-छोटे टुकड़े काटकर छांव में सूखा लें। फिर इन सूखे टुकड़ों को नारियल के तेल में मिलाकर 5 दिन तक रख लें। बाद में इसे गर्म कर लें। इस तेल को छानकर प्रतिदिन बालों पर लगाएं और मालिश करें, इससे बाल काले हो जाते हैं।
2- मस्से झड़ते हैं
आधा किलो तुरई को बारीक काटकर 2 लीटर पानी में उबालकर, इसे छान लें। फिर प्राप्त पानी में बैंगन को पका लें। बैंगन पक जाने के बाद इसे घी में भूनकर गुड़ के साथ खाने से बवासीर में बने दर्द और पीड़ा युक्त मस्से झड़ जाते हैं।

डैंड्रफ से छुटकारा दिलाता है तिल का तेल, कब्ज़ खत्म करता है गिलोय


: औषधीय पौधे हमारे जीवन का अहम हिस्सा हैं। सदियों से हम विभिन्न विकारों के इलाज के लिए औषधीय पौधों का उपयोग करते आ रहे हैं। गिलोय और तिल में कई बीमारियों का इलाज छिपा है। ये बिना किसी साइड इफेक्ट के हमारी कई समस्याएं हल करते हैं, जैसे सफेद बाल, कब्ज़, डायबिटीज़, वज़न बढ़ना। यह बात अलग है कि 21वीं सदी में आर्टिफिशल और केमिकल्स वाली दवाओं ( एलोपैथिक ड्रग्स) ने बहुत हद तक आम जनों का घरेलू और पारंपरिक उपचार पद्धतियों से विश्वास कम कर दिया। खैर, वजहें जो भी हैं, लेकिन सच यही है कि इस भागती-दौड़ती ज़िंदगी में हर व्यक्ति रफ्तार से चुस्त- दुरुस्त होना चाहता है। एलोपैथिक ड्रग्स कुछ समय के लिए ऐसा संभव भी कर देती हैं, लेकिन इन ड्रग्स के साइड इफेक्ट्स का भुगतान शरीर को किस हद तक करना पड़ सकता है, इसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल है। खैर, आज हम आपको कुछ ऐसे नुस्खे सुझा रहे हैं जो कि पूर्ण प्राकृतिक होने के अलावा आपकी सेहत दुरुस्त करने में भी महत्वपूर्ण हैं।

तिल के बारे में
तिल अपने बीजों की वजह से प्रचलित पौधा है। इसके बीजों से खाद्य तेल प्राप्त होता है। काले तिल का उपयोग औषधि के रूप में गुणकारी माना गया है। इसके तेल में प्रोटीन, सिसेमोलिन, लाइपेज, पामिटिक, लिनोलीक एसिड और कई प्रकार के ग्लिसराइडस पाए जाते हैं।
काले बालों और रूसी मिटाने के लिए

आदिवासियों के अनुसार तिल की जड़ और पत्तों का काढ़ा बना लिया जाए और इससे बालों को धोया जाए, तो बालों का रंग काला हो जाता है। डांगी आदिवासियों की मानी जाए, तो तिल के तेल को प्रतिदिन बालों में लगाने से बाल काले हो जाते हैं और इनका झड़ने का क्रम रुक जाता है। साथ ही रूसी से भी छुटकारा मिलता है।
गिलोय के बारे में

गिलोय एक बेल है जो अन्य पेड़ों पर चढ़ती है और इसे संपूर्ण भारत में उगता हुआ देखा जा सकता है। आयुर्वेद में इस पौधे का जिक्र अक्सर देखा जा सकता है। गिलोय को गुडूची के नाम से भी जाना जाता है। इसके प्रमुख रसायनों में गिलोइन नामक कड़वा ग्लूकोसाइड, वसा अल्कोहल ग्लिस्टेराल, बर्बेरिन एल्केलाइड, वसा अम्ल एवं उड़नशील तेल पाए जाते हैं। इसकी पत्तियों में कैल्शियम, प्रोटीन, फॉस्फोरस और तने में स्टार्च भी मिलता है।
कब्ज़ की समस्या दूर
गुड़ के साथ गिलोय का सेवन करने से कब्ज की समस्या दूर हो जाती है। पातालकोट के आदिवासी मानते हैं कि गिलोय के तने और बबूल की फल्लियों के चूर्ण की समान मात्रा सुबह-शाम मंजन की तरह उपयोग में लाई जाए, तो दांतों को ठंड या झुनझुनी लगना बंद हो जाता है।

समय से पहले महिलाओं के बाल झड़ने की ये हैं 10 वजहें



: बालों का असमय गिरना एक बहुत बड़ी समस्या बनती जा रही है जिसके लिए आजकल की तनाव और भागदौड़ भरी जिंदगी को जिम्मेदार ठहराना गलत नहीं होगा। लेकिन क्या आप जानते हैं कि खाने-पीने और सोने में थोड़ी सी भी लापरवाही से बाल झड़ने लग जाते हैं। बड़ी हैरानी की बात है कि आजकल ये सिर्फ पुरुष ही नहीं, बल्कि महिलाओं में भी देखा जा रहा है। महिलाओं पर बढ़ती जिम्मेदारी, हार्मोन चेंज भी इसकी वजहें हो सकती हैं। वैसे तो कई बार मौसम में बदलाव भी बालों के गिरने का कारण होता है, लेकिन अगर मौसम जाने के बाद भी इनका गिरना जारी है तो ध्यान देने वाली बात है। आज हम आपको बताएंगे 10 ऐसे कारण जिनके चलते महिलाओं के बाल भी ज़रूरत से ज़्यादा झड़ने लग गए हैं।
स्टाइलिंग- बालों के स्टाइल से आपका लुक तो चेंज होता ही है, लेकिन क्या आपको पता है कि बालों में बार- बार स्टाइलिंग करने से भी आपका लुक बिगड़ सकता है। बालों को नेचुरल घना और लंबा रखना है तो इस पर जैल, स्प्रे, कलर, मूस जैसे केमिकल्स लगाने से बचें। दरअसल, ज्यादा केमिकल सिर की त्वचा पर असर डालते हैं, जिससे बाल कमज़ोर होते हैं और फिर गिरना शुरू हो जाते हैं।गलत तरीके से कंघी करना, टाइट चोटी बांधना, बालों को एक ही स्टाइल में रखना भी इसकी एक खास वजह है।
हार्मोन्स में बदलाव- गर्भावस्था के पहले और बाद में महिलाओं में कई तरह के हार्मोनल बदलाव आते है। ये बदलाव भी बालों के झड़ने का कारण हो सकते हैं। इसके अलावा थायरॉइड, मासिक धर्म में अनियमितता भी वजहें हैं।

प्रेग्नेंसी के दौरान होने वाले बदलाव
खून की कमी- महिलाओं के शरीर में फोलिक एसिड की कमी और मासिक धर्म के चलते खून की कमी बन जाती है। खून की कमी से शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह ठीक से नहीं हो पाता। जब तक ऑक्सीजन हेयर फॉलिकल्स तक नहीं पहुंचेगा, तब तक उसे पोषण नहीं मिलेगा। इस पोषण की कमी से ही बाल असमय गिरने लगते हैं।
मासिक धर्म का बंद होना- जैसे ही महिलाएं इस स्टेज पर पहुंचती हैं, उनके बाल एकदम से गिरने शुरू हो जाते हैं। दरअसल, अब उनके शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन की मात्रा बहुत कम हो जाती है। इससे बाल रूखे और बेजान होकर टूटने लगते हैं। इसे रोकने के लिए माइल्ड शैंपू और खानपान पर ध्यान देना बहुत जरूरी है।
डिलीवरी- ज्यादातर महिलाओं में डिलीवरी के बाद बालों के गिरने की समस्या को देखा गया है, क्योंकि गर्भावस्था के दौरान एस्ट्रोजन हार्मोन का लेवल बहुत बढ़ जाता है और बच्चा पैदा होने के बाद ये फिर से अपने लेवल पर आ जाता है। ये उतार-चढ़ाव ही बालों के लिए नुकसानदायक साबित होता है। इस स्थिति में खाने-पीने पर ध्यान देकर आप इस समस्या से छुटकारा पा सकती हैं।
खान-पान पर ध्यान न देना
प्रोटीन- बालों को स्वस्थ्य और मजबूत बनाने के लिए आंतरिक और बाहरी दोनों तरफ से प्रोटीन बहुत जरूरी होता है। चना, स्प्राउट्स, मेथी, तिल, आंवला जैसी चीजों में नेचुरल प्रोटीन होता है, जो पचने के बाद अमीनो एसिड में टूटकर एंजाइम और हार्मोन बनाते हैं। ये बालों की जड़ों को मजबूत बनाकर उन्हें टूटने से रोकते हैं। इसके लिए आप प्रोटीन युक्त शैंपू और कंडीशनर का चुनाव भी कर सकते हैं।

इलाज- जो महिलाएं गर्भनिरोधक दवाओं का सेवन करती हैं, किसी भी प्रकार की हार्मोनल बैलेंस वाली दवाइयां लेती हैं या इलाज करा रही हैं, उनके साथ भी ये समस्या हो सकती है। कैंसर के मरीजों के बाल तुरंत झड़ जाते हैं। इसकी मुख्य वजह कीमोथेरेपी है।

वजन घटाना- बहुत ज्यादा डाइटिंग करना, एकदम से वजन घटाना भी बालों के ग्रोथ में समस्या पैदा कर सकता है। डाइटिंग के दौरान आप उन सभी खाने-पीने की चीज़ों को लेना बंद कर देते हैं जिनकी शरीर को आवश्यकता होती है और जो शरीर के साथ-साथ बालों को भी पोषण प्रदान होता है।

 अन्य वजहें

थायरॉइड - थायरॉइड की प्रॉब्लम से ट्रीडोथायरॉनीन और थायरॉक्सीन हार्मोन्स का निकलना बंद हो जाता है जो शरीर के विकास के लिए बहुत जरूरी है। हाइपरथॉयरडिज्म से जूझ रहे व्यक्ति के अंदर इसकी मात्रा ना के बराबर हो जाती है जिससे जरूरी तत्व बालों तक नहीं पहुंच पाते। लेकिन थायरॉइड के उपचार से इसे खत्म भी किया जा सकता है। हमारे शरीर में कई प्रकार की एंटीबॉडीज बनती हैं जो अनेक प्रकार के सेल्स और टिश्यूज़ से लड़ने में मददगार होती हैं। कई बार ये भी बालों के झड़ने की वजह बन जाती है।

कई प्रकार की बीमारियां- डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, स्ट्रेस(तनाव) भी बालों के झड़ने के कारण हैं। डायबिटीज से हमारे सर्कुलेटरी सिस्टम पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इससे शरीर में जरूरी पोषण और ऑक्सीजन बराबर मात्रा में नहीं पहुंच पाता। ब्लड सर्कुलेशन ठीक नहीं होने से बाल रूखे हो जाते हैं और असमय गिरने लगते हैं। इसके अलावा सिर की त्वचा पर फंगल संक्रमण के कारण भी बाल गिरने लगते हैं।

इन पत्तियों के सेवन से नाक और मुंह से बदबू आनी बंद हो जाती है, ये हैं 8 फायदे


 पेट की मरोड़, सूजन, सांस और नाक की बदबू की समस्या हो या चर्म और गठिया जैसे रोग, सभी प्रकार की समस्याओं का अचूक इलाज है जोंकमारी (एक प्रकार का पौधा) में। इसकी पत्तियों में छिपे हैं कई प्रकार के औषधीय तत्व, जो ना सिर्फ बीमारियों से लड़ते हैं, बल्कि सांप और कुत्ते के काटने पर ज़हर का असर मिटा देते हैं।
जोंकमारी के बारे में
अक्सर पैरों से कुचला जाने वाला जोंकमारी छोटा-सा मैदानी पौधा खूब औषधीय महत्व वाला है। कई आदिवासी अंचलों में इसे जिंगनी और धब्बर भी कहा जाता है। भारत वर्ष के अनेक इलाकों में इसे कृष्ण नील भी कहा जाता है। आदिवासियों के अनुसार, यह पौधा तीखा और कड़वा होता है। इसका वानस्पतिक नाम एनागेलिस आरवेंसिस है। चलिए आज जानते है जोंकमारी से जुड़े देसी हर्बल नुस्खों के बारे में..
दूर करे सांसों की बदबू
किसी की नाक और मुंह से ज्यादा बदबू आती हो, तो इस पौधे की कुछ पत्तियों का सेवन करने से और पत्तियों को सूंघने से बदबू आना बंद हो जाती है।
सूजन, मरोड़ मिटाने में कारगर
गैस या अन्य किसी वजह से पेट में सूजन हो या मरोड़ चल रही हो, तो इस पौधे का लेप पेट के ऊपर लगाने से राहत मिलती है।
 बुखार में आराम, गठिया रोग से निजात, चर्म रोगों से छुटाकारा, जहर काटने में सक्षम, संक्रमण से बचाव।
ठीक करे बुखार
अचानक चक्कर खाकर कोई गिर पड़े और दांतो को कस बैठे, तो जोंकमारी की पत्तियों को हथेली में कुचलकर रोगी के नाक पास ले जाएं। अगर यह उसे सुंघाया जाए, तो तबीयत जल्द ही ठीक हो जाती है।
गठिया रोग में फायदेमंद
गठिया रोग में इस पूरे पौधे को कुचलकर दर्द वाले भाग पर लगाया जाए, तो आराम मिलता है। तिल के तेल में इसकी पत्तियों के रस को मिलाकर दर्द वाले हिस्सों पर लगाया जाए तो बहुत जल्दी आराम मिलता है।
मिट्टी के तेल में मिलाने से भी गठिया रोग में फायदा
राजस्थान में ग्रामीण अंचलों मे लोग जोंकमारी के साथ मिट्टी के तेल और कपूर को मिलाकर लगाते हैं। इससे गठिया रोग में काफी फायदा होता है।
चर्म रोग दूर करे
आदिवासी इसकी पत्तियों को कुचलकर नहाने के पानी में मिला देते हैं और उस पानी से स्नान किया जाता है। माना जाता है कि ऐसा करने से त्वचा के रोग दूर हो जाते हैं।
जहर काटने में मददगार
पातालकोट के आदिवासी कहते हैं कि यदि कुत्ते ने काट लिया हो, तो तुरंत जोंकमारी की पत्तियों को रगड़कर घाव पर लगाना चाहिए, जबकि डांग-गुजरात के आदिवासी इस फॉर्मूले को सांप के काटने पर उसका ज़हर उतारने के लिए आजमाते हैं। इन आदिवासियों के अनुसार ये पौधा जहर को काटता है।
संक्रमण की समस्या से निजात
इसकी पत्तियों में पाए जाने वाले रसायन बैक्टिरियल इन्फेक्शन को रोकने में बेहद कारगर हैं। त्वचा पर खुजली या संक्रमण होने की दशा में इसकी 3-4 पत्तियों को कुचलकर प्रभावित अंगों पर लगाया जाए, तो आराम मिलता है।

शरीर स्वस्थ बनाये,नुस्खे



1-सुपारी बनाए चमकदार दांत: साफ सुपारी को बारीक पीस लें। इसमें लगभग 5 बूंद नींबू का रस और थोड़ा सा काला या सेंधा नमक मिला लें। प्रतिदिन इस चूर्ण से मंजन किया करेंगे, तो दांत चमक जाएंगे।

2-चींटी भगाने के लिए लौंग: अक्सर शक्कर के डिब्बे और चावल के बोरों या बर्तन में चींटियों को घूमते फिरते देखा जा सकता है, और इससे हम सभी त्रस्त हो जाते हैं। करीब 2-4 लौंग को इन डिब्बों में डाल दीजिए और फिर देखिए चींटियां किस तरह से भागती हैं।
3-अक्सर आदिवासी खाना पकाने बाद आस-पास 1 या 2 लौंग को बर्तनों के पास रख देते हैं। इसके बाद मज़ाल है कि आस- पास कोई भी चींटी भटके।
4-गुड़हल से फूल से लाएं जूतों में चमक: करीब 4-5 ताजे गुड़हल/ जासवंत के फूलों को अपने जूतों पर रगड़ें और फिर देखिए कि
किस तरह से आपके जूतों में रंगत आती है, और जूते चमकदार हो जाते हैं।
5-नाखूनों की चमक और सुंदरता: अरण्डी के तेल को नाखूनों की सतह पर कुछ देर हल्के हाथ से मालिश करें। हर रोज़ सोने से पहले
ऐसा किया जाए, तो नाखूनों में जबरदस्त खूबसूरती और चमक आ जाती है। पाताल -कोट मध्यप्रदेश के आदिवासियों के अनुसार ऐसा करने से नाखूनों पर सफेद निशान या धब्बे (ल्युकोनायसिया) भी मिट जाते हैं।
6-नमक का पसीजना: वातावरण में नमी होने पर अक्सर नमक के पसीज जाने की शिकायत रहती है। नमक के कंटेनर में 10- 15 चावल के कच्चे दाने डाल दिए जाएं, नमक पसीजेगा नहीं।
7-सेब से टुकड़ों से दूर होगी कार के अंदर की गंध: सेब काटकर टुकड़े तैयार कर लें और इन टुकड़ों को कप या छोटी कटोरी में डालकर कार की सीट्स के नीचे फ्लोर पर ही रख दें। एक दो दिन में ये टुकड़े सिकुड़
जाएंगे। यह प्रक्रिया दोहराएं। धीरे-धीरे गंध दूर होती जाएगी।
8-कोलेस्ट्रॉल कम करना: क्या आप जानते हैं कि लहसुन की सिर्फ दो कलियों का प्रतिदिन सेवन आपके शरीर से खतरनाक कोलेस्ट्रॉल
का स्तर कम कर देता है और साथ ही उच्च रक्त चाप को सामान्य करने में मदद करता है? इसके लिए लहसुन की दो कलियों को छीलकर चबाएं। ऐसा प्रतिदिन सुबह खाली पेट किया जाए और एक गिलास पानी का सेवन किया जाए, तो यह कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करने के साथ-साथ आपके उच्च रक्तचाप को भी सामान्य करने में सहायक होता है। आदिवासियों के अनुसार लगातार तीन महीने तक ऐसा किए जाने से शरीर में ट्यूमर बनने की संभावनाएं भी कम हो जाती हैं।
9-डायबिटीज़ नियंत्रण के लिए देसी नुस्खा: लगभग एक चम्मच अलसी के बीजों को खूब चबाया जाए और एक गिलास पानी का सेवन
किया जाए, तो ऐसा प्रतिदिन सुबह खाली पेट और रात को सोने से पहले करने से फायदा पहुंचता है।